Hindi tips for pregnant women with thyroid problems – गर्भवती महिलाओं में थायराइड की समस्या – प्रेगनेंसी में थायराइड की समस्या

महिलाओं को प्रेगनेंसी गर्भावस्था के दौरान कई परीक्षणों से गुज़रना पड़ता है। कई बार खून की जांच से, जिनसे उनके गर्भवती होने का पता चलता है , उनके थायराइड की समस्या भी सामने आती है। अगर आप अपने बच्चे को इस दुनिया में लाने की तैयारी कर रही हैं तो सबसे पहले खुद की जांच करें और पता करें कि कहीं आपको थायराइड की समस्या तो नहीं। कई महिलाएं यह जानते हुए कि उन्हें थायराइड की समस्या है, अपने बच्चे को जन्म देती हैं। आपको बच्चे के जन्म के पहले थाइरोइड की समस्या को ठीक करने के उपचारों के बारे में सोचना चाहिए।

थायराइड की समस्या के लक्षण (What are the symptoms of thyroid disorder?)

1. एक तरह की थायराइड की समस्या जो तब होती है जब थाइरोइड की उत्पत्ति कम हो जाती है उसे हाइपोथाइरॉइडिस्म कहते हैं। इसकी वजह से मनुष्य के शरीर के अन्य हॉर्मोन के स्तर में भी गिरावट आती है।

मां के गर्भ के अंदर बच्चे की उत्तेजना तकनीक

हाइपोथाइरॉइडिस्म के कुछ मुख्य लक्षण हैं  (Important symptoms of hypothyroidism are)
  • सूजन
  • थकान
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी
  • पानी रुकना
  • सोने में परेशानी
  • वज़न में बढ़ोत्तरी
  • वज़न कम होना

2. गर्भावस्था के दौरान वज़न बढ़ना एक आम समस्या है,परन्तु कुछ महिलाओं का वज़न थायराइड की वजह से भी बढ़ता है। कुछ महिलाओं का वज़न गर्भावस्था के दौरान घट भी जाता है। इसके पीछे जो कारण है उसे हाइपोथाइरॉइडिस्म कहते हैं। नियमित रूप से थाइरोइड की जांच करवाएं अगर आपका वज़न सच में बढ़ रहा है। तेज़ गति से वज़न बढ़ना थायराइड का ही एक लक्षण है।

3. थायराइड की समस्या और हाइपरथाइरॉइडिस्म दोनों अलग बातें हैं। अगर आपकी थायराइड ग्रंथि ज़्यादा कार्य कर रही है इसका मतलब आपको हाइपरथाइरॉइडिस्म है। इसके मनुष्य के शरीर पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं जैसे गर्मी सहने की क्षमता लुप्त होना, वज़न का घटना आदि। अगर कोई महिला गर्भावस्था के दौरान ऐसी समस्या से गुज़रती है तो यह माँ एवं बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

अत्याधिक मात्रा में सुबह की बीमारी का प्रकोप (Morning sickness in extremities)

तीसरी तिमाही के दौरान शरीर में आए परिवर्तन

अगर किसी महिला को थायराइड और हाइपरथाइरॉइडिस्म दोनों की समस्या है तो फिर उसे अत्याधिक मात्रा में सुबह की बीमारी की समस्या भी होगी। इस स्थिति में मस्तिष्क द्वारा थायराइड को हॉर्मोन भेजे जाते हैं जो कि गर्भावस्था के हॉर्मोन के जैसे ही होते हैं। क्योंकि थाइरोइड ग्रंथि, जो कि अच्छे से काम कर रही होती है, को ज़्यादा मात्रा में tsh भेज दिया जाता है, अतः इस समय मस्तिष्क को ख़तरा रहता है। अगर महिलाएं पहले से ही इस समस्या से गुज़र रही हैं तो उन्हें गर्भधारण करने से बचना चाहिए। कई डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं के हॉर्मोन्स की मात्रा ज़्यादा होने की वजह से सुबह की बीमारी जन्म लेती है। अगर उसे थाइरोइड भी है तो यह समस्या बढ़ जाती है।

गर्भावस्था के समय थायराइड कितना हानिकारक? (How risky is thyroid during pregnancy?)

गर्भवती महिलाएं अगर अपने थायराइड का इलाज नहीं करवाती हैं तो वे माँ बनने के बाद काफी समस्याओं की शिकार हो सकती हैं। इससे गर्भपात का ख़तरा भी पैदा हो सकता है। हाइपरथाइरॉइडिस्म की शिकार महिला समय से पहले बच्चे को जन्म दे सकती है। उसके एक कम वज़न के बच्चे को जन्म देने की भी काफी सम्भावना होती है। महिलाओं को गर्भावस्था के समय दवाइयाँ लेने से बचना चाहिए, अन्यथा इससे बच्चे को ख़तरा पहुँच सकता है, परन्तु थाइरोइड की दवाइयाँ अलग हैं। सिंथेटिक या प्राकृतिक हॉर्मोन्स से गर्भवती महिलाओं में थाइरोइड का इलाज किया जाता है।

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