List the unsafe food during pregnancy – Tips in Hindi – गर्भावस्था के दौरान नुकसान – पहुंचाने वाले भोजन

संतुलित आहार ग्रहण करना हमेशा आवश्यक है, परन्तु गर्भावस्था के दौरान यह और ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। ऐसे कई पोषक पदार्थ, विटामिन और मिनरल हैं जो बच्चे के विकास के लिए काफी आवश्यक होते हैं।

ज़्यादातर महिलाओं को गर्भधारण के समय कई चीज़ें खाने का मन करता है। ये इच्छाएं बिलकुल सामान्य हैं और एक हद तक काफी स्वास्थ्यकर भी हैं। ये इच्छाएं केवल शरीर का यह दिखाने का तरीका है कि उसे पोषण की आवश्यकता है। इन इच्छाओं के तहत नाश्ते अचार तथा पीनट बटर, रात के समय चॉकलेट सॉस के साथ नूडल्स तथा आधी रात को आइस क्रीम खाने का मन करता है।

इन इच्छाओं से माँ या बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुँचता। पर कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिनकी इच्छा होने पर भी आपको इनका सेवन करने से खुद को रोकना चाहिए। इनमें कई केमिकल्स होते हैं तथा ये माँ तथा बच्चे दोनों के लिए अच्छे होते हैं। ये गर्भ में बच्चे के विकास को भी प्रभावित करते हैं और इनसे गंभीर इन्फेक्शन भी हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान न खाने वाले भोजन (Foods to avoid during pregnancy and their effects)

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शार्क, स्वोर्डफ़िश, किंग मैकेरल, टाइल फिश और अल्बकोर टूना (Shark, swordfish, king mackerel, tilefish, and albacore tuna)

ज़्यादातर मछलियाँ गर्भावस्था के लिए काफी अच्छी होती हैं क्योंकि इनमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। कुछ मछलियों में मिथाइल मर्क्युरी की काफी मात्रा होती है। इस प्रकार की मछलियों जैसे शार्क, स्वोर्डफ़िश, किंग मैकेरल, टाइल फिश और अल्बकोर टूना को गर्भावस्था के दौरान ना खाएं क्योंकि मर्क्युरी रक्त के प्रवाह में एक वर्ष से अधिक समय तक रहता है।

मर्क्युरी के काम स्तर वाली मछलियाँ जैसे लाइट टूना, श्रिम्प, सालमन तथा कैटफ़िश गर्भावस्था के दौरान बिलकुल सुरक्षित व्यंजन हैं, पर डॉक्टरों के अनुसार इन मछलियों का सेवन हफ्ते में सिर्फ 6 औंस तक ही करें।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स –  कच्ची या अधपकी मछलियाँ या मांस (Raw or under cooked fish or meats)

कच्चे मांस में कई तरह के रोग वाले बैक्टीरिया होते हैं जो कि आमतौर पर स्वस्थ व्यक्तियों को हल्का नुकसान पहुंचा सकते हैं, पर गर्भवती महिलाओं के लिए ये मिसकैरेज, मृत बच्चे के जन्म तथा समय से पहले डिलीवरी का कारण बन सकते हैं। हर तरह के मांस को 160 डिग्री फारेनहाइट के तापमान पर पकाएं। मांस और मछली को बैक्टीरिया से बचाने के लिए इन्हें कम से कम 40 डिग्री फ़ारेनहाइट में फ्रिज में रखें।

गर्भावस्था में भोजन – डेली मीट्स (Deli meats)

गर्भावस्था के दौरान सेल्युलाईट से छुटकारा

डेली मीट में लिस्टिरिया के बैक्टीरिया हो सकते हैं जिससे प्लेसेंटा में मौजूद के खतरनाक इन्फेक्शन से ग्रस्त होने की प्रबल संभावना होती है। सलामी सैंडविच को गर्भावस्था (garbhavastha ki samasya) के समय बिलकुल ग्रहण न करें। इस तरह के सैंडविच की भूख मिटाने के लिए सैंडविच बनाने से पहले मीट को स्टीम कर लें।

नरम चीज़, बिना पाश्चरीकृत दूध एवं रस (Soft cheeses and unpasteurized milk and juices)

बिना पाश्चरीकृत दूध एवं दूध के उत्पाद जैसे नरम चीज़ और कुछ ताज़ा रसों में लिस्टिरिया नाम का बैक्टीरिया मौजूद रहता है।

बिना धुली सब्ज़ियाँ और फल, सलाद बार्स तथा कच्ची सब्ज़ियों के स्प्राउट्स (Unwashed fruits and vegetables, salad bars, and raw vegetable sprouts)

ज़्यादातर कच्ची सब्ज़ियों में लिस्टिरिया नाम का बैक्टीरिया पाया जाता है। गर्भवती महिलाओं को पालक, सलाद तथा मूली जैसी कच्ची सब्ज़ियों के स्प्राउट्स से बचना चाहिए जिससे वे बैक्टीरिया के खतरे को दूर कर सकें। फल और सब्ज़ियों को खाने से तथा पकाने से भी पहले गर्म पानी से धो लें।

गर्भावस्था में देखभाल – कैफीन (Caffeine – pregnancy me dekhbhal)

गर्भावस्था से जुड़े हुए बेहतरीन एप्स

कॉफ़ी तथा इस तरह के कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन ज़्यादा से ज़्यादा दिन में दो बार करें, परन्तु इन्हें पूरी तरह से छोड़ने में ही भलाई है।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स – अल्कोहल (Alcohol)

गर्भास्था के समय शराब को पूरी तरह छोड़ देना चाहिए क्योंकि ये सीधे प्लेसेंटा तथा गर्भ में स्थित बच्चे तक पहुँच जाती है। इस तरह बच्चे के साथ अल्कोहल का संपर्क करवाने से बच्चे के विकास में बाधा आती है और उसके मस्तिष्क पर भी असर पड़ सकता है।

गर्भावस्था में देखभाल – हर्बल चाय (Herbal teas and remedies – pregnancy me dekhbhal)

कुछ जड़ीबूटियां जैसे मगवार्ट तथा गोल्डन सील गर्भाशय में सिकुड़न पैदा कर सकती हैं। हर्बल चाय का सेवन बिलकुल ना करें क्योंकि इसका अजन्मे बच्चे पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं।

हर चीज़ का कम सेवन (Everything else in moderation)

गर्भावस्था के दौरान हर भोजन ग्रहण करना अच्छा है, किन्तु कम मात्रा में। ऐसा कहा जाता है कि एक गर्भवती स्त्री को दो लोगों का भोजन करने की आवश्यकता होती है, पर इसका अर्थ यह नहीं है कि आप अपने भोजन में दोगुनी मात्रा में कैलोरी तथा अन्य पोषक पदार्थों का सेवन करने लगें। विशेषज्ञों के अनुसार एक गर्भवती महिला को एक दिन में करीब

गर्भावस्था के दौरान अच्छी डाइट और बचाव उपाय

300 कैलोरीज़ की आवश्यकता पड़ती है जो एक चिकन सैंडविच, बेगल ब्रेड या एक गिलास संतरे के रस के बराबर होता है। अतिरिक्त भोजन गर्भवती महिला के अंदर फैट के रूप में जमा होता है तथा इससे उसे काफी थकान तथा खुजली की समस्या हो सकती है। इससे गर्भावस्था के बाद भी शरीर में जमा यह भोजन उसपर रह जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

एक गर्भवती महिला को उसके पसंद के भोजन से वंचित नहीं रखना चाहिए। वह जो चाहे वह खा सकती है, परन्तु उसे सिर्फ इस बात का ध्यान देना पड़ेगा कि भोजन की मात्रा सीमित हो और कुछ ख़ास व्यंजनों को सही प्रकार से पकाया गया हो।

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