Navratra 2016 : Simple Puja Vidhi of Maa Kalratri – नवरात्रि का सातवाँ दिन, कैसे करें माँ कालरात्रि को प्रसन्न

नवरात्रि के सातवे दिन माँ दुर्गा के विकराल रूप की कालरात्रि नाम से वंदना की जाती है। धरती को पाप मुक्त करने और भक्तों की रक्षा के लिए माँ ने पापियों का संहार किया। माँ कालरात्रि का रूप अत्यंत विकराल है जिसे देखकर मनुष्य भय को आतुर हो रहे हैं। माँ के शरीर का रंग अत्यधिक श्यामल है। इनके गले में बिजली की चमक जैसी माला है और माँ अपनी साँसों के साथ अग्नि रूपी वायु बाहर निकाल रही हैं। पापियों के विनाश के लिए माँ ने यह भयानक रूप धारण कर रखा है।

मधु और कैटभ दो राक्षसों के मचाए विध्वंश को रोकने के लिए ब्रम्हाजी ने माँ काली का स्मरण किया। भगवान विष्णु उस समय घोर निद्रा में थे तब ब्रम्हाजी ने योगमाया के द्वारा महाकाली का मंत्रों द्वारा जप कर भगवान विष्णु को निद्रा से जगाया। महाकाली, योगमाया सभी जगतजननी माँ दुर्गा का ही रूप है।

देवी कालरात्रि की पूजा विधि (Puja vidhi of devi kalratri)

साफ और स्वच्छ कपड़े पहन कर कलश पूजा करनी चाहिए। इसके बाद सभी देवताओं की पूजा के बाद माँ कालरात्रि की पूजा भी करनी चाहिए। लाल चम्पा के फूलों से माँ प्रसन्न होती हैं। दूध , खीर या अन्य मीठे प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। लाल चन्दन , केसर , कुमकुम आदि से माँ को तिलक लगाएँ। अक्षत चढ़ाएं और माँ के सामने सुगंधित धूप और अगरबत्ती आदि भी लगाएँ।

तंत्र साधना के लिए नवरात्रि के सातवे दिन का विशेष महत्व होता है। कई तांत्रिक और साधक इस दिन का खास इंतज़ार करते हैं। दानव , दैत्य , राक्षस , भूत , प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। कालरात्रि ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं अतः इनके उपासकों को अग्नि-भय , जल-भय , जंतु-भय , शत्रु-भय , रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है। इस दिन माँ के पूजन से भूत प्रेत बाधा आदि भय मन से दूर होते हैं।

दरिद्रता को दूर करने के लिए इस दिन गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाकर प्रसाद वितरण करना चाहिए।

माँ कालरात्रि मंत्र (Maa Kalratri Mantra)

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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