Signs of ageing time to correct yourself – बढ़ती उम्र के निशान, चेहरे पर क्यों दिखाएँ?

सामान्य रूप से हमारी उम्र बढ़ने लगती है तो यह हमारे शरीर में धीरे धीरे हो रहे बदलावों और चिन्हों द्वारा दिखाई देने लगता है। उम्र का बढ़ना हर किसी की अनुवंशिकी (genetic) पर निर्भर करता है लेकिन उम्र बढ़ाने वाले कारकों पर हमारी जीवनशैली या जीने के ढंग का भी विशेष प्रभाव पड़ता है।

अगर आपकी जीवन शैली सेहतमंद नहीं है तो यह आपकी उम्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है साथ ही इन प्रभावों को आपकी त्वचा और शरीर पर देखा जा सकता है। आप अपनी जीवनशैली में कुछ उचित परिवर्तन कर बढ़ती उम्र के चिन्ह को कम कर (badhati umar ke chinh) उम्र बढ़ने की इस प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।

बढ़ती उम्र के संकेत चिन्ह (Indications of ageing)

बढ़ती उम्र के साथ बढ़ते काले धब्बे (Black spot with ageing)

त्वचा पर दिखाई देने वाले काले धब्बे (black spot) त्वचा के रंग को और भी गहरा कर देते हैं, इसका एक कारण सूर्य की तेज़ किरणें भी हो सकती है जो आपकी त्वचा को नुकसान पहूँचाती है जिससे आपकी त्वचा में ऐसे काले धब्बे दिखाई देते हैं।

इसके अलावा त्वचा में सूजन या अन्य कोई निशान जो समय के साथ गहरा हो जाता है। और इसमें मुंहासों के दाग भी शामिल हैं जो खत्म होने के बाद काले दाग के रूप में त्वचा पर स्थाई जगह बना लेते हैं।

बढ़ती उम्र के चिन्ह, बेजान और चमकहीन त्वचा (Dull glow-less skin tone)

अक्सर तेज़ या गर्म हवा त्वचा को रूखा कर बेजान और खराब कर देती है। तेज़ धूप के साथ लू और गर्म हवा के झोंको का असर हमारी त्वचा पर पड़ता है इसके साथ ही एयरकंडीशनर भी त्वचा पर बुरा प्रभाव डालते हैं इनकी वजह से त्वचा की परतों में दरारें आ जाती है और चेहरा रूखा तथा बेजान नज़र आता है।

बढ़ती उम्र के साथ झुली या लटकी हुई ढीली त्वचा (Sagging skin with age)

उम्र बढ़ने के साथ साथ कई लोगों में वज़न भी बढ़ जाता है। और इस बढ़े हुये वज़न को कम करने के बाद त्वचा झूली हुई दिखाई देती है। बढ़ती उम्र के प्रभाव (badhati umar ke prabhav) में से यह एक विशेष प्रतीक है जो उम्र बढ़ने के साथ साथ दिखाई देने लगता है।

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रूखी त्वचा है बढ़ती उम्र की परेशानी (Dry skin in old age)

बढ़ती उम्र के साथ होने वाली रूखी त्वचा (dry skin) चेहरे पर लकीरों और फटी (crack) हुई होने पर और भी अधिक परेशान करती है। और कई बार त्वचा की यह बाहरी परत ज़्यादा फटने पर निकल भी आती है।

महीन रेखाएँ और झुर्रियां बताती है आपकी उम्र (Lines and wrinkles are common in ageing)

सामान्य रूप से उम्र के बढ़ने के साथ होने वाली झुर्रियां कोई चिंता का कारण नहीं है पर अगर कम उम्र में ही आपकी त्वचा महीन रेखाओं (fine lines) और झुर्रियों (wrinkles) से युक्त हो तो यह आपकी उम्र को और भी ज़्यादा दिखाती है, जो ज़रूर चिंता का कारण है।

चितकबरी या विचित्र रंगों से युक्त त्वचा (Patchy skin)

कई बार त्वचा एक से ज़्यादा रंग की दिखती है या त्वचा का रंग एक समान नहीं होता। यह त्वचा में उपस्थित मैलेनिन (melanin) के असंतुलन या बदलावों से होता है। बढ़ती उम्र के प्रभाव (badhti umar ke prabhav) त्वचा की रंगत पर भी पड़ते हैं।

बढ़ती उम्र के निशान हैं खुले हुये रोम छिद्र (Open pores effects the skin in age)

त्वचा पर खुले हुये रोम छिद्रों (pores) को स्ट्रॉबेरी नोज़ (strawberry nose) के नाम से भी जाना जाता है जो चेहरे के अलावा पिछले अंगों जैसे ऊपरी पीठ, सीने और हाथों पर भी हो सकते हैं। बढ़ती उम्र के इन चिन्हों को कुछ खास देखभाल और दिनचर्या में उचित बदलाव कर कम किया जा सकता है इसके साथ ही अच्छे खानपान के साथ शरीर को स्वस्थ रखने वाले क्रियाकलाप बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम कर सकते हैं।

  • त्वचा (Skin): जब त्वचा अपनी कसावट खोने लगती है तो यह चेहरे पर झुर्रियों और महीन रेखाओं के रूप में नज़र आती है। नाखूनों के बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होने लगती है। त्वचा की ग्रंथियाँ तेल का निर्माण नहीं कर पाती और त्वचा रूखी तथा बेजान हो जाती है। रोज़ नियमित रूप से मॉश्चराइज़र के प्रयोग और सूर्य की तेज़ किरणों का सन स्क्रीन द्वारा बचा कर आप इस रूखेपन को कम कर सकते हैं। गर्मी से त्वचा को बचाने और सूर्य की हानिकारक किरणों से बचने के लिए आप हैट या टोपी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • बाल (Hair) : सिर की त्वचा शरीर के बाकी हिस्सों और अंडरआर्म्स (undearms) के बालों की संख्या लगातार कम होती जाती है। रंजक सेल्स (pigment cells) की तरह ही सफ़ेद बालों की संख्या भी बढ़ने लगती हैं।
  • कद (Height) : 80 की उम्र के बाद शरीर की लंबाई में लगभग 2 इंच तक की कमी हो सकती है। यह आपके शरीर की मुद्रा, रीढ़ की हड्डी, स्पाइनल डिस्क (spinal disc) और जोड़ों के संकुचन के कारण होता है।
  • सुनना (Hearing) : उम्र के बढ़ने के साथ साथ सुनने की क्षमता में भी कमी आने लगती है लोगों को सुनने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • दृष्टि (Vision) : यह बदलाव अक्सर 40 की उम्र के बाद से होने लगते हैं जिसमें देखने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। पढ़ने और रात के समय देखने में परेशानी होती है।
  • नींद (Sleep) : उम्र के साथ नींद की आदत में भी बदलाव होने लगते हैं। नींद कम हो जाती है और कई बार तो रात भर जागने की समस्या भी दिखाई देती है। नींद पर बढ़ी उम्र का गहरा प्रभाव पड़ता है।

बढ़ती उम्र के अन्य लक्षण और इन्हें कैसे दूर करें (Other signs of aging and how to control them)

  • लाल आँखें (Red eyes): यह भी बढ़ती उम्र से जुड़ी हुई एक समस्या है उम्र बढ़ने के दौरान आर्थराइटिस जैसी बीमारियों की वजह से इन समस्याओं का लगातार सामना करना पड़ता है।
  • आँखों में पानी आना (Dropy eyelids) : आँखों के आस पास वसा के जमाव के कई कारणों से हो सकता है। थकान, एलर्जी या द्रव पदार्थों के जमा होने की वजह से भी ऐसा हो सकता है। हवा के सूक्ष्म कण आँखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकते हैं जो आँखों से जुड़ी किसी बीमारी और आँखों से लगातार पानी गिरने जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं।
  • झुर्रियाँ और त्वचा का लटकना (Wrinkles and sagging skin) : बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर उसका सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ता है जो दिखाई भी देता है। इसमें त्वचा ढीली होकर लटक जाती है और तेल ग्रंथियों (oil glands) में तेल का निर्माण न होने की वजह से त्वचा रूखी होती जाती है। त्वचा का यह सूखापन ही झुर्रियों के लिए जिम्मेदार होता है। रूखी त्वचा महीन रेखाओं को जन्म देती हैं और त्वचा बेजान और बूढ़ी नज़र आने लगती है।
  • त्वचा की रंगत और बनावट (Skin tone and texture) : शरीर की त्वचा का रंग और बनावट में परिवर्तन उम्र के प्रभाव को सबसे व्यापक तरीके से प्रस्तुत करता है। शरीर के भीतर हो रहे बदलाव और समस्याएँ भी त्वचा के माध्यम से दिखाई देने लगती है। थाइराइड और किडनी संबंधी तकलीफ़ों में भी त्वचा पर असर दिखता है। ऐसी अवस्था में सोया और कैफीन से परहेज करना चाहिए। किडनी को साफ रखने के लिए प्याज़, नींबू और गाजर आदि का सेवन करना चाहिए।
  • तनाव का उम्र पर असर (Stressed out feeling leads) : बढ़ती उम्र के साथ कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियाँ भी बढ़ जाती है। इन परेशानियों से तनाव (stress) और चिंता भी ज़्यादा होने लगती है ज़्यादा तनाव का शरीर पर अंदर और बाहर दोनों तरफ से बुरा प्रभाव पड़ता है। शारीरिक परेशानियों में वज़न बढ़ने के साथ साथ उच्च रक्त चाप (high blood pressure), हार्ट अटैक और नींद न आने (insomnia) जैसी समस्या हो सकते हैं। इस तनाव को कुछ खास एकसरसाइज़ (exercise) के द्वारा कम किया जा सकता है।

आप उम्र बढ़ने के चिह्नों को अपनी त्वचा पर महीन रेखाओं (fine lines) और झुर्रियों (wrinkles) आदि के माध्यम से समझ सकते हैं। इस रेखाओं और झुर्रियों को पहचान कर इसके उपचार के लिए ठीक तरह से सभी आवश्यक प्रविधियों को अपनाना चाहिए क्योंकि ये रेखाएँ आपके चेहरे की सुंदरता को नष्ट कर आपका आकर्षण खत्म कर देती हैं। इस उम्र में सिर्फ मेकअप द्वारा इन्हें ठीक नहीं किया जा सकता बल्कि आपको कुछ बाहरी और प्राकृतिक उपायों की भी ज़रूरत होती है। बढ़ती उम्र की इन समस्याओं के लिए कुछ टिप्स इस प्रकार हैं।

ध्यान (Meditation)

कई बार त्वचा पर रेखाओं और झुर्रियों का मुख्य कारण तनाव होता है। ध्यान के द्वारा तनाव को काफी हद तक काम किया जा सकता है। इस के लिए आप किसी शांत जगह में ज़मीन पर आसान बिछा कर बैठें। अगर आप नीचे नहीं बैठ सकते तो किसी आरामदायक कुर्सी या ऊंची चीज़ का इस्तेमाल कर सकते हैं। आँखें बंद कर लंबी साँसे लीजिये। और महसूस कीजिये कि, आप अपने भीतर के तनाव को साँसों के साथ बाहर निकाल रहे हैं और मन में किसी ऐसी जगह की कल्पना लीजिए जो आपको सुकून देती हो। अगर आप ज़मीन पर बैठते हैं तो पद्मासन की मुद्रा आपके लिए बेहतर हो सकती है। अपने मन में प्रसन्नता का भाव रखिए ऐसा करने से तनाव के साथ साथ आपकी झुर्रियाँ और रेखाएँ भी दूर हो जाएंगी।

एलोवेरा जूस से उम्र कम दिखने के उपाय (Aloevera juice)

एलोवेरा त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद पौधा है। एलोवेरा की पत्ती को तोड़कर बीच से काट लें। अब इससे निकलने वाले जेल पदार्थ को जमा कर अपने चेहरे पर लगा लीजिये। हल्की मसाज के बाद 10 मिनट तक रहें और इसे त्वचा पर सूख जाने दें। फिर धो लें ऐसा करने से त्वचा की रेखाएँ और झुर्रियाँ कम होती है साथ ही दाग धब्बे आदि भी दूर हो जाते हैं।

एंटी एजिंग उपाय अंडे का सफ़ेद भाग से (Egg white)

एक अंडा लेकर उसे फोड़ लें। अब इसके सफ़ेद भाग को अलग कर चेहरे पर लगा लें। 30 मिनट लगाकर सूखा लें और फिर चेहरा पानी से धो लें। यह त्वचा पर जादुई प्रभाव डालते है इससे झुर्रियाँ दूर हो जाती है। अंडे के प्रयोग के बाद मॉश्चराइज़र का प्रयोग ज़रूर करें, यह स्किन की सुरक्षा (skin protection) के लिए ज़रूरी होता है।

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