Causes of low birth weight – जन्म के समय वज़न कम होने के कारण तथा कम वज़न वाले बच्चे की देखभाल

जन्म के समय आमतौर पर बच्चे का वज़न पांच पौंड आठ औंस होता है, अतः इस तरह से कम वज़न वाले बच्चे वे होते हैं जिनका जन्म के समय वज़न पांच पौंड आठ औंस से कम होता है। ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं।

कम वज़न वाले बच्चे का सिर उसके सिर से बड़ा दिखाई देता है, परन्तु उसका शारीरिक डीलडौल काफी कमज़ोर सा होता है। अपने बच्चे के वज़न की नियमित तौर पर शिशु विशेषज्ञ द्वारा जांच करवाएं जिससे कि आपको इस बात का पता चल सके और आप उसकी देखभाल सही प्रकार से कर सकें।

जन्म के समय बच्चे के कम वज़न का कारण (Causes of a baby born with low birth weight)

इसके दो मुख्य कारण होते हैं :-

आपका कम जन्म वजन शिशु – समय से पहले जन्म होना (Premature birth)

जिस बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 37 हफ्ते पूरे होने से पहले हो जाता है उसे अपरिपक्व या समय से पहले पैदा होने वाला शिशु कहते हैं। ज़्यादातर समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों का वज़न सामान्य से कम होता है। समय से पहले बच्चे के जन्म के कई कारण होते हैं जिसका एक डॉक्टर को ठीक से ख्याल रखना पड़ता है।

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आपका कम जन्म वजन शिशु – भ्रूण के बढ़ने में बाधा उत्पन्न होना (Foetal growth restriction)

कभी कभी जन्म से पहले एक बच्चे का जन्म (kam vajan wale shishu) जितना होना चाहिए, उतना होता नहीं है। इन्हें संकुचित बढ़त वाले बच्चे कहा जाता है। इनमें से कुछ बच्चों का वज़न कम होता है क्योंकि उनके माता पिता भी छोटे आकार के होते हैं, वहीँ अन्य अन्य बच्चों के छोटे होने का कारण गर्भ में भ्रूण का किसी वजह से बढ़ना रूक जाना होता है। बच्चे की बढ़त जानने के लिए अल्ट्रासाउंड तथा दिल की धड़कन मापने का सहारा लिया जाता है।

जन्म के समय बच्चे का वजन – माँ का स्वास्थ्य (Mother’s health plays)

बच्चे की माँ का स्वस्थ रहना भी बच्चे के वज़न को कम या ज़्यादा रखने का ज़िम्मेदार होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, दिल और फेफड़ों की समस्या, गर्भाशय में संक्रमण आदि एक माँ को समय से पहले बच्चा पैदा करने को मजबूर कर देते हैं और इससे भ्रूण का भी विकास रूक जाता है। गर्भनाल में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न हो जाने से रक्तसंचार रूक जाता है तथा इससे बच्चे के वज़न पर प्रभाव पड़ता है। जिन महिलाओं का वज़न गर्भावस्था के चरण में भी काफी कम बढ़ता है, उनके बच्चे का भी वज़न कम होने की काफी संभावनाएं होती हैं। जिन गर्भवती महिलाओं की उम्र १७ से कम होती है, उनके भी अपरिपक्व शिशु को जन्म देने के ज़्यादा आसार होते हैं।

जन्म के समय बच्चे के स्वास्थ्य से भी समय के पहले जन्म होने और भ्रूण का विकास ना होने की स्थिति पैदा होती है। जन्म के समय की किसी विकृति की वजह से शरीर के किसी भाग पर काफी ज़्यादा प्रभाव पड़ता है जिससे बच्चे के समूचे स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ता है। इन सब से गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास में ख़तरा होता है और समय से पहले जन्म होने और जन्म के समय सामान्य से कम वज़न होने की स्थिति उत्पन्न होती है।

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कम वज़न वाले बच्चों की समस्याएं एवं उनके उपचार (Medical problems in low birth weight baby and their treatment)

सांस लेने में तकलीफ (Respiratory distress syndrome) : जिन बच्चों का जन्म गर्भधारण के 34 हफ़्तों से पहले हुआ है, उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कतें पेश आती हैं। इन बच्चों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है अतः इन्हे इनक्यूबेटर पर रखा जाता है।

मस्तिष्क में रक्त बहना (Bleeding in the brain) : समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में ३ दिनों के अंदर यह समस्या देखी जाती है। दिमाग से ज़्यादा खून निल्कलने से उसपर काफी दबाव पड़ता है जिसके फलस्वरूप दिमाग को भारी क्षति पहुँचती है। इस समस्या को दवाओं द्वारा या एक ट्यूब की मदद से द्रव्य को निकालकर दूर किया जा सकता है।

पेटेंट डक्टस आर्टरीयसस (Patent ductus arteriosus) : यह समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में एक सामान्य दिल की बीमारी है। यह बड़ी धमनी से जुडी होती है जो कि जन्म के बाद बंद हो जाती है। कुछ स्थितियों में जब ये धमनी ठीक से बंद नहीं हो पाती तो दिल का दौरा पड़ जाता है।

नेक्रोटाइज़िंग एन्टेरोकोलाइटिस (Necrotizing enterocolitis) : यह एक ऐसी समस्या है जिसमें बच्चे की आंत में समस्या आती है जो कि जन्म के 2 से 3 हफ़्तों के बाद विकसित होते हैं। इससे खाने में परेशानी, पेट में सूजन तथा अन्य कई समस्याएं आ सकती हैं।

जन्म के समय शिशु का वजन (janam ke samay kam vajan) – कम वज़न वाले बच्चे की देखभाल के तरीके

जुड़वा बच्चों के जन्म के समय देखभाल के तरीके

जिन बच्चों का वज़न कम होता है, अगर उन्हें कोई और बीमारी न हो तो उनका शारीरिक विकास धीरे धीरे सामान्य हो ही जाता है। इन बच्चों को विकास में ही सबसे ज़्यादा परेशानी आती है। ये कमज़ोर होते हैं तथा इनको कोई संक्रमण होने की आशंका भी कहीं ज़्यादा होती है।

1. नवजात शिशु का वजन, उन्हें सारे टीके समय पर दिलाए जाने चाहिए।

2. कम वज़न वाले बच्चे के विकास का सबसे अच्छा तरीका उसे स्तनपान करवाना है।

3. नवजात शिशु का वजन, नए जन्मे बच्चे को अपने पास सुलाकर उसे गर्म रखें या फिर ये ध्यान दें कि उनका बिस्तर गर्म और आरामदायक हो क्योंकि इन बच्चों की त्वचा के नीचे काफी कम फैट होता है।

4. नए जन्मे बच्चे के आसपास धूम्रपान ना करें। सिगरेट के धुंए से अस्थमा तथा कान और छाती के संक्रमण भी हो सकते हैं।

5. नवजात शिशु का वजन, नए जन्मे बच्चे के पास किसी भी मेहमान को न आने दें क्योंकि इससे संक्रमण का ख़तरा हो सकता है।

6. ऐसे बच्चों की देखभाल किसी अनुभवी व्यक्ति या खुद उसकी माँ द्वारा ही की जानी चाहिए।

7. कम वज़न वाले बच्चों को नियमित तौर पर जॉन्डिस, सांस लेने में परेशानी, बुखार, थकान तथा आलस्य की जांच करवाने के लिए डॉक्टर के पास लेकर जाएं।

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