How to maintain breasts round and firm from teenage? – टीनएज में देखभाल से, कैसे करें वक्षों का आकार गोल और सुदृढ़?

टीनएज (teenage) की अवस्था में लड़कियों के शरीर में बहुत तेज़ी से परिवर्तन होते हैं, जिसका अनुभव वे होर्मोंस में बदलाव (hormonal change) और शारीरिक विकास के साथ और अन्य बदलावों के माध्यम से करते हैं।

इन परिवर्तनों के होने और उनके प्रभावों के साथ उनसे जुड़े तथ्यों को जानना महत्वपूर्ण है जो किशोरियों के लिए लंबे समय तक लाभदायक होता है। इस आलेख में हम आपको वक्षों के विकास के कुछ प्रारम्भिक चरणों के बारे में जानकारी देंगे, साथ ही कुछ उपाय बताएँगे कि, कैसे किशोरावस्था में ही कुछ प्रयासों से युवतियाँ अपने वक्षों को गोल और सुदृढ़ रख सकती हैं।

वक्षों का विकास और उनसे जुड़े कुछ तथ्य (Breasts development and facts)

  • किशोरियों में वक्षों का विकास उनके मासिक धर्म (menstrual cycle) से लगभग एक वर्ष पहले ही प्रारम्भ हो जाता है।
  • बचपन में स्तन बिल्कुल समतल (flat) होते हैं, उनमें कोई उभार नहीं होता। स्तनों के विकास के सबसे प्रारम्भिक चरण को ब्रेस्ट बड स्टेज (breast bud stage) का नाम दिया गया है। जिसमें दुग्धधमनी (milk ducts) और वसीय उत्तकों (fat tissues) कि वजह से स्तनों में हल्का सा उभार आता है।
  • इसके आस पास का आकार भी बढ़ने लगता है, पर ये परिवर्तन बहुत ही धीमा होता है जिसके वजह से प्रारम्भिक अवस्था में इसकी ओर ध्यान नहीं जाता। अब स्तन थोड़े फूले हुये दिखाई देते हैं, यह इस बात का संकेत होता है कि आपके वक्ष विकसित हो रहे हैं।
  • अपने विकास कि प्रारम्भिक अवस्था में स्तनों का आकार शंकू कि तरह होता है और निप्पल (nipple) बाहर कि तरह निकले हुये होते हैं।
  • शुरुआती विकास के दौरान यह एस्ट्रोजेन (estrogen) हार्मोन कि वजह से होता है साथ ही वसा (fat) का जमाव शरीर के इस हिस्से में होने लगता है और दुग्ध नली भी विकसित होने लगती है।
  • किशोरियों में मासिक धर्म शुरू होने के बाद अंडाशय (ovary) प्रोजेस्ट्रोन (progesterone) का निर्माण करने लगते हैं, जिनके कारण पहले दूध कि ग्रंथियों का तथा अंत में दूध के प्रवाह के लिए दुग्धनलिका का विकास होता है। यह विकास दिखाई नहीं देता पर यह शरीर का एक बहुत महत्वपूर्ण और ज़रूरी विकास होता है।

प्राकृतिक रूप से स्तनों का विकास कैसे करें?

  • कुछ किशोरियों में इस अवस्था में स्तन और उसके आस पास का हिस्सा वास्तविक स्तन से अलग एक उठे हुये उभार के रूप में विकसित होता है।
  • लड़कियों में स्तनों के विकास के इस चक्र को पूरा होने में लगभग तीन से पाँच साल का समय लगता है, पर यह भी देखा गया है कि, कुछ लड़कियों को दस वर्ष तक भी लग जाते हैं।
  • स्तनों के विकास के दौरान इस हिस्से में दर्द व पीड़ा का अनुभव होता है साथ ही हल्की खुजली भी महसूस होती है जो त्वचा के खिंचाव कि वजह से होती है ये सभी बहुत ही सामान्य लक्षण हैं जो स्तनों के विकास के दौरान महसूस होते हैं।
  • लड़कियों को स्तनों के विकास कि इस अवस्था में शरीर के लिए अतिरिक्त मात्रा में आयोडिन (iodine) कि ज़रूरत होती है, यह एक ज़रूरी मिनरल है जो वक्षों के उत्तकों (tissues) कि सुरक्षा और वक्षों विकास के लिए आवश्यक होता है। जैसे जैसे वक्षों का आकार बढ़ता जाता है आपके शरीर को आयोडिन कि उतनी ही अधिक मात्रा कि ज़रूरत पड़ती है।
  • इस बात को हमेशा याद रखें, गर्भावस्था (pregnancy) तक यह नहीं माना जा सकता कि आपके वक्षों का पूरी तरह विकास हो चुका है।
  • सामान्य रूप से वक्षों का विकास 8 से 13 वर्ष कि उम्र में प्रारम्भ हो जाता है। अगर किसी किशोरी में इस उम्र के दौरान और 14 वर्ष तक भी स्तनों के विकास कि प्रक्रिया शुरू नहीं होती या उसके गुप्त अंगों (private parts) में बालों का विकास नहीं होता तो इस अवस्था में डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करना चाहिए। इसी प्रकार 15 वर्ष कि उम्र तक मासिक धर्म ना आने कि अवस्था में भी डॉक्टरी सलाह और चिकित्सा ज़रूरी होती है। इस अवस्था को परिपक्वता में देरी (delayed puberty) कहा जाता है जिसका तुरंत निवारण आवश्यक है।
  • मासिक धर्म चक्र के प्रारम्भ होने के बाद स्तनों को आकार गोल हो जाता है जो 20 कि उम्र तक विकसित होता रहता है। यही सही समय होता है जब, स्तनों कि उचित देखभाल द्वारा उन्हें ताउम्र गोल और सुदृढ़ रखा जा सकता है।

जल द्वारा उपचार (Hydrotherapy)

पानी के सही उपयोग द्वारा शरीर की स्वस्थ रखना ही हाइड्रोथैरेपी कहलाता है। इसका सबसे आसान तरीका है, नहाते समय गरम से ठंडे पानी का इस्तेमाल। गरम पानी के बाद तुरंत ठंडे पानी का इस्तेमाल करने से शरीर की त्वचा 95% तक फैलती है। यह खिंचाव त्वचा के तनाव और कोलेजन के निर्माण में सहायक होता है। हमारी त्वचा में मौजूद प्रोटीन त्वचा को टोन करने और उसे कसावट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिससे कसे हुए सुदृढ़ वक्ष निर्मित होते हैं।

अगली बार जब आप स्नान के लिए जाएँ तो अपने स्तनों को टोन करने के लिए 30 सेकंड तक गरम पानी को शरीर में डालें और उसके तुरंत बाद जितना आप सह सकें उतने ठंडे पानी को 10 मिनट तक अपने शरीर में डालते रहें। इस प्रक्रिया को कुछ देर और दोहराएँ। गरम और ठंडे पानी की इस प्रक्रिया में ठंडे पानी का उपयोग गरम पानी की अपेक्षा कम समय तक किया जाता है, पर ध्यान रहे कि इस उपचार को समाप्त करते समय आखिरी बार ठंडे पानी द्वारा ही इस प्रयोग को खत्म करना चाहिए ताकि शरीर में पर्याप्त तरीके से ठंडा हो जाए।

ब्रेस्‍ट को लूज होने से रोकने के लिए टिप्स

वक्षों को सुदृढ़ बनाने के लिए एक्सरसाइज़ (Exercises for round and firm breast)

बेहतर एक्सरसाइज़ आपके वक्षों को गोल कर सही आकार दे सकते है। चूंकि स्तनों में किसी तरह की कोई मांसपेशियाँ नहीं होती इसलिए इसके आकार को बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता पर सही एक्सरसाइज़ के द्वारा इन्हें अच्छी तरह कसावट देकर सुदृढ़ बनाया जा सकता है। नीचे दिये कुछ उपायों को अपना कर आप लंबे समय तक अपने वक्षों को सही आकार में रख सकते हैं।

स्तनों को सुडौल बनाने के लिए पुश-अप (Push up)

पेट के बल सीधे लेट जाइए। आपके हाथ ज़मीन को छूते हुये कंधों के नीचे होने चाहिए। आपके पैर एक दूसरे से जुड़े हुये शरीर की बिल्कुल एक सीधे में होने चाहिए। अब हाथों की सहायता से शरीर को ऊपर की तरफ उठाये और सांस लेते हुये ज़मीन की तरफ जाएँ, आपका सीना ज़मीन को छूता हुआ होना चाहिए। कुछ सेकंड ऐसे ही रहें और सांस छोड़ते हुये वापस ऊपर की ओर जाइए। इस क्रिया को 10 बार दोहराना चाहिए।

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लूज ब्रेस्‍ट के लिए चेस्ट प्रेस (Chest press se stan ki dekhbhal)

अपनी पीठ के बल ज़मीन पर सीधे लेट जाएँ। आप इस एक्सरसाइज़ के लिए किसी बेंच या बेलेन्स बॉल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। दोनों हाथों में डंबल्स लेकर उसे अपने चेहरे के ठीक सामने ले आयें। अपनी कोहनियों को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें और उसे अपने कंधों के समानान्तर लाकर खोलें। साँस बाहर करते हुये हाथों को खोलें और इसी प्रकार जब हाथों को ऊपर की ओर सीधे करते समय सांस अंदर खींचे।

इन्चलाइन चेस्ट प्रेस (Incline chest press)

यह भी पहले वाले एक्सरसाइज़ की तरह ही है सिर्फ आपको इसमें ज़मीन की जगह इन्चलाइन बेंच की ज़रूरत होती है। पीठ के बल इन्चलाइन बेंच पर लेट जाएँ। दोनों हाथों में डंबल्स लेकर हाथों को चेहरे के सामने की ओर लेकर जाएँ। हाथों को 90 डिग्री के अवस्था में रखकर कंधों के समानान्तर ले जाएँ और साँसे लेते हुये इस प्रक्रिया को करें उसके बाद सांस छोड़ते हुये वापस पहली वाली अवस्था में जाएँ।

छाती बढाने का उपाय

ढीली ब्रेस्‍ट के लिए चेस्ट फ्लाई (Chest fly)

एक समतल बेंच में पीठ के बाल लेट जाएँ। अपने दोनों हाथों में डंबल्स लेकर ऊपर की ओर रखें इस अवस्था में आपकी कोहनी हल्की सी मुड़ी हुई होनी चाहिए। अब अपने हाथों को कंधों के समानान्तर लाएँ और वापस उसी अवस्था में लौट जाएँ।

स्तन का आकार के लिए टिप्स (Breast tight rakhna ke liye tips)

  • इन एक्सरसाइज़ को कम से कम हफ्ते में तीन बार नियमित एक्सरसाइज़ के साथ करना चाहिए।
  • आपको एक एक दिन के अंतराल में इसे करना है न कि लगातार हफ्ते में तीन दिन।
  • प्रत्येक एक्स्र्साइज़ को कम से कम 1 से 3 के सेट में करना चाहिए।
  • चेस्ट फ्लाई और चेस्ट प्रेस जैसी एक्सरसाइज़ में आप अपने डंबल्स का वज़न कुछ दिनों बाद क्रम से बढ़ा सकते हैं।
  • अगर आप इन्चलाइन बेंच की अनुपस्थिति में चेस्ट प्रेस नहीं कर पा रहीं हैं तो बाकी के तीन एक्सरसाइज़ नियमित रूप से कर सकती हैं।
  • इन सभी एक्सरसाइज़ में चेस्ट फ्लाई को करना बहुत आवश्यक है।

स्वस्थ स्तनों के लिए कैसे करें देखभाल (How to maintain healthy breast)

स्तनों को सही आकार देने के साथ ज़रूरी है और उसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है, उनकी सेहत की भी सही तरह देखभाल करना। अगर आप नीचे दी हुई कुछ बातों का ध्यान रखतीं हैं तो आपके स्तन स्वस्थ और सुदृढ़ रहते हैं।

ब्रेस्ट का आकार के लिए सही और अच्छा आहार लें (Eat well)

बहुत से शोधों में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि अगर आप अच्छी तरह के पोशाक तत्वों से भरपूर भोजन लेते हैं तो स्तन कैंसर का खतरा कम रहता है। हरी सब्जियों और सनतेरे, बेर, पीच, अवाकेडो जैसे ताज़े फलों के साथ अखरोट, अलसी (flax seeds) के बीज और ओमेगा 3 फैटी एसिड वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए। भोजन में अंडे, मछली और प्रोटीन युक्त चीजें खानी चाहिए।

ब्रेस्‍ट साइज के लिए सही आकार की ब्रा पहनें (Wear the right bra)

काले निपल्स को उजला बनाने के उपाय

70% महिलाएँ अपने लिए गलत साइज़ की ब्रा का इस्तेमाल करती हैं। जो त्वचा में जलन, खुजली, सांस लेने में परेशानी आदि समस्याओं को कारण बनता है। इससे होने वाला सबसे बड़ा खतरा ब्रेस्ट लिगमेंट का डेमेज है, जो स्तनों में दर्द का कारण बनता है साथ ही इसकी वजह से कुछ लड़कियों के वक्षों के आकार में परिवर्तन हो जाता है।

ढीले ब्रेस्‍ट के लिए नियमित एकसरसाइज़ (Exercise regularly)

बेहतर भविष्य के लिए टीनएज (teenage) बहुत खास होता है जब हम अच्छी आदतों से अपने आप को बेहतर बना सकते हैं। जैसे रोज़ की दिनचर्या में हल्की एकसरसाइज़ के द्वारा हम अपने शरीर और दिमाग दोनों को तंदरुस्त रख सकते हैं। इसके साथ ही योगा भी शरीर और अच्छे फिगर के लिए लाभदायक होता है तो अपनी दिनचर्या में नियमित रूप से इन्हें जगह दें।

ब्रेस्ट को खोल कर दें आराम (Leave them breast open)

जब भी कोई लड़की ब्रा पहनने की शुरुआत करती है तो उसे यह मालूम होना चाहिए कि आपके स्तन को त्वचा को भी सांस लेने की ज़रूरत है। तो पूरे दिन के बाद कुछ घंटों तक ब्रा का इस्तेमाल न करें, ताकि आपकी त्वचा थोड़ा खुलापन महसूस कर सके, लगातार ब्रा पहनना भी सेहत के लिए हानिकारक होता है।

ढीले स्तनों के लिए ज़्यादा पानी पिएँ (Drink water dheele breast ke liye)

पर्याप्त पानी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी होता है इसीलिए रोज ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए। यह शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालता है तथा शरीर के बाकी अंगों की हो तरह वक्षों को भी मजबूती देकर सही आकार देता है।

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