Simple vastu tips for kitchen, Vastu shastra for kitchen – वास्तुशास्त्र के अनुसार कैसा हो रसोईघर, किचन वास्तु टिप्स

वास्तुशास्त्र हमारे घर की समृद्धि और शांति के लिए बहुत प्रभावकारी होता है जो लोग वास्तुशास्त्र में विश्वास रखते हैं वे घर के वास्तु से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करते हैं। कुछ लोगों का यह मानना होता है की वास्तु से किसी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं पड़ता पर हम आपको बता दें कि, वास्तुशास्त्र पूरी तरह से विज्ञान पर आधारित है, विज्ञान पर तो लोगों का विश्वास होना स्वाभाविक ही है। इसमें दिशाओं के अनुसार घर और घर में रखे सामानों कि स्थिति तय की जाती है और कुछ विशेष कामों को करने की एक खास जगह होती है। प्राचीन समय से ही हर संस्कृति में ही हर कामों के लिए कुछ निश्चित जगह का चुनाव किया जाता है, जैसे खाना पकाने के लिए एक जगह तय की जाती है। नहाने के लियते स्नानागार या जिसे हम आज बाथरूम करते हैं, अलग स्थान में होता है, पूजा स्थल का अपना अलग स्थान रखा जाता है, इसी प्रकार कुछ कामों और घर में प्रयोग की जाने वाली सामग्रियों की भी एक निश्चित की हुई जगह होती है। इसमें चीजों और दिशाओं का विशेष महत्व होता है जो घर और परिवार के लोगों पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की किस दिशा में हो किचन? रसोई घर का वास्तु (Vastu tips for kitchen in Hindi)

घर का किचन या रसोईघर जहां खाना पकाया जाता है वह दक्षिण पूर्वी कोने या आग्नेय कोण में होना चाहिए। अगर आपके घर की यह जगह सुविधाजनक न हो तो रसोई को आप वायव्य कोण या उत्तर-पश्चिम कोण में रसोईघर बनाया जा सकता है।

रसोई का वास्तु – किचन का वास्तु (Kitchen ka Vastu)

खाना पकाने की जगह (Cooking place in kitchen)

किचन में खाना पकाने वाला चूल्हा या गैस बर्नर पूर्व दिशा में होना चाहिए, अर्थात खाना पकाने वाले का मुख पूर्व दिशा में होना वास्तु के हिसाब से शुभ माना जाता है।

गैस और प्लेटफॉर्म (Gas and platform)

किचन का वास्तु तय करते समय यह भी ध्यान रखें कि गैस बर्नर या चूल्हा बाहर से दिखाई न दे। मतलब चूल्हे की स्थिति इस प्रकार होनी चाहिए की बाहर से वह दिखाई न दे इसका प्रभाव परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

सिंक या पानी की जगह (Sink and washing area)

वास्तुशास्त्र के अनुसार किचन में सिंक या बर्तन धोने की जगह चूल्हे से थोड़ी दूरी पर होनी चाहिए। आग और पानी को आपस में विरोधी माना जाता है, अगर ये दोनों एक जगह होते हैं तो एक दूसरे से परस्पर विरोध का भाव दर्शाते हैं, इसका सीधा प्रभाव परिवार के लोगों के आपसी रिश्तों के मध्य दिखाई देता है। इसका सबसे अच्छा समाधान यह होगा कि, सिंक या बर्तन आदि धोने की जगह किचन के उत्तरपूर्वी दिशा में हो। पीने का पानी भी इसी दिशा में रखना उचित होता है।

बिजली के उपकरण (Kitchen electrical appliance)

आजकल महिलाएं रसोईघर में विभिन्न प्रकार के बिजली से चलने वाले उपकरणों का प्रयोग करती है जो किचन के कामों को आसान बनाने में उनकी मदद करता है, इन सामानों की जगह भी वास्तु के अनुसार तय की गयी है। अगर यह सही स्थान पर न रखा जाए तो परिवार और घर में रहने वाले लोगों की सेहत पर असर डालता है। फ्रिज या रेफ्रीजरेटर को दक्षिण पश्चिम दिशा में रखना उचित होता है। एक्सॉस्ट फैन को पूर्वी दीवार या दक्षिण पूर्वी कोने की दीवार में होना चाहिए। अन्य दूसरे उपकरण जैसे माइक्रोवेव, मिक्सी आदि भी दक्षिण पूर्व में रखें। स्टोरेज (storage) के लिए उत्तर पूर्वी कोना वास्तु के अनुसार श्रेष्ठ माना जाता है।

वास्तु के अनुसार रसोईघर के लिए इस बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए (Vastu ke anusar kitchen)

  • किचन का निर्माण कराते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किचन में वायु का उचित पारगमन या आना जाना बना रहे।
  • किचन की बड़ी खिड़कियाँ पूर्व दिशा में होनी चाहिए।
  • किचन वास्तु के अनुसार अगर रसोई में छोटी खिड़कियाँ (small window) बनवा रहे हैं तो उसे दक्षिण दिशा में बनवाएँ।
  • किचन (vastu ke anusar kitchen ka rang) में हरे रंग के अलावा अन्य रंगों जैसे लाल, पिंक, ऑरेंज, चॉकलेट और व्हाइट आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • किचन के साथ टॉयलेट या बाथरूम (bathroom) सटे हुए नहीं होना चाहिए।
  • वास्तु के अनुसार रसोईघर (vastu ke anusar rasoighar) में भोजन करने को सही नहीं माना जाता। भोजन का स्थान रसोई से बाहर होना चाहिए।
  • घड़ी दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना ठीक होता है।
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