Bleeding during pregnancy can be serious – गर्भावस्था के दौरान खून निकलना गंभीर समस्या

गर्भावस्था के दौरान खून का निकलना किसी भी महिला के लिए एक दुःस्वप्न की तरह ही होता है। इसका अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि ये मिसकैरेज की समस्या है, परन्तु फिर भी इसे नज़रअंदाज़ करना बिलकुल उचित नहीं है। भारी मात्रा में खून निकलना किसी गंभीर स्थिति की ओर इशारा करता है और इस बारे में तुरंत ही डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए।

प्रेग्‍नेंसी के दौरान ब्‍लीडिंग – समय सीमा और खून का निकलना (Time frame and bleeding)

गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के दौरान खून का निकलना हालांकि मिसकैरेज की ओर ही सबसे ज़्यादा इशारा करता है, परन्तु इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं। दूसरी एवं तीसरी तिमाही में खून के निकलने की वजह से काफी गंभीर समस्या हो सकती है। आखिरी चरण की करीब 36 हफ़्तों की गर्भावस्था के समय में खून निकलना इस बात की ओर इशारा करता है कि लेबर शुरू होने वाला है। शुरूआती महीनों में हॉर्मोन्स में परिवर्तन तथा सर्विक्स को नुकसान पहुँचने की वजह से खून के बहने की समस्या सामने आ सकती है। इसी कारण की वजह से गर्भावस्था के अंतिम चरणों में भी खून निकलने की घटना देखी जा सकती है। प्लेसेंटा में हुए किसी प्रतिकूल परिवर्तन या फिर गर्भाशय की दीवारों से प्लेसेंटा के अलग होने की वजह से भी गर्भावस्था के आखिरी चरणों में खून निकलने की समस्या हो सकती है, जिसके फलस्वरूप मिसकैरेज या समय से पहले लेबर भी हो सकता है।

आपको यह बात याद रखनी चाहिए कि खून निकलने की घटना का सीधा सम्बन्ध बच्चे या गर्भाशय की किसी समस्या की वजह से होता है, तथा माँ की किसी भी गतिविधि की वजह से खून नहीं निकलता। इस स्थिति को संभालने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि ऐसे मौके पर बिलकुल न हिलें तथा डॉक्टर के आने का इंतज़ार करें। कई बार इस समस्या से निपटने के इलाज के तौर पर बेड रेस्ट का उपाय भी सुझाया जाता है।

गर्भावस्था के समय फिट रहने के नुस्खे

गर्भस्राव – सेक्स और गर्भावस्था (pregnancy me bleeding hona)

ज़्यादातर जोड़े गर्भावस्था के समय सेक्स के सुरक्षित रहने को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। गर्भावस्था के दौरान सेक्स करने से भी खून निकल सकता है, परन्तु इसमें खतरे जैसी कोई बात नहीं होती। गर्भावस्था के दौरान सर्विक्स तथा गुप्तांगों में ज़्यादा मात्रा में रक्त का संचार होता है और सेक्स के दौरान इन भागों की धमनियों के प्रभावित होने की भी काफी ज़्यादा संभावना रहती है। सेक्स के दौरान एक गर्भवती महिला का धब्बेदार तथा बीच बीच में खून का निकलना काफी आम बात है। इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है, परन्तु अगर मरोड़ें (cramps) आती हैं तथा काफी भारी मात्रा में खून निकलता है तो डॉक्टर से परामर्श करना ही सबसे अच्छा रहता है। सेक्स के दौरान खून के बहने को रोकने के लिए अलग अलग तथा ऐसी मुद्राओं का प्रयोग करें जिनमें महिलाओं पर कम दबाव पड़े। सेक्स में महिलाओं के लिए आरामदायक मुद्रा का प्रयोग उनसे परामर्श करके ही अपनाएं।

गर्भावस्था में रक्तस्राव – खून निकलने के अन्य कारण (Other causes of bleeding include hai pregnancy me blood aana)

  • गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में इम्प्लीमेंटेशन ब्लीडिंग काफी सामान्य है। इसके अंतर्गत हलके धब्बे पड़ते हैं और दर्द बिलकुल नहीं होता है।
  • मूत्र विसर्जन के भाग (urinary tract) या पेल्विक भागों में इन्फेक्शन होने से भी खून निकल सकता है तथा इसमें दर्द भी होता है। ऐसी स्थिति में माँ और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए किसी डॉक्टर की मदद ली जानी चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान सर्विक्स काफी नरम और कोमल होता है, अतः ऐसी स्थिति में सेक्स करने के बाद रक्त निकलना सामान्य बात है।
  • अगर पहली तिमाही में खून निकलने के साथ पेट में मरोड़ें उठने तथा तेज़ दर्द होने की समस्या उत्पन्न हो तो यह सीधा मिसकैरेज की ओर इशारा करता है। काफी गंभीर रूप से क्रैंप्स आने के साथ ही धब्बे पड़ना भी मिसकैरेज की ही निशानी है।

गर्भवती महिला के साथी के लिए टिप्स

  • ट्यूबलर गर्भावस्था के दौरान या जब भ्रूण (embryo) फैलोपियन ट्यूब्स या फिर कहीं ओर रोपित हो जाता है तो ऐसी अवस्था में भी खून का निकलना आम है।

गर्भावस्था के दौरान सावधानियां – बचाव / उपाय (Prevention / solution)

ज़्यादातर महिलाएं कुछ धब्बेदार तथा खून निकलने की समस्याओं से युक्त दिनों के बाद सामान्य रूप से बच्चे को जन्म देती हैं। मिसकैरेज को रोकने के लिए कुछ ज़्यादा करना संभव नहीं है। मिसकैरेज उस वक़्त होता है जब भ्रूण में कोई आनुवांशिक (genetic) समस्या आ जाती है। डॉक्टर द्वारा दिए गए सुझावों का मन लगाकर पालन करें। इन सुझावों में रक्त का बहना रूकने तक पैरों को ऊपर करके सम्पूर्ण रूप से बेड रेस्ट करने की युक्ति भी शामिल हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको सकारात्मक चिंतन करना चाहिए तथा दिमाग ठंडा रखने का प्रयास करना चाहिए। इससे आप जल्दी ठीक होंगी तथा बच्चे की डिलीवरी भी काफी अच्छे से हो जाएगी।

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