Hindi tips for piles – bawaseer ka ilaj – बवासीर के लक्षण, घरेलू उपाय

अगर आप पाईल्स (piles) या हेमोर्रोइड्स (hemorrhoids) से पीड़ित हैं तो ये बेहद जरूरी है कि इसके उपचार में बेहद सावधानी बरती जायें ताकि हालात और अधिक ना बिगड़े। सबसे पहले तो आपको ये बताते हैं कि बवासीर (piles) होती क्या है? मानव शरीर के हर भाग में रक्त नलिकाएं होती हैं और हमारे गुदा (Anus) वाले हिस्से में भी रक्त नलिकाएं पाई जाती है। कई बार किसी अतिरिक्त दबाव या अन्य किसी वजह से शरीर के निचले मलाशय (rectum) की तरफ गुदें की रक्त नलिकाओं में सूजन आ जाती है और इस वजह से मस्से हो जाते हैं। ये समस्या बवासीर का रूप ले सकती है। बवासीर को चिकित्सकीय भाषा में पाईल्स या हेमोर्रोइड्स भी कहा जाता है।

बवासीर के प्रकार (Types of Piles)

पाईल्स की बीमारी में होने वाले दर्द एवं इसके होने के स्थान की वजह से बवासीर दो तरह की हो सकती है- आंतरिक एवं बाहरी।

बाहरी बवासीर (Perianal hematoma)

रक्त नलिकाओं में सूजन की वजह से गुदा के बाहरी भाग में छोटी छोटी गांठें हो जाती हैं जो कि बाहरी बवासीर का कारण बनती हैं। इन गांठों में रक्त जम जाता है और इसकी वजह से बाहरी बवासीर में मरीज को असहनीय दर्द महसूस होता। हालाँकि ये आंतरिक बवासीर के मुकाबले काफी कम मात्रा में देखने को मिलती है मगर इसमें जलन और दर्द आंतरिक बवासीर के मुकाबले बहुत अधिक होते हैं। कई बार बाहरी बवासीर में घरेलू उपाय से भी आराम ना मिलने पर सर्जरी तक करने की आवश्यकता पड़ जाती है।

आंतरिक/ अंदरूनी बवासीर (Internal Hemorrhoids)

आंतरिक बवासीर आज कल बहुत ही आम है। जब गुदा के अंदरूनी भाग की रक्त नलिकाओं में सूजन की वजह से मस्से होते हैं तो ये अंदरूनी बवासीर के लक्षण होते हैं। आंतरिक बवासीर की दशा में अंदरूनी रूप से रक्त का स्राव होता है, जिसमें दर्द नहीं होता।

बवासीर की अवस्थाएं (Stages of piles)

अंदरूनी बवासीर में मस्से गुदा के अंदर होने की वजह से कई बार इसका लम्बे समय तक मरीज को पता नहीं चलता है कि वह इस समस्या से पीड़ित हैं। दर्द की तीव्रता के अनुसार वक़्त के साथ अंदरूनी बवासीर की तीन अवस्थाएं होती हैं।

  • प्रथम अवस्था – ये शुरुआती अवस्था है और इसमें रक्त नलिकाओं में सूजन बहुत कम होती हैं। इसमें कोई भी दर्द महसूस नहीं होता हैं। कभी कभी मल त्याग करते समय गुदा भाग से खून आ सकता है।
  • दूसरी अवस्था – इस स्टेज में रक्त नलिकाओं में सूजन बढ़ जाती है और कई बार मल उत्सर्जित करते समय अधिक जोर लगाने पर खून के साथ साथ मस्से भी बाहर आ सकते हैं।
  • तीसरी अवस्था – इस समय रक्त नलिकाओं में सूजन बहुत अधिक हो जाती हैं। इस समय मस्सों में बहुत ज्यादा दर्द होता है। इस समय मल त्याग करते समय मस्सों के साथ साथ खून भी आने लगता है।

बवासीर के बारे में मालूम होते ही ये बेहद जरूरी है कि इस आलेख में दिए उपायों को अपनाकर और अपनी दिनचर्या में बदलाव करके इससे जल्दी से जल्दी निजात पाने की कोशिश की जाये। बवासीर को ठीक करने के लिए यहाँ पर दिए गए घरेलू उपचारों में से किसी का भी सहारा लिया जा सकता है।

बवासीर के कारण (Reasons of piles/ hemorrhoids)

पाईल्स के कारण कई हो सकते हैं और दुनिया में लगभग 50% लोग अपने जीवन काल में कभी ना कभी बवासीर से पीड़ित होते हैं। इस बीमारी के जिनमें से ये कुछ प्रमुख कारण हैं :-

  • आनुवंशिकता (Hereditary): बवासीर की समस्या में वंशागत/ आनुवंशिक कारण सबसे महत्वपूर्ण कारण है। अगर आपके परिवार में माता पिता या किसी अन्य को कभी पाईल्स की समस्या रही है तो बहुत अधिक आसार है कि आप भी बवासीर से पीड़ित हो सकते हैं। आनुवंशिक कारणों से गुदा की रक्त नलिकाओं की अंदरूनी परत कमजोर हो जाती है जिससे बवासीर होती है।
  • खान-पान (Diet): खान-पान में अनियमितता बवासीर की मुख्य वजह है। बहुत अधिक मसाले युक्त और तेल वाले भोजन का लगातार सेवन पाचन तंत्र को कमजोर करके बवासीर को न्योता देता है।
  • दिनचर्या (Lifestyle): हमारी दैनिक दिनचर्या में अनियमितता भी बवासीर का कारण है। मदिरा पान, धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से भी बवासीर होती है।
  • गर्भावस्था / Pregnancy: शरीर में हॉर्मोन्स में बदलाव और पेट के फुलाव के कारण कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बवासीर की शिकायत होती है।
  • मोटापा (Obesity): अगर आपका वजन औसत से अधिक है तो आपके बवासीर से पीड़ित होने के आसार अन्य व्यक्तियों की तुलना में दुगने हो जाते हैं।
  • कब्ज (Constipation): पेट में बार बार कब्ज की समस्या से मल त्याग के समय अतिरिक्त जोर लगाना पड़ता है और इससे मलाशय की रक्त नलिकायों में दबाव कि वजह से बवासीर की परेशानी होती है।
  • बुढ़ापा (Ageing): उम्र बढ़ने के साथ मलाशय का अंदरूनी भाग कमजोर हो जाता है और इसी कारण बुजुर्ग लोग बवासीर के अधिक शिकार होते हैं।
  • अप्राकृतिक सेक्स (Anal Sex): अप्राकृतिक सेक्स करने से भी गुदा पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और इसकी वजह से पाईल्स की परेशानी होती हैं।
  • शरीर में फाइबर की कमी भी बवासीर का कारण है।
  • कई बार गुदे की कैविटी में असामान्य बढ़ोतरी भी पाईल्स का कारण बनती है।
  • एक स्थान पर लम्बे समय तक बैठे रहने से भी पाईल्स की समस्या हो जाती है।

बवासीर के लक्षण (Symptoms of piles)

बवासीर के कारण तो हमने आपको बता दिए हैं मगर अब ये जानना भी बेहद जरूरी है कि पाईल्स के लक्षण क्या हैं? वो कौनसे लक्षण हैं जिनसे आप ये जान सकते हैं कि आप बवासीर की बीमारी से पीड़ित हैं। इसीलिए यहाँ पर हम बवासीर के मुख्य लक्षण बता रहें हैं :-

  • रक्त की मौजूदगी एक ऐसा लक्षण है जो हमेशा बवासीर की स्थिति में दिखता है। अगर आपकोअंदरूनी बवासीर है तो आपको टॉयलेट पेपर (toilet paper) पर खून के निशान दिख सकते हैं।
  • अगर आपकोबाहरी बवासीर है तो आपको मलाशय के पास खून का थक्का जमा हुआ या सूजन दिखाई दे सकती है।
  • गुदा में खुजली तथा मलाशय में दर्द भी बवासीर का लक्षण है।
  • मलाशय के पास खुजली या चिडचिडापन बवासीर का लक्षण है।
  • मल को त्यागने के समय खून का निकलना पाईल्स की निशानी है।

पाईल्स का उपचार, बवासीर के घरेलू उपाय (home remedies of piles)

अभी तक हमने पाईल्स के कारण और लक्षणों से आपको अवगत कराया है। अब वक़्त है कि अगर आपको बवासीर है तो इससे छुटकारा पाने के घरेलू उपायों की भी आपको जानकारी दें। पाईल्स के घरेलू उपचार ये हैं :-

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बर्फ से बवासीर का इलाज (treatment of piles with ice)

पाईल्स में राहत प्रदान करने में बर्फ काफी कारगर साबित होती है। बर्फ रक्त की धमनियों को सिकोड़कर, सूजन कम करती है और आपको दर्द से तुरंत निजात दिलाने का काम करती है। इससे खुजली से तुरंत आराम मिलता है। ठंडी सिकाई की मदद से सूजन काफी कम हो जाती है और इसके फलस्वरूप आपके लिए मल त्याग करना काफी आसान हो जाता है। अतः एक साफ़ कपड़े में बर्फ का टुकड़ा बांधें तथा इसका प्रयोग अपने बवासीर के ऊपर करें। बवासीर से प्रभावित क्षेत्र में आइस पैक (ice pack) या एक कपड़े में बर्फ का टुकड़ा लपेटकर 10 मिनट के लिए लगाकर रखें। हेमोर्रोइड्स के ठीक होने तक इसका प्रयोग दिन में 2-3 बार करें। आप मटर या कॉर्न (corn) जैसी बर्फ में जमी हुई सब्जियों के छोटे पैक का भी प्रयोग कर सकते हैं। एक टी टॉवल (tea towel) में इस पैक को लपेटें एवं इसका प्रयोग बवासीर प्रभावित भाग पर करें। ऐसा बीस- बीस मिनट के लिए दिन में तीन बार करें।

एलोवेरा से बवासीर का इलाज (treatment of piles with Aloe-Vera)

एलोवेरा हेमोर्रोइड्स का इलाज करने के लिए श्रेष्ठ प्राकृतिक के तत्वों में से एक है। यह काफी आसान तरीकों से बवासीर के लक्षणों से आपको निजात दिलाता है। एलोवेरा में काफी जलन रोधी गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने का काफी बेहतरीन तरीका साबित होता है। एलोवेरा के जलन रोधी एवं उपचारात्मक गुण, पाईल्स की वजह से होने वाले चिड़चिड़ेपन को कम करने में सहायता करते हैं। एलोवेरा जलन और सूजन को कम करने में आपकी मदद करता है। सूजी हुई धमनियों को ठीक करने के लिए एलोवेरा की पत्तियों से निकाले गए जेल (gel) का प्रयोग कर सकते हैं। एलोवेरा बवासीर का अचूक इलाज है।

एलोवेरा का प्रयोग आंतरिक एवं बाहरी दोनों बवासीर के लिए किया जा सकता है। बाहरी बवासीर का इलाज करने के लिए अपने मल द्वार पर थोड़ा सा एलोवेरा जेल लगाएं एवं धीरे धीरे इसकी मालिश करें। यह आसान इलाज आपको दर्द से मुक्ति देगा एवं जलन दूर करेगा। अंदरूनी बवासीर के लिए एलोवेरा के पत्तों को काट लें और ये अवश्य सुनिश्चित कर ले कि इसके कंटीले भाग को हटा दिया गया हो। इन कटे हुए पत्तों को एक पात्र में रखकर फ्रीजर में जमा लें। अब इस बर्फीले और बेहद ठन्डे एलोवेरा के टुकड़े को दर्द वाले बवासीर पर थोड़ी देर के लिए लगा कर रखे। इसके प्रयोग से बवासीर से होने वाले दर्द, जलन एवं खुजली में राहत मिलेगी।

बादाम का तेल है बवासीर की दवा (Almond Oil to treat piles)

बादाम का तेल कोशिकाओं में गहराई तक सोखें जाने के लिए जाना जाता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से बाहरी हेमोर्रोइड्स के इलाज के लिए किया जाता है। शुद्ध बादाम के तेल में रुई के टुकड़े को डुबोएं एवं इसको प्रभावित भाग पर लगाकर रखें। यह त्वचा को नमी प्रदान कर, सूजन एवं जलन से राहत दिलाता है। इसके नियमित प्रयोग से मल द्वार के आसपास जलन एवं खुजली होने का अहसास काफी कम हो जाता है। इसका प्रयोग दिन में दो से तीन बार करें।

नारियल की जटाओं से खूनी बवासीर का रामबाण इलाज (Treatment of bloody piles with coconut shell)

पुरानी या खूनी बवासीर का इलाज बहुत कठिन होता लेकिन नारियल की जटाओं के प्रयोग से दोनों ही तरह की बवासीर का उपचार संभव है। बादी या खूनी बवासीर, दोनों में ही नारियल की जटाओं की भस्म बहुत कारगर उपाय है। एक नारियल की जटाओं को जलाकर राख या भस्म बना लें और इस राख को ताज़े मट्ठे/ छाछ में मिलाकर सुबह खाली पेट तीन दिन तक नियमित रूप से पीयें। यह बवासीर का शर्तिया इलाज है।

जीरे से बवासीर के दर्द का इलाज (jeera se piles ka ilaj)

अगर आपको बवासीर के मस्से हैं और इसकी वजह से आपको बहुत बेचैनी महसूस होती है, तो जीरे के दानों को पानी के साथ पीसकर एक लेप बना लें और इसे मस्सों वाली जगह पर लगायें। इसको लगाने से जलन और पीड़ा शांत होती है। अगर आपको खूनी बवासीर का इलाज घर पर करना है जो जीरे को भूनकर मिश्री के साथ पीस लें और इसका दिन में 2 से 3 बार सेवन करें।

बवासीर के लिए सेब का सिरका (Apple cider vinegar for piles)

सेब का सिरका बवासीर की समस्या को दूर करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक पात्र में थोड़ा सा सेब का सिरका लें और इसमें रुई का कपड़ा डुबोएं। इसे अपने बवासीर से प्रभावित भाग पर लगाये और तुरंत आराम प्राप्त करें। हालांकि इसे सीधा प्रभावित भाग पर लगाने से आपको कुछ देर तक काफी जलन महसूस होगी, मगर ये पाईल्स के दर्द में तुरंत आराम प्रदान करता है और खुजली को भी कम कर देता है। अगर बवासीर बहुत ज्यादा हो रखी है तो आप इसका प्रयोग करने से परहेज भी कर सकते हैं। यह विधि सिर्फ बाहरी बवासीर के लिए ही है। अंदरूनी बवासीर के लिए एक चम्मच सेब के सिरके में थोड़ा सा पानी मिश्रित करके पीयें। इसे मलाशय में होने वाले दर्द और गुदा से खून निकलने की समस्या से छुटकारा मिलता है।

बवासीर का उपाय गर्म पानी से (piles treatment with hot water)

बवासीर के इलाज में गर्म पानी बहुत अच्छा उपाय है। एक बड़े टब में गुनगुना पानी भरें और उस टब के गर्म पानी में बैठ जायें। गर्म पानी में खुद को डुबोये रखने से खुजली और दर्द से छुटकारा प्राप्त होता है। इससे रक्त की धमनियों को सुकून मिलता है। 15 से 20 मिनट तक प्रभावित भागों को गर्म पानी में डुबोकर रखें। आप चाहें तो प्रभावित भाग को गर्म पानी में तौलिया भिगो कर भी पोंछ सकते हैं, क्योंकि इससे पाईल्स के सूखने में आसानी होती है। बेहतर परिणामों के लिए इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराएं।

जैतून के तेल से बवासीर की पीड़ा को कम करें (olive oil to remove piles pain)

जैतून का तेल एक बेहतरीन उत्पाद है और इससे बवासीर को ठीक करने में मदद मिलती है। यह प्रभावित भाग को आराम प्रदान करता है और इसे जलन से बचाता है। जैतून का तेल रक्त की धमनियों के लचीलेपन में वृद्धि करता है। रोजाना भोजन के साथ भी थोड़ी सी मात्रा में जैतून के तेल का सेवन करें। यह मल की कठोरता को भी काफी कम कर देता है और इससे मल निकासी की क्रिया काफी अच्छे से होती है। ऐसा होने का मुख्य कारण जैतून के तेल में मौजूद मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स (monounsaturated fatty acids) का होना है।

पानी है बवासीर का सर्वश्रेष्ठ घरेलू उपचार (Hydration best home remedy for piles)

रोजाना कम से कम 6 से 8 गिलास पानी पीना चाहिए, क्योंकि पानी शरीर की अशुद्धियों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। पानी आपके मलाशय को स्वस्थ बनाकर रखता है, जिससे ये नर्म और नमी युक्त रहता है और आपका मल भी नर्म रहता है। अगर शरीर में पानी की कमी होती है तो जलन व दर्द की वजह से मल त्याग के समय बहुत ही कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

बवासीर का घरेलू उपचार छाछ से (Buttermilk for piles)

छाछ बवासीर के घरेलू उपचारों में एक बेहतरीन विकल्प है। एक चौथाई चम्मच अजवाइन का पाउडर और एक चुटकी काला नमक, 1 गिलास छाछ में मिश्रित करें। रोजाना दोपहर का खाना खाने के बाद एक गिलास मिश्रण का सेवन करें। इससे आपको बवासीर की समस्या से काफी आराम मिलेगा। छाछ आपको दर्द से बचाता है और शरीर में नमी का संचार करता है।

प्याज से बवासीर का इलाज (Treatment of bawaseer with onion)

प्याज बवासीर के इलाज में काफी फायदेमंद साबित होते हैं। एक प्याज को दही या छाछ के साथ मिलाकर खाने से बवासीर की समस्या से काफी राहत मिलती है। प्याज बवासीर का काफी उत्तम इलाज हैं।

पपीता का रस और सरसों का तेल (papaya juice with mustard oil)

बवासीर से प्रभावित भाग पर पपीता का रस और सरसों के तेल का लेप लगाने पर बवासीर का दर्द जल्दी से कम होता है। हर रात को सोने से पहले इस लेप को लगा कर सोयें।

बवासीर के उपचार में करें इन खाद्य पदार्थों का सेवन (Foods to eat to get rid of hemorrhoids)

अगर आप बवासीर से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको इन खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में अवश्य शामिल करना चाहिए।

बवासीर का उपचार हैं अदरक, पुदीना, नींबू और शहद (Ginger, mint and lemon juice)

अपने पाचन तंत्र को मजबूत करने के लिए और बवासीर से छुटकारा पाने के लिए एक हर रोज सुबह खाली पेट डिटॉक्स सोल्युशन पीना चाहिए। इस डिटॉक्स पेय को तैयार करने के लिए एक ताजा अदरक का टुकड़ा, पुदीने की पत्तियां, आधे नींबू का रस और एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी में मिलाये। इसके प्रतिदिन सेवन से बवासीर की वजह से होने वाले दर्द और जलन में बहुत आराम मिलता है।

फाइबर युक्त भोजन से बवासीर का इलाज (Bawaseer ka ilaj with fiber food)

खाना आसानी से हज़म करने और मलाशय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन काफी फायदेमंद होता है। फाइबर के पोषक तत्व मल को नर्म करने में मदद करते हैं और आँतों की सारी प्रणाली को साफ़ सुथरा रखने में सहायता करते हैं। फाइबर युक्त भोजन के सेवन से कब्ज की समस्या से भी आराम प्राप्त होता है। फाइबर युक्त भोजनों में पटसन के बीज, नाशपाती, हरी सब्जियां और बीन्स (beans) प्रमुख हैं। पाईल्स का इलाज करने के लिए सबसे पहले भोजन के हाजमे पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर भोजन नहीं पचेगा तो मल त्याग करने में भी असुविधा होगी और निश्चित रूप से पाईल्स की समस्या और विकट हो जाएगी।

जामुन

जामुन की गुठली और आम की गुठली को समान वजन में लेकर, इनको सुखाकर एक चूर्ण बना लें। प्रतिदिन एक चम्मच इस चूर्ण का सेवन पानी या छाछ के साथ करने से बवासीर में आराम मिलता है।

अंजीर से पाईल्स का प्राकृतिक उपचार (Anjeer for natural treatment of piles)

अंजीर शरीर के लिए बहुत फायदेमंद मेवों में से एक है, अगर आपको बवासीर के साथ मस्सों की भी शिकायत हो तो रात में 3 अंजीर पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन कर ऊपर से पानी पी लें। इसके आधे घंटे बाद तक कुछ ना खाएं। अगर इस उपाय को रोजाना किया जाये तो ये बवासीर के मस्से (Bavaseer ke masse) में बहुत लाभ पहुंचाता है।

पपीते से पायें पाईल्स से मुक्ति (papaya for piles)

दोपहर का भोजन कर लेने के आधे घंटे के बाद आधा किलो पपीते का सेवन करने से बवासीर में आराम मिलता है। पपीता के साथ साथ मूली भी बवासीर का अचूक उपचार है।

किशमिश

रोजाना रात में थोड़ी किशमिश पानी में भिगो दें और सुबह इसे पानी में पीस कर एक गिलास पानी के साथ सेवन करने से बवासीर में आराम मिलता।

कैस्टर आयल और दूध (Castor oil with milk)

एक कप दूध में आधा चम्मच कैस्टर आयल मिलाकर हर सुबह पीने से रेक्टम की मांसपेशियों नर्म होती है और मल त्याग बहुत आसानी से होता है। इसे रोजाना पीने से बवासीर के दर्द में भी राहत मिलती है।

त्रिफला चूर्ण (Triphala)

शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की कमी पूरी करने के लिए प्रतिदिन रात में त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए। इसकी वजह से भविष्य में बवासीर के होने की संभावना भी कम हो जाती है।

बड़ी इलायची

बड़ी इलायची बवासीर का बहुत अच्छा इलाज है। भुनी हुई बड़ी इलायची को पीस कर चूर्ण बना लेना चाहिए और प्रतिदिन सुबह खाली पेट इस चूर्ण का पानी के साथ सेवन करने से पाईल्स ठीक हो जाती है।

अंकुरित अनाज (Sprouted grains)

हर सुबह अंकुरित अनाज का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और बवासीर की परेशानी में आराम मिलता है।

बवासीर से बचाव के लिए इन खाद्य पदार्थों का परहेज करें (Foods to avoid to get rid of piles)

ऐसे भी खाद्य पदार्थ होते हैं जिनके सेवन से बवासीर की बीमारी बढ़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि बवासीर के मरीजों को इन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

बेकरी प्रोडक्ट्स (Bakery products)

बेकरी प्रोडक्ट्स परिष्कृत आटे से बनते हैं और परिष्कृत आटे में फाइबर की कमी होती है। यह कब्ज की वजह बनता है। परिष्कृत आटे से बने बेकरी प्रोडक्ट्स का सेवन बवासीर के मरीजों को नहीं करना चाहिए।

चाय- कॉफी (Tea andCoffee)

हमारे यहाँ जब तक सुबह चाय या कॉफी का सेवन ना किया जाये सुबह की शुरुआत ही नहीं होती है। मगर पाईल्स के मरीजों लिए इनका सेवन उनकी समस्या को और खराब कर सकता हैं। यदि आप बवासीर से पीड़ित हैं, तो आप इन पेय पदार्थों से दूर रहें।

मसाला और मिर्च वाला भोजन (avoid spicy food)

तेज मिर्च और मसाले वाला भोजन बवासीर का कारण है और आपकी स्थिति को और खराब बना सकता है। इसके सेवन से बवासीर के अल्सर/ मस्से और अधिक बढ़ जाते हैं। इसलिए अगर आप piles से पीड़ित हैं तो मिर्च और मसालें वाले भोजन को आज ही पूरी तरह से त्याग दे।

चॉकलेट (Chocolate)

चॉकलेट किसे पसंद नहीं होती है मगर जब आप बवासीर से पीड़ित होते है तो सलाह दी जाती है कि आप इसका सेवन ना करें। चॉकलेट खाने से शरीर में कब्ज होती है।

संसाधित मांस (Processed Meat)

मांस का पाचन वैसे ही इतना आसान नहीं होता है, ऐसे में अगर वो मांस प्रोसेस्ड हो तो हमारे पेट के लिए उसे पचाना बहुत मुश्किल हो जाता है और यह कब्ज की समस्या को बढ़ा कर सकता है।

बवासीर से रोकथाम के उपाय (prevention tips to avoid piles)

बवासीर को ठीक करने के लिए सही टॉयलेट आदतें अपनाना बेहद जरूरी है। इससे बवासीर को नियंत्रित कर सकते हैं। उन्हीं कुछ आदतों को हम बता रहें हैं जिन्हें आपको कब्ज और बवासीर से छुटकारा पाने के लिए पालन करना चाहिए-

  • शौचालय में घंटों तक बैठे रहने से गुदा की मांसपेशियों पर बहुत दबाव आता है बवासीर की समस्या हो जाती है। अगर पहले से बवासीर हो तो और अधिक बढ़ जाती है, जिससे अधिक दर्द होता है। शौचालय में 5-10 मिनट से अधिक समय तक ना व्यतीत करें। रोजाना शौचालय जाने का एक समय तय करें।
  • जब भी आपको मल त्याग करने की इच्छा महसूस हो तुरंत शौचालय का इस्तेमाल करें और इसे रोककर ना रखें। इसे रोकने से आपको कब्ज की समस्या हो सकती है और गुदा की रक्त नलिकाओं में भी तनाव हो सकता है। इसलिए, जब आपको शौचालय जाने की जरूरत महसूस हो तो किसी बेहतर वक्त का इंतजार ना करें और जाए।

बवासीर के घरेलू उपचार या नुस्खे (home remedies for piles treatment in Hindi)

  1. केला बवासीर को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में काफी कारगर विधि है क्योंकि यह लैक्सेटिव के लिए जाना जाता है। पके हुए केलों को उबालें और उनका दिन में दो बार सेवन करें।
  2. बवासीर से मुक्ति पानी है तो जैतून के तेल को गरम करके सूजन पर लगाएं।
  3. 1 गिलास लस्सी में 1 चम्मच नींबू का रस और आधा चम्मच नमक डालकर पीने से भी बवासीर की समस्या का निदान होता है।
  4. दूध में बरगद का लैटेक्स मिलाकर सेवन करने से काफी फायदा होता है। अगर रोजाना इसका प्रयोग किया जाए तो ये पाईल्स कि समस्या को दूर करता है।
  5. बवासीर की समस्या को आसानी से दूर करने के लिए 1 कप दही लें और उसमें थोड़ा सरसों का पाउडर मिलाएं और इसे पीकर आराम करें। घर पर बनी दही का प्रयोग फायदेमंद रहता है।
  6. काले जामुन में जलन दूर करने के प्राकृतिक तत्व होते हैं। अच्छे परिणामों के लिए इनका रोजाना सेवन करें। आप काले जामुनों के अलावा अंगूरों का भी सेवन कर सकते हैं।
  7. अदरक, मीठे नींबू, पुदीने और शहद का मिश्रण तैयार करके उसका सेवन करने से भी बवासीर की दशा में काफी लाभ मिलता है।
  8. बवासीर होने पर पिसे हुए अनाज के स्थान पर साबुत अनाज का उपयोग करें।
  9. पाईल्स को ठीक करने और शरीर को दुरुस्त रखने के लिए प्रतिदिन मूली का रस पीये क्योंकि यह एक प्राकृतिक उत्पाद है और पाईल्स की वजह से होने वाली पीड़ा को दूर भगाता है। आप 1/4 या आधा कप मूली का रस प्रतिदिन ले सकते हैं। रोजाना इसके प्रयोग से अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
  10. बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज भी है। बवासीर ठीक करने के लिए शलजम का रस या लौकी के पत्तों का रस भी काफी फायदेमंद होता है।
  11. शरीर से गन्दगी निकालने के लिए नीम के पत्तों और गेहूं की घास का रस पीना फायदेमंद रहता है। इसके लिए इन्हें पानी में थोड़ी देर उबालकर इनका रस निकालकर पीये।
  12. शरीर को पोषण देने के लिए उबले चावल बनाएं और उसमें दही और पके हुए केले डालें। इससे शरीर को ठंडक मिलती है और बवासीर की जलन में राहत मिलती है।
  13. प्याज का रस निकालकर थोड़ी चीनी और पानी मिलाकर पीयें। यह सेहतमंद होने के साथ ही बनाने में भी आसान है।
  14. बवासीर के कई दुष्परिणाम होते हैं जिनसे निपटने के लिए जीरा आपकी सहायता करता है। जीरे को भूनकर उनका पाउडर बनाएं। एक चम्मच जीरे को एक गिलास पानी में मिलाकर प्रयोग करें।
  15. मलाशय की नसों में सूजन और जलन को कम करने के लिए उस भाग में बेकिंग पाउडर लगाएं। आप गाजर या बीट रूट के रस का भी उपयोग कर सकते हैं। सूजे हुए भाग में जलन को दूर करने के लिए एलोवेरा का सेवन करें।
  16. बवासीर की पीड़ा को दूर करने के लिए रोजाना इमली के फूलों से निकाला हुआ रस पीयें।
  17. आम की गुठली को धूप में सुखाएं और उसको पीसकर पाउडर बनाएं। अब एक पात्र में बराबर मात्रा में ये पाउडर और शहद लें। ये बवासीर ठीक करने के सबसे कारगर उपायों में से एक है।

ये सब घरेलू उपचार आपको बवासीर से आराम दिला सकते हैं मगर इस समस्या को जड़ से मिटने के लिए जरूरी है कि आप अपने खान पान का विशेष ध्यान रखें और तेज मसाले युक्त भोजन का सेवन ना करें। फाइबर युक्त भोजन का सेवन करें।