Is it safe to eat papaya during pregnancy – क्या प्रेग्नेन्सी में पपीता खाना सुरक्षित (सेफ) है?

क्या गर्भावस्था में पपीता खा सकते है? गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बिना किसी भय के पपीता खा सकती हैं, पर पपीता पका हुआ होना चाहिए। पपीते को लेकर भारतीयों में यह अफवाह फैली हुई है कि इसके सेवन से गर्भपात का भी ख़तरा हो सकता है।

यह बात बिलकुल गलत है। असल में एक पका पपीता गर्भवती महिला के लिए काफी अच्छा होता है क्योंकि इसमें एक नवजात शिशु के प्रयोग में आने वाले सारे गुण होते हैं। यह गर्भवती महिलाओं में सीने की जलन तथा कब्ज़ की समस्या को भी दूर करता है। कम मात्रा में पका पपीता खाने से गर्भावस्था में काफी फायदा पहुँचता है।

पपीता विटामिन ए, बी, सी, बीटा कैरोटीन और पोटैशियम (vitamin A, B, C, beta-carotene, and potassium) से भरपूर होता है तथा इससे आपके आँखों की रोशनी अच्छी रहती है। पपीते का सेवन गर्भावस्था के समय करना सही नहीं होता है। गर्भावस्था के समय कच्चे पपीते का सेवन करना सुरक्षित नहीं होता। सिर्फ घर के बड़े बुज़ुर्ग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर भी गर्भावस्था के समय कच्चा या अधपका पपीता खाने से महिलाओं को मना करते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स में कच्चा पपीता (Unripe Papaya)

जहां पका पपीता गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए काफी अच्छा होता है, वहीं कच्चा पपीता काफी हानिकारक होता है। डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को कच्चा पपीता खाने से मना करते हैं क्योंकि इसमें काफी मात्रा में लेटेक्स होता है जो मूत्र में समस्या पैदा करता है। गर्भवती महिला को पपीते का बीज और ऊपरी भाग भी नहीं खाना चाहिए।

शोध से पता चला है कि कच्चा पपीता गर्भवती महिला पर खराब असर करता है। इससे आपके गर्भाशय में समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान हर्बल उपचार

गर्भावस्था में पपीता का सेवन कैसे करें (How to consume papaya?)

पपीते के फायदे, अगर आप गर्भावस्था के दौरान पपीता खाना चाहती हैं तो पके पपीते को एक पात्र में मैश कर लें और इसमें शहद और दूध मिलाकर इसे खाएं। क्योंकि पके पपीते में विटामिन सी और ई की मात्रा होती है तथा फोलिक एसिड और फाइबर भी होता है।

पपीता के फायदे, पके पपीते से बेहतरीन टॉनिक भी बनाया जा सकता है जिसके लिए आपको पपीते में दूध और शहद मिलाने की आवश्यकता होती है। यह गर्भवती महिला के लिए काफी स्वास्थ्यकर तथा स्वादिष्ट होता है।

कभी कभी पपीता हाज़मे की शिकायत से लड़ने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। पपीते के फायदे, डॉक्टर भी गर्भावस्था के आखिरी चरण में पका पपीता खाने की सलाह देते हैं। यह बच्चे के जन्म के समय के लिए आवश्यक होता है।

गर्भावस्था में पपीता, गर्भवती माँ और बच्चे के लिए पोषण काफी आवश्यक होता है। साबुत अनाज, फल और सब्ज़ियाँ माँ की सेहत के लिए अच्छी होती हैं। इसी तरह पपीता भी इस समय काफी पोषण देता है।

गर्भावस्था में देखभाल में पके पपीते की दुविधा (Concerns with ripeness se pregnancy me dekhbhal)

लोगों में हमेशा गर्भावस्था के दौरान पपीते के इस्तेमाल के बारे में दुविधा रहती है। पपीता के फायदे, अगर आप पका पपीता खाते हैं तो आपको काफी फायदा होगा क्योंकि इसमें पोटैशियम, विटामिन बी और विटामिन ए की मात्रा होती है।

गर्भावस्था के शुरूआती चरण में पपीते का सेवन (Papaya in early pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान सेल्युलाईट

ऐसा पपीता जो अधपका या पूरी तरह कच्चा हो, इडीमा (oedema) से भरपूर होता है। यह एक लैटेक्स पदार्थ (latex substance) होता है, जिसकी वजह से गर्भनाल (placenta) से खून निकलने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। पपीते का गर्भावस्था के शुरूआती चरणों में सेवन करने से मिसकैरेज (miscarriage) की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। पपीते में पपेन तथा पेप्सिन (papain and pepsin) नामक तत्व होते हैं, जिनसे भ्रूण के विकास को क्षति पहुँच सकती है। यह कोशिकाओं के विकास में बाधा उत्पन्न करता है तथा भ्रूण के मेम्ब्रेन (membrane) को कमज़ोर बना देता है। वैज्ञानिक शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि पपीते का सेवन करने से आरोपण (implantation) में हानि तथा भ्रूण के विषैले होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे एशियाई देशों में यह माना जाता है कि पुरातन काल में कच्चे पपीते का प्रयोग महिलाओं द्वारा गर्भपात या भ्रूणहत्या (abortion) की प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए किया जाता था।

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य तीसरी तिमाही में पपीता (Papaya in third trimester)

पपीते में मौजूद पपेन प्रोस्टाग्लैंडिन तथा ऑक्सीटोसिन (prostaglandin and oxytocin) जैसे हॉर्मोन्स (hormones) को क्रियाशील बना देता है। ये दोनों तत्व लेबर (labour) के दौरान उठने वाले मरोड़ों की शुरुआत करने के लिए जाने जाते हैं। यह बात ज़ाहिर है कि गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के अंतिम चरणों में लेबर की समस्या होती ही है। परन्तु पपीते का सेवन करने से बाद के महीनों में समय से पहले लेबर शुरू होने की समस्या पैदा हो जाती है तथा इससे गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर काफी गंभीर प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि कई महिलाएं अपने खानपान से पूरी तरह पपीते को हटा देने का निर्णय करती हैं।

गर्भावस्था के दौरान पपीते का रस (Papaya juice during pregnancy se garbhavastha ki dekhbhal)

पपीते में फाइबर (fiber) की भरपूर मात्रा होती है तथा इसका रस निकालकर या स्मूदी (smoothie) के रूप में इसका सेवन करने से इसके गुण पूरी तरह से आपके शरीर में नहीं जाते हैं। टेट्रा पैक (tetra pack) में उपलब्ध पपीते के रस को पपीते के कंसन्ट्रेट (concentrate) की मदद से बनाया जाता है, जिसमें लैटेक्स की काफी मात्रा होती है। इन सबसे परहेज़ करें और अगर आप पपीते का रस पीना ही चाहती हैं तो इसका घर में ही निर्माण करें तथा इसके बाद पियें। इसे बनाने में प्रयोग में लाए जाने वाले प्रिज़र्वेटिव्स (preservatives) और अतिरिक्त चीनी इस रस को इसके फायदों से वंचित कर देती है। ताज़े पपीते के रस का थोड़ी थोड़ी मात्रा में सेवन करें। इस बात की जांच करें कि कहीं आपको भोजन से एलर्जी (allergy) या गर्भावस्था के पिछले दर्दनाक अनुभवों से तो दो चार नहीं होना पड़ा है।

गर्भावस्था के दौरान अच्छी डाइट और बचाव उपाय

गर्भनिरोधक के रूप में पपीते का प्रयोग (Papaya used as a contraceptive)

पपीते में लेबर की शुरुआत करने एवं गर्भपात तक करवाने की काबिलियत होती है। कच्चे पपीते का प्राकृतिक गर्भनिरोधक की तरह प्रयोग किया जा सकता है। पीरियड्स (periods) की शुरुआत करने के लिए भी इस रस का प्रयोग किया जाता है। पपीते के प्रयोग से कुछ महिलाओं में रक्त निकलने की समस्या महसूस की गयी है, वहीँ जानवरों पर इसकी मदद से वैज्ञानिक जांच करने पर किसी प्रकार का कोई भी प्रभाव नहीं पाया गया। यह बात ज़रूर है कि पपीते में गर्भनिरोधक एवं गर्भपात का सृजन करने के गुण अवश्य ही मौजूद होते हैं। वेस्ट इंडीज (west indies) के लोग काफी मात्रा में कच्चे पपीते का सेवन करते हैं, जिससे कि वहां काफी समय से प्रचलित गुलामी के वातावरण में उनके बच्चे जन्म ना लेने पाएं।

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