Navratri – 2016, Puja Vidhi of devi Kushmanda – नवरात्र विशेष, नवरात्र के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा कैसे करें?

माँ दुर्गा की चौथी शक्ति को कूष्मांडा के नाम से पूजा जाता है। देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा वाली माता के नाम से भी जाना जाता है। इनके हाथों में माला, चक्र, गदा, त्रिशूल, कलश, कमंडल, बाण, धनुष और कमाल सूशोभित हो रहे हैं। इनका वाहन भी सिंह है। जटिल से जटिल कुष्ट आदि रोग भी इनकी उपासना से दूर हो जाते हैं। माँ कूष्मांडा यश, आयु और आरोग्य देने वाली देवी हैं। पूरे भक्ति भाव से इनकी आराधना करनी चाहिए।

नवरात्र के चौथे दिन दिन करें माँ कूष्मांडा की उपासना (Navratri me Mata Kushmanda ki puja vidhi)

नवरात्र में इस दिन भी रोज की भांति सबसे पहले कलश की पूजा कर माता कूष्मांडा को नमन करें। इस दिन पूजा में बैठने के लिए हरे रंग के आसन का प्रयोग करना बेहतर होता है। माँ कूष्मांडा को इस निवेदन के साथ जल पुष्प अर्पित करें कि, उनके आशीर्वाद से आपका और आपके स्वजनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे। अगर आपके घर में कोई लंबे समय से बिमार है तो इस दिन माँ से खास निवेदन कर उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए। देवी को पूरे मन से फूल, धूप, गंध, भोग चढ़ाएँ। माँ कूष्मांडा को विविध प्रकार के फलों का भोग अपनी क्षमतानुसार लगाएँ। पूजा के बाद अपने से बड़ों को प्रणाम कर प्रसाद वितरित करें।

देवी कूष्मांडा का मंत्र (Kushmanda Devi Mantra)

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्मांडारुपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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