Shradh ke aasan upay hindi me – जानें श्राद्ध पक्ष के बारे में, पितृ पक्ष में क्या करें खास

16 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गए हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद की पूर्णिमा से लेकर अश्विनी माह की अमावस्या तक की अवधि श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष कहलाती है। इस काल में लोग अनेक तरह की परेशानियों जैसे ग्रहों की शांति और पितरों की शांति कुंडली में किसी प्रकार का दोष आदि को पूजा पाठ या अन्य उपायों द्वारा शांत कर सटके हैं।

इसीलिए भी इस अवधि को बहुत हिन्दू पंचांग में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष 16 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर को खत्म होने जा रहा है, आप भी उचित उपायों और पूजा पद्धति द्वारा आसानविधि से अपने पूर्वजों का ध्यान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

पितृ पक्ष में तर्पण द्वारा लोग अपने दिवंगत पुरखों को अपनी भावनाएँ अर्पित करते हैं ताकि इन पुण्य तिथियों में किए गए उपायों से उनकी आत्मा को शांति मिल सके। अनेक लोग अपने पितरों की आत्मा को तृप्त करने के लिए कई तरह के कर्म कांड करते हैं जिनमें बहुत ज़्यादा व्यय भी होता है, पितरों को प्रसन्न रखने से हमारे ऊपर हमेशा उनका आशीर्वाद बना रहता है और इसी आधार पर हम अपने आज और अपने भविष्य को बड़ों के आशीर्वाद द्वारा सुखमय बनाए रख सकते हैं।

इसीलिए श्राद्ध को इतना महत्वपूर्ण माना गया है। पर यह ज़रूरी नहीं की श्राद्ध के लिए आप बहुत सा पैसा बहाएँ तभी पितरों को शांति मिल सकती है, बल्कि अच्छी भावना और प्रसन्न मन से किया हुआ श्रद्धापूर्ण तर्पण ही पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए काफी होता है।

तर्पण एक ऐसी विधि है जो सभी लोग अपनी क्षमता के अनुसार करते हैं पर यहाँ हम आपको कुछ खास उपाय बताने जा रहे हैं जिन्हें इस श्राद्ध पक्ष के दौरान करके आप पुरखों की विशेष कृपा और सुख समृद्धि के साथ परिवार में शांति पा सकते हैं।

पितृ पक्ष में किए जाने वाले सामान्य उपाय (Pitra paksh me aasan upay se kare shradh)

आज के दौड़ भाग से भरे जीवन में जहां हमें अपने स्वयं के लिए समय नहीं मिल पता उसमें पूजा पाठ की लंबी प्रक्रियाएँ और भी कठिन हो जाती हैं। पर इसका मतलब यह नहीं की आप पितरों के लिए कोई शांति कार्य करने में असमर्थ हैं। पितरों का भक्तिभाव से किया गया स्मरण ही असली श्राद्ध होता है। इस बात का हमेशा ध्यान रखें की आपकी भावनाएँ हमेशा सभी के लिए अच्छी होनी चाहिए और कुछ आसान से उपायों को करके आप अपने पुरखों का आशीष अपने ऊपर बनाए रख सकते हैं।

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कैसे करें घर में आसान विधि से श्राद्ध (Shradh ki aasan vidhi hindi me)

माता या पिता के स्वर्गवास के बाद पुत्र के द्वारा श्राद्ध किए जाने की परंपरा है, पति की मृत्यु के बाद पत्नी भी श्राद्ध कर सकती है।
घर में पूर्व दिशा की ओर मुख करते हुए पूजा विधि की जानी चाहिए। तर्पण और पूजा के स्थान को गाय के गोबर से लिपकर शुद्ध कर लें। तर्पण की विधि में सुबह स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहन कर पूरे श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों को जल और तिल द्वारा तर्पण दिया जाता है। आखिरी दिन तर्पण के बाद पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर एक हवन कुंड रखें। एक पात्र में गंगाजल भर कर रखें। हवन कुंड में गाय के गोबर से बने कंडों की अग्नि में दूध, दही, घी और खीर से हवन करें। पितरों के रुचिकर भोजन और व्यंजन अर्पित करें। इसके साथ ही देव, गाय, कुत्ते, कौएँ और चीटीं के लिए पत्तों से बने भोजन की थाली अर्पित करें तत्पश्चात ब्राम्हण भोज कराएं। यथाशक्ति ब्राम्हण को दान दें।

पितृ पक्ष में ये कार्य अवश्य करें

• अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को भोजन कराएं।
• यथाशक्ति ब्राम्हण भोज कराएं।
• पशु पक्षियों को भोजन दें।
• किसी प्रकार की नई खरीदी न करें।
• पितृ पक्ष के दौरान मांसाहार का प्रयोग बंद कर दें।
• क्रोध न करें और सभी के साथ आदर का भाव रखें।
• नियमित रूप से पितरों का ध्यान करें व उनका आशीर्वाद आप पर बना रहे ऐसे उनसे विनती करें।

स्वर्गवास के पश्चात पूर्वजों को ईश्वरतुल्य माना गया है। पितृ पक्ष में इन साधारण उपायों से पितरों का आशीर्वाद हम पर बना रहता है और उनके आशीष से हमारे जीवन के दुख और दुविधाएँ दूर हो जाती हैं। पितृ दोष, गृह दोष, बाधा या जीवन में आ रही अन्य परेशानियों को पितृ पक्ष के दौरान इन उपायों से दूर किया जा सकता है।

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