How to treat depression during menstruation – माहवारी के दौरान डिप्रेशन से कैसे छुटकारा पाए

मूड स्विंग्स (mood swings) माहवारी के पहले या इन दौरान एक सामान्य समस्या है जो कम उम्र की महिलाओं को इनका सामना करना पड़ता है।  लेकिन मूड स्विंग्स भी व्यक्ति के ऊपर निर्भर रहते है। बहुत सी महिलाओं के लिए यह एक चिडचिडाहट है जो शाररीक असुविधाजनक उत्पन्न होती है और कुछ महिलाओं के लिए यह डिप्रेशन भी बन सकता है।

अगर आप भी माहवारी / पीरियड्स के पहले या इस दौरान डिप्रेशन का शिकार बनती है तो घबराए मत क्यूंकि आप केवल इस समस्या से नहीं गुज़र रही है बल्कि आपकी तरह ओर भी बहुत सी महिलाए इस समस्या का सामना कर रही है।

माहवारी डिप्रेशन के लक्षण (Menstrual depression symptoms)

महिलाओं में माहवारी को एस्ट्रोजन (estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) नामक हॉर्मोन नियंत्रित करते है।  अलग मात्रा में इन हॉर्मोन का बनना और वो भी माहवारी के अलग समय के दौरान, इनसे आपके शरीर के साथ आपके दिमाग पर भी असर पड़ता है। बहुत सी महिलाओं के लिए प्री- मेन्स्त्रुअल (pre- menstrual) मूड स्विंग्स जैसे की चिडचिडाहट , थकान , कम एनर्जी , भूख की कमी होती है लेकिन बहुत सी और भी महिलाओं को गंभीर समस्या जैसे की चिंता, आंतक के हमले (panic attacks) , रोना , ध्यान नहीं लगा पाना , निराशा और अन्य से गुज़रना पड़ता है। अगर यह सब समस्या माहवारी / पीरियड्स के पहले या दौरान तक रहती है और फिर कुछ दिनों बाद अपने आप चली जाती है तो जान लीजिये की आपके हॉर्मोन आपके साथ खेल रहे है जिस कारण आपको मूड स्विंग्स और डिप्रेशन से गुज़रना पड़ रहा है।

बाहर निकलने का उपाय (The way out)

अगर माहवारी के दौरान आप मूड स्विंग्स से गुज़र रही है तो इसे डिप्रेशन नहीं माना जा सकता, आपको बस यह याद रखना है की ये सब आपके साथ हॉर्मोन के कारण हो रहा है और कुछ नहीं, इस से आपको बड़ी सहायता प्राप्त हो सकती है।  अगर आपके लक्षण ज्यादातर डिप्रेशन की ओर है तो आपको कुछ उपाय को अपनाना चाहिए ताकि यह समस्या गंभीर ना बन सके। सबसे बढ़िया बात यह है की माहवारी डिप्रेशन जिसे प्री मेन्स्त्रुअल लक्षण (pre- menstrual symptoms) भी कहा जाता है इनका इलाज आप कुछ दवाइयाँ और लाइफ स्टाइल में बदलाव के कारण कर सकती है।  इसलिए यह श्रेष्ठ होगा की आप माहवारी / पीरियड्स से पहले या इस दौरान हो रहे डिप्रेशन का इलाज कुछ लाइफ स्टाइल में बदलाव कर- कर देखें। अगर इन लाइफ स्टाइल बदलाव के कारण कोई असर नहीं हो रहा है तो आप अपनी प्रसूतिसास्री (gynecologist) से परामर्श ले सकती है।

अब तक साइंटिस्ट एक सही कारण जिन से माहवारी डिप्रेशन और मूड स्विंग्स होता है उनके बारे में जान नहीं पाए है।  मूड स्विंग्स को शाररीक असुविधाजनक के कारण उत्पन्न होना माना जा रहा है और शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा के बदलाव के कारण डिप्रेशन होना माना जा रहा है, जो ब्रेन केमिकल सेरोटोनिन (serotonin) की मात्रा पर असर डालता है जिस से डिप्रेशन बनता है।  इस आर्टिकल में कुछ लाइफ स्टाइल बदलाव को दर्शाया गया है जिस से आप माहवारी डिप्रेशन और मूड स्विंग्स का इलाज कर सकेंगी।

एक्स्सरसाईस (Periods mei depression ke liye exercise)

प्री- मेन्स्त्रुअल के समय भले ही आपको शाररीक सम्बंधित एक्स्सरसाईस करना ना पसंद हो लेकिन इस दौरान व्यायाम करने से आप डिप्रेशन को श्रेष्ठ रूप से दूर करती है।  यह माना जाता है की एस्ट्रोजन मात्रा की कमी, शरीर में माहवारी के दौरान होने के कारण, ब्रेन में सेरोटोनिन जो की एक बढ़िया महसूस कराने वाला हॉर्मोन है उस पर असर पड़ता है और इस कारण मूड स्विंग्स और डिप्रेशन उत्पन्न होते है।  व्यायाम करने से शरीर में सेरोटोनिन को बढ़ाया जा सकता है और इस तरह मूड को संतुलित रखा जा सकता है और साथ ही डिप्रेशन का इलाज करा जा सकता है।

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प्री- मेन्स्त्रुअल के दौरान या माहवारी के पहले कुछ दिनों में अगर आप मूड स्विंग्स या डिप्रेशन से गुज़रती है तो आपको कोई कठिनाई वाली एक्स्सरसाईस करने की कोई आवश्यकता नहीं। आप कुछ साधारण सा व्यायाम कर सकती है जैसे की चलना , हलके से जॉगिंग करना , भागना , साइकिलिंग करना , कुछ रोजाना फ्री हैण्ड एक्स्सरसाईस करना, इन सब से आप बेहतर महसूस कर सकती है।  अगर आप एक्टिव स्पोर्ट्स (active sports) में भाग लेती है तो इस से भी आपको मूड स्विंग्स और डिप्रेशन को सुधारने में सहायता प्राप्त हो सकती है।

कम मात्रा में ज्यादा बार खाए (Take frequent small meals)

माहवारी / पीरियड्स के दौरान भरपूर 3 बड़े खाने को खाने से अच्छा होगा की आप कम मात्रा में बार- बार खाने को खाए इस से आप मूड स्विंग्स और डिप्रेशन को सुधार सकती है।  रिसर्च से यह पता चला है की ब्लड ग्लूकोस मात्रा (blood glucose level) में बदलाव के कारण मूड स्विंग्स और डिप्रेशन उत्पन्न हो सकता है और 3 बड़े खाने को खाने से ब्लड ग्लूकोस की मात्र पर असर पड़ता है। इसलिए कम मात्रा में बार- बार खाने से आप अपने ब्लड ग्लूकोस की मात्रा को संतुलित बनाए रखते है और साथ ही डिप्रेशन को दूर कर सकते है।  ब्लड में कम शुगर की मात्रा से आप मूड स्विंग्स, लगातार रोना और चिडचिडाहट की शिकार बन सकती है।  इसलिए कम खाए लेकिन बार- बार खाते रहे ताकि डिप्रेशन को दूर रख सकें।

कैफीन और शराब के सेवन पर ध्यान दे (Check your consumption of caffeine and alcohol)

कैफीन (caffeine) और शराब दोनों इनसोम्निया (insomnia) और चिंता (anxiety) का कारण बन सकते है।  माहवारी / पीरियड्स के पहले या इन दौरान अगर आप मूड स्विंग्स और डिप्रेशन से गुज़रती है तो बेहतर होगा की आप उन दिनों कैफीन और शराब से दूर रहें। यह चीज़े सिर्फ कुछ समय के लिए नसों को आराम देती है लेकिन जैसे ही कुछ समय बीत जाता है, यह मूड को गिरा देती है और डिप्रेशन को बढ़ा देती है।  इसलिए बेहतर होगा की आप इस दौरान इन पदार्थो से दूर रहे।

मिठाई से दूर रहें (Stay away from sweets)

कैंडी (candy) , कोला (cola) , आइस क्रीम , पेस्ट्री (pastries) ये सब मीठे स्वाद खानों से आपको इस दौरान दूर रहना चाहिए क्यूंकि मीठे से आपकी ब्लड शुगर (blood sugar) की मात्रा बढ़ जाती है तुरुन्त ही घट भी जाती है। ब्लड शुगर की मात्रा में बदलाव होने से मूड स्विंग्स हो सकता है इसलिये श्रेष्ठ यह होगा की माहवारी / पीरियड्स के दौरान इन चीजों से दूर रहा जाए।  इस कारण आपका ब्लड शुगर संतुलित मात्रा में रहेगा।

समय के साथ डार्क चॉकलेट का आनंद ले (Enjoy a little of dark chocolate at a time)

जैसे की माहवारी / पीरियड्स से पहले और इन दौरान अगर आप मूड स्विंग्स या डिप्रेशन से गुज़र रही होती है तो आपको मीठे से दूर रहना चाहिए लेकिन नियमित समय के अनुसार आप थोड़ी डार्क चॉकलेट (dark chocolate) का आनंद ज़रूर ले सकते है। डार्क चॉकलेट में शुगर की मात्रा बहुत ही कम होती है इसलिए समय सहित सही मात्रा में डार्क चॉकलेट को खाए। डार्क चॉकलेट को ब्रेन में अच्छा महसूस करवाने वाला हॉर्मोन , सेरोटोनिन को बढाने में सहायक माना जाता है जिस से आप अपने मूड स्विंग्स और डिप्रेशन का इलाज कर सकती है।

कुछ कैल्शियम और विटामिन B6 सप्लीमेंट को लें (Take some calcium and Vitamin B6 supplements)

रिसर्च के अनुसार अगर आप माहवारी / पीरियड्स से पहले या उन दिनों में कैल्शियम या विटामिन B6 का सेवन करती है तो आप अपने मूड स्विंग्स और डिप्रेशन का इलाज करने में कामयाब होती है।  लेकिन साइंटिस्ट को यह नहीं पता की कैसे कैल्शियम सप्लीमेंट PMS और डिप्रेशन का इलाज करते है।  हल्का कैल्शियम को ग्रहन करने से इन दौरान आपको मूड स्विंग्स और डिप्रेशन दूर करने में आसानी होती है।  विटामिन B6 को ब्रेन में बनने वाले हॉर्मोन जैसे सेरोटोनिन को बढाने में सहायक माना जाता है और इस कारण माहवारी / मासिक धर्म के दौरान मूड स्विंग्स और डिप्रेशन से दूर रहा जाएगा।  कैल्शियम और विटामिन B6 के सुप्प्लेमेंट्स को माहवारी / पीरियड्स से पहले या इन दौरान लेने से पहले अपने डॉक्टर से सही डोस के बारे में जान कारी प्राप्त कर लें।

स्ट्रेस को दूर करें (Remove stress, masik dharm ke samay depression)

स्ट्रेस के कारण मूड स्विंग्स और डिप्रेशन हो सकता है और इसलिए इन दौरान स्ट्रेस को कम रखने से आप डिप्रेशन को दूर रख सकेंगी।  इन दौरान 8 घंटे के लिए सोए और ध्यान रखें की जब आपको आराम की आवश्यकता है उस समय आराम ज़रूर लें।  अपने आप को संतुष्ट रखना, अपने शौक/ हॉबी पर समय व्यस्त करना या वो काम करना जिस से आपको ख़ुशी मिलती हो, इन सब कार्यों से आप स्ट्रेस को दूर कर सकेंगी। ध्यान (meditation) और गहरी सांस (deep breathing) लेने से भी आप स्ट्रेस को निकाल सकेंगी और मूड स्विंग्स और डिप्रेशन से लड़ सकेंगी।

योगसनस को अपनाए (Practice yogasanas)

मासिक धर्म / पीरियड्स के दौरान योगसनस करने से आप डिप्रेशन और मूड स्विंग्स को नियंत्रित कर सकेंगे। योगसनस मांसपेशियों को खींचाव प्रदान करता है जिस से पेट में उत्पन्न हो रहे ऐंठन (cramps) को कम करने में सहायता प्राप्त होती है और साथ ही मांसपेशियों को आराम भी मिलता है।  योग से आप अपने माइंड को आराम दे सकेंगी और साथ ही स्ट्रेस को दूर कर सकेंगी जिस से आप डिप्रेशन से छुटकारा पा सकेंगी। माहवारी / पीरियड्स के दौरान सभी योग पोस को करना मुमकिन नहीं है लेकिन कुछ साधारण , आराम और खींचाव पहुचाने वाले योगसनस को आप ज़रूर कर सकती है।

कुछ रचनात्मक करें (Do something creative)

अगर आप पहचान गए है की आपको प्री- मेन्स्त्रुअल या मासिक धर्म के दौरान डिप्रेशन हो रहा है तो आप अपने आप को कुछ रचनात्मक कार्यो में व्यस्त रख सकती है और इसका इलाज कर सकती है। कुछ रचनात्मक कार्य में व्यस्त रहने से आप अपने दिमाग को एक स्थान पर ध्यान लगाए रखती है और इस से अपने मूड स्विंग्स और डिप्रेशन का इलाज कर पाती है।  पेंटिंग , पढना (reading) , हैण्ड क्राफ्टिंग (handcrafting) , यह सब डिप्रेशन के इलाज में सहायता करते है और आपके ब्रेन को व्यस्त रखती है और साथ ही इस प्रक्रिया से आनंद भी प्राप्त कर पाती है।

कुछ जड़ी बूटी को माहवारी डिप्रेशन को सुधारने के लिए उपयोगी पाया जाता है (Some herbs believed to treat menstrual depression)

कुछ जड़ी बूटियाँ, प्री- मेन्स्त्रुअल (pre menstrual) लक्षणों को कम करती है जैसे की डिप्रेशन और मूड स्विंग्स। नीचे कुछ जड़ी बूटियों के बारे में दर्शाया गया है जिस से आप माहवारी दौरान डिप्रेशन का इलाज कर सकती है,

महिलाओं में अवसाद के लिए इवनिंग प्रिम्रोस (Evening primrose)

इवनिंग प्रिम्रोसे आयल (evening primrose oil) को PMS डिप्रेशन को कम करने में बेहतरीन माना जाता है।  यह आयल प्रोस्टाग्लैंडीन (prostaglandin) को शरीर में कम बनाता है जिस से डिप्रेशन कम होता है। माहवारी/ पीरियड्स से पहले 500 mgs इवनिंग प्रिम्रोसे आयल लेने से डिप्रेशन कम होता है।

डिप्रेशन के शिकार के लिए ब्लैक कोहोश (Black cohosh)

पुराने जमाने में ब्लैक कोहोश को प्रीमेनोपौसल (premenopausal) के लक्षणों का इलाज करने में लाभकारी मानते थे।  यह जड़ी बूटी निद्रा में अशांति और चिडचिडाहट को नियंत्रित करती है जिस से PMS डिप्रेशन के कारण उत्पन्न होने लगते है।

चेस्टबेर्री (Chasteberry mahawari mei tanav ke liye)

अनेक प्रकार के क्लिनिकल रिसर्च ने यह पाया है की चेस्टबेर्री / निर्गुण्ठी चिडचिडाहट (irritability), मूड स्विंग्स और डिप्रेशन को माहवारी से पहले और इन दौरान नियंत्रित करने में प्रभावशाली है।  यह साथ ही सूजन और स्तन की कोमलता (breast tenderness) का भी इलाज करता है जिन कारण मूड स्विंग्स उत्पन्न हो सकते है।

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