Health problems develop during pregnancy (in Hindi) – गर्भावस्था के दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ

गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं के कारण कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ होती है। कभी कभी ये समस्याएँ माँ और बच्चे दोनों को हो सकती है। ऐसे में आप हमेशा अपनी चिंताए के बारे में डॉक्टर से सलाह लेते रहे स्वास्थ्य की समस्याओ की सूची जो गर्भावस्था के दौरान विकसित हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान पैदा होने वाली समस्याओं की सूची (List of health problems that can develop during pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान कई तरह की जटिल समस्याएं पैदा हो सकती हैं और इनसे उबरना काफी मुश्किल भी हो सकता है। इन समस्याओं में मुख्य हैं एक से ज़्यादा बच्चे के साथ गर्भवती होना, पिछली गर्भावस्था की समस्याएं और 35 वर्ष की आयु के बाद गर्भवती होना। ऐसी कई महिलाएं होती हैं जो किसी गम्भीर समस्या से पीड़ित होती हैं और इस वजह से उन्हें अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए और गर्भवती होने से पहले की समास्याओं से बचना चाहिए। नीचे ऐसी ही कुछ समस्याओं के बारे में बताया गया है।

कैंसर (Cancer)

गर्भावस्था के दौरान हो सकने वाले सबसे सामान्य कैंसर हैं गर्भनाल का कैंसर, मेलानोमा, स्तन कैंसर और लिम्फोमा (cervical cancer, melanoma, breast cancer, and lymphoma)। कैंसर से बच्चे को काफी कम खतरा होता है और कई उपचार गर्भावस्था के वक़्त आप पर काम करते हैं। अपने डॉक्टर से सलाह करके अपने कैंसर के आकार प्रकार और चरण के बारे में पता करें। गर्भावस्था के दौरान एक और प्रकार का कैंसर होता है, जिसे जेस्टेशनल ट्रोफोब्लास्टिक डिसीज़ (gestational trophoblastic disease) कहते हैं। यह तब होता है जब एक उर्वर अंडा भ्रूण बन जाता है। यह उपचार ट्यूमर (tumor) के प्रकार पर निर्भर करता है।

संक्रमण (Infections)

गर्भावस्था में वजन घटाने के लिए प्राकृतिक व्यायाम

गर्भावस्था के दौरान संक्रमण काफी सामान्य समस्या है। पर कुछ संक्रमण बच्चे के लिए काफी हानिकारक हो सकते हैं कच्चा या अधपका मांस ना खाएं, किसी अन्य व्यक्ति के साथ भोजन या पेय पदार्थ ना बांटें और अपने हाथ अच्छे से धोएं। अपने बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए ज़रूरी दवाइयां और टीका लें। अगर आपको ग्रूप बी स्ट्रेप (group B strep) से संक्रमण हो गया है तो एंटीबायोटिक्स (antibiotics) लें और अगर आपको गुप्तांगों में हर्पीज़ (herpes) हो गया है तो दवाइयां लें।

उच्च रक्तचाप (High blood pressure)

गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप का बढ़ जाना आपके और आपके बच्चे के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। अगर गर्भवती होने से पहले आपका रक्तचाप काफी ज़्यादा है तो इसकी चिकित्सा करवा लें, अन्यथा गर्भावस्था में आपको उच्च रक्तचाप या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (gestational hypertension) की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इस समस्या से ग्रस्त होने पर बच्चे का वज़न कम होता है या उसका जन्म समय से पहले हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान अपने रक्तचाप पर काबू पाना आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए ही लाभदायक सिद्ध होगा। इस उपचार के अंतर्गत बच्चे की अच्छे से देखभाल की जाती है, कुछ दवाइयां दी जाती हैं और जीवनशैली में परिवर्तन करवाया जाता है। इस समस्या से ग्रस्त कुछ गर्भवती महिलाएं प्रीएक्लैंप्सिया (preeclampsia) की शिकार हो जाती हैं, जिसके अंतर्गत 20 वे हफ्ते के बाद अचानक रक्तचाप में वृद्धि होती है। अतः किसी गम्भीर परिस्थिति से बचकर रहें, क्योंकि यह आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए काफी घातक हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य गर्भावस्था में एनीमिया (Anemia in pregnancy se garbhavastha ki dekhbhal)

एनीमिया से हिमोग्लोबिन कम होता है। हिमोग्लोबिन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सब उतकों, नाल को ऑक्सीजन ले जाने और भ्रूण के लिए है। अगर आरबीसी में हिमोग्लोबिन का स्तर कम होता है तो नाल, उतक और गर्भ में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे शिशु जन्मदर में गिरावट आती है इसका कारण यह है की भ्रूण को पर्याप्त पोषण नही मिल पता है।

एनीमिया के लक्षण (Symptoms of anemia)

  • यदि हिमोग्लोबिन का स्तर 7 या उससे कम है तो वह व्यक्ति एनीमिया से पीड़ित है।
  • थकान महसूस होना, चिडचिडापन, चीजों पर ध्यान न लगा पाना, साँस लेने में तकलीफ होना।

निदान (Diagnostics)

दूसरी तिमाही यानि गर्भावस्था का चौथा महीना

जब आपको ऊपर दिए हुए लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाए और हिमोग्लोबिन की जाँच कराये।  हिमोग्लोबिन के अलावा विटामिन बि12, फोलिक एसिड और आयरन की मात्रा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे नौ महीने तक शिशु को पूर्ण विकसित होने में मदद मिलती है। आपको इन दवाइयों को मौखिक रूप से लेने की बजाय पर्याप्त आहार के साथ लेना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स विटामिन बी12 से युक्त भोजन (Foods rich in vitamin B12)

दही, गाय का दूध, अंडे, चिकन, पनीर, सोयाबीन का दूध।

गर्भावस्था में भोजन फ्लोरिक एसिड युक्त आहार (Foods rich in folic acid)

अंडे की जर्दी, सोया उत्पाद, बादाम, मीठे आलू, गेहूं का आटा, पालक, चुकंदर, पत्ता गोभी, केले, संतरे, फूल गोभी।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स आयरन युक्त भोजन (Foods rich in iron)

राजमा, डार्क चोकलेट, नारियल पाउडर, काजू, आलू, सूरजमुखी के बीज, तिल्ली, मटर…

इन आहार युक्त आहार का सेवन करे जो शिशु के लिए अच्छा और सुरक्षित होगा।

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य गर्भावधि मधुमेह (Gestational diabetes)

गर्भावस्था के दौरान गर्भावधि मधुमेह बहुत ही आम समस्या है, जिसके कारण गर्भवती महिला का शरीर ठीक से इन्सुलिन का उपयोग नही कर पाता गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओ के रक्त में शर्करा के चयापचय में परिवर्तन के कारण कई बदलाव आते है। अगर आपके शरीर में शर्करा की मात्रा उचित सीमा में नही है, तो आपको उच्च रक्तचाप, सीजेरियन जन्म, और समय से पहले जन्म के रूप में, जैसी जटिलताओ का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त जन्म का समय, वज़न, पीलिया और कम रक्त शर्करा भी नवजात शिशुओं के लिए जोखिम का कारण बनता है।

गर्भावस्था के दौरान खाए जाने वाले सर्वश्रेष्ठ फल

गर्भावस्था में देखभाल गर्भावधि मधुमेह के लक्षण (Symptoms of gestational diabetes or pregnancy me dekhbhal)

पेशाब में वृद्धि, प्यास लगना, पिछले गर्भावस्था के दौरान गर्भावधि मधुमेह, उल्टी, भूख लगने के बावजूद वज़न  घटना, अक्सर संक्रमित होना, आनुवांशिक।

निदान (Diagnosis)

अपने रक्तचाप को सामान्य रखने के लिए आपको पोषण पर ध्यान देना होगा इसके साथ ही शारीरिक व्यायाम और नियमित रक्त शर्करा की जाँच करानी होगी। यदि इन सभी से आपका रक्त शर्करा का स्तर सामान्य नही हो रहा हो, तो डॉक्टर आपको इन्सुलिन की सलाह दे सकते है।

हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis gravidarum)

यह पहली तिमाही के दौरान होता है। हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम गर्भावस्था के दौरान होने वाली उल्टी का गंभीर रूप है, इससे पानी की कमी, वज़न की कमी, चक्कर आना जैसी समस्याए भी होती है।

हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम का इलाज (Treatment for hyperemesis gravidarum)

लगातार और नियमित रूप से ड्राई फ्रूट्स और तरल पदार्थ का सेवन करे गर्भावस्था की शुरुआत में विटामिन बी 6 मतली को कम करने में मदद करता है। मतली के उन लक्षणों में जब उलटिया लगातार एवं नियमित रूप से हो रही हो तब दवाइयां लेने की सलाह दी जाती है।