What is Glaucoma? Symptoms & treatments – How to prevent it? – ग्लूकोमा क्या है? लक्षण एवं इलाज – इससे कैसे बचें?

आमतौर पर ग्लूकोमा आँखों के दबाव के बढ़ने की वजह से होता है। ऐसा तब हो सकता है जब आँखों का द्रव्य, जिसे एक्वस ह्यूमर (aqueous humor) कहते हैं, आँखों के सामने के भाग में सामान्य रूप से संचारित नहीं होता है।  मूल रूप से यह एक लैटिस (lattice), जो कि एक प्रकार का माध्यम है, की मदद से आँखों से बहता है। इस माध्यम में ब्लॉकेज (blockage) की वजह से यह द्रव्य जम जाता है एवं ग्लूकोमा का कारण बनता है। डॉक्टर इस ब्लॉकेज का सटीक कारण नहीं जानते, पर इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि यह आनुवांशिक हो सकता है, अर्थात माता पिता से बच्चों को हो सकता है। ग्लूकोमा के अन्य कारण आँखों का गंभीर संक्रमण, आँखों में जलन की स्थिति, आँखों को हुई किसी प्रकार की रासायनिक क्षति, रक्त की धमनियों का आँखों में अटक जाना एवं कई बार आँखों की अन्य समस्याओं के लिए आँखों की शल्य क्रिया प्रमुख है। यह आमतौर पर दोनों आँखों में होता है परन्तु ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) को भिन्न प्रकार से प्रभावित करता है।

लक्षण (Symptoms)

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अधिकतर स्थितियों में ग्लूकोमा के लक्षण काफी क्षीण या ना के बराबर होते हैं। हमने फिर भी नीचे ग्लूकोमा के कुछ लक्षणों की सूची बनायी है जिससे कि अधिक देर होने से पहले आप इनका पता लगा सकें :

  • अँधेरे कमरों में खुद को संभालने में अजीब सी परेशानी होना
  • आँखों से दूर या पास की वस्तुओं पर ध्यान केन्द्रित करने में परेशानी
  • आँखों की पुतलियों का रंग बदलना
  • आँखों में पानी आना या अतिरेक आंसू
  • जमी हुई, लाल या सूजी पलकें
  • आँखों में या आसपास तेज़ दर्द
  • चीज़ें दो दिखना
  • नज़र के केंद्र में काला धब्बा
  • रेखाओं एवं किनारों का अस्पष्ट एवं हिलता डुलता सा दिखना
  • जलन एवं खुजली के साथ सूखी आँखें
  • किसी एक आँख की रोशनी का अचानक चला जाना
  • धुंधला दिखना
  • तेज़ रोशनी के प्रति अतिरिक्त संवेदनशीलता की वजह से पलकें झपकना
  • रोशनी के आसपास इन्द्रधनुष या प्रभामंडल दिखना
  • भूतों जैसी चीज़ें देखना जो मूल रूप से काले धब्बे होते हैं

इलाज (Treatment)

दवाइयां (Medicines)

ग्लूकोमा को दवाइयों की मदद से ठीक करने के लिए आप ग्लूकोमा की स्थिति के आधार पर आई ड्रॉप्स (eye drops) या गोलियों का चुनाव कर सकते हैं। ये दवाइयां आँखों का दबाव कम करती हैं एवं आँखों से निकलने वाले द्रव्य के संचार को निकासी कोण अलग करके प्रवाह बढ़ाकर या आँखों के अन्दर द्रव्य के उत्पादन को रोककर कम करती हैं। यदि कोई किसी प्रकार का साइड इफ़ेक्ट (side effect) अनुभव करता है तो उसे अपने नेत्र विशेषज्ञ को इस बात की तुरंत जानकारी देनी चाहिए।

लेज़र शल्य चिकित्सा (Laser surgery)

यह ग्लूकोमा के सबसे प्रभावी एवं प्रस्तावित इलाजों में से एक है।  ओपन एंगल ग्लूकोमा (open angle glaucoma) का इलाज करने के लिए ट्रेबीक्यूलोप्लास्टी (Trabeculoplasty) आँखों की निकासी के कार्य को बेहतर करने एवं आँखों के दबाव को नियंत्रित करने का लेज़र इलाज है। ग्लूकोमा को ठीक करने का एक और इलाज इरिडोटॉमी (Iridotomy) है, जिसके अनुसार आँखों की पुतलियों में छोटे छेद किये जाते हैं जिससे कि नैरो एंगल ग्लूकोमा  (narrow angle glaucoma) का ध्यान रखते समय निकासी से आँखों के द्रव्य का प्रवाह तेज़ बना रहे।

शल्य चिकित्सा (Operative surgery)

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शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नेत्र विशेषज्ञ आँखों के द्रव्य के प्रवाह के लिए बाईपास ड्रेनेज (bypass drainage) बनाने के लिए कुछ ख़ास उपकरणों एवं एक माइक्रोस्कोप (microscope) का प्रयोग करेंगे। यह नया रास्ता जमे हुए द्रव्य को बाहर निकालेगा एवं आँखों के दबाव को कम करेगा।  नेत्र विशेषज्ञ तभी शल्य क्रिया प्रस्तावित करेगा यदि उसे लगता है कि आँखों के कम दबाव का लाभ शल्य क्रिया से प्राप्त होगा एवं इससे कोई गंभीर समस्या या ऑप्टिक नर्व डैमेज (optic nerve damage) की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

रोकथाम (How to prevent it?)

ओपन एंगल प्राइमरी ग्लूकोमा की रोकथाम संभव नहीं है, परंतु शुरूआती चरणों में रोकथाम के उपाय करके आँखों की रोशनी के जाने एवं तंत्रिका क्षति की समस्या से बचा जा सकता है।  शुरूआती चरणों मेओइन प्रभावी इलाज से आप इससे छुटकारा पा सकते हैं।  दूसरी तरफ, द्वितीयक ग्लूकोमा का इलाज आँखों को गंभीर क्षति से बचाकर एवं चिड़चिड़ेपन,आँखों की जलन एवं अन्य ऐसी समस्याओं जो द्वितीयक ग्लूकोमा का कारण बनती हैं, से बचकर किया जा सकता है। इरिडोटॉमी की मदद से सबसे प्राथमिक ग्लौकोमा का इलाज संभव है, परन्तु ऐसा करने से बाद में गंभीर एंगल क्लोशर (angle closure) ग्लूकोमा से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है।