Pregnancy Diet in hindi – Ideal Nourishment during Pregnancy – गर्भावस्था के समय आदर्श पोषण

एक बार महिला जब गर्भवती हो जाए, तब उसे खुद को अपने गर्भावस्था के समय से पूर्व के जीवन से अलग कर लेना चाहिए। गर्भावस्था के बाद उसे वो अस्वस्थ जीवनशैली छोड़ देनी चाहिए, जिससे उसके गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। एक बार जब कोई महिला माँ बनने के बारे में सोच लेती है, तो उसे एक संतुलित आहार का चार्ट (chart) बना लेना चाहिए। इस मौके पर गर्भवती महिला के परिवार जनों तथा अन्य मित्रों के द्वारा उसे सही खानपान के सम्बन्ध में काफी सलाह तथा दिशा निर्देश दिए जाते हैं। पर यह सही होगा कि वह महिला सारे लोगों की सलाह को ध्यान में रखे तथा इस पर शोध करके एक सही निष्कर्ष पर पहुंचे।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अच्छे और आदर्श खानपान का महत्त्व समझाने की ज़िम्मेदारी डॉक्टरों, अन्य सहायकों एवं उस महिला के परिवार की भी होती है। इसके साथ ही संक्रमण और फ़ूड पोइज़निंग (food poisoning) ना होने देने की जानकारी भी काफी अहम है। नीचे गर्भवती महिलाओं के लिए आदर्श खानपान की सूची दी जा रही है।

सुरक्षित भोजन तथा खाने की आदतें (Safe food and eating practices)

खाना बनाते समय तथा बर्तन ढोते समय भी हमेशा आपको सुरक्षित रूप से हर चीज़ को सम्भालना चाहिए, पर गर्भवती महिला के लिए यह काफी आवश्यक है कि मांस, मछली और सब्ज़ियाँ अच्छे से पकाए, बर्तन और अन्य कार्य अच्छे से संपन्न करें तथा ऐसे भोजन से परहेज करें जिसमें लिस्टेरिया बैक्टीरिया (listeria bacteria) हो। वैसे तो सामान्य लोगों में लिस्टेरिया का आक्रमण कम ही होता है, परन्तु यह गर्भवती महिलाओं पर ज़्यादा हमला करता है और इसके फलस्वरूप माँ की जानकारी ना होते हुए भी बच्चे के संक्रमित होने का काफी ज़्यादा ख़तरा होता है।

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गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स – DHA और इसका महत्त्व (What is DHA and why is it important?)

DHA गर्भावस्था के दौरान अच्छे पोषण का काफी महत्वपूर्ण स्त्रोत होता है, लेकिन इस स्त्रोत से जुड़े हुए काफी कम पोषक पदार्थ उपलब्ध हैं। चर्बीयुक्त मछलियाँ जैसे सालमन (salmon) शायद DHA का इकलौता अच्छा स्त्रोत होती हैं। परन्तु गर्भवती महिलाओं को हमेशा इस मछली या अन्य किसी प्रकार के सीफ़ूड (seafood) का हफ्ते में ज़्यादा से ज़्यादा 2 बार ही सेवन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह दूषित पदार्थों (contaminant) का भी स्त्रोत हो सकता है।

गर्भावस्था से जुड़े हुए पोषक तत्वों पर शोध करने वालों के अनुसार महिलाओं को रोज़ाना दो में से किसी एक तरीके से DHA से युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। ये दो स्त्रोत हैं स्वच्छ मछली का तेल (distilled fish oil) तथा मरीन एलगी (marine algae)। यह काफी आवश्यक है कि जो भी सप्लीमेंट (supplement) चुनें, उसमें मर्क्युरी (mercury) या अन्य भारी धातुओं की मात्रा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा PCB तथा अन्य केमिकल्स (chemicals) भी इसमें नहीं होने चाहिए।

गर्भावस्था में सही पोषक भोजन (Best pregnancy diet for mother’s nourishment)

स्वस्थ गर्भावस्था के लिए आहार है सालमन (Salmon)

यह एक ऐसा भोजन है जो कि एक गर्भवती महिला के लिए काफी आवश्यक है, क्योंकि इसमें उच्च स्तर का प्रोटीन होता है। यह ओमेगा 3 फैट्स (omega 3 fats) का भी काफी अच्छा स्त्रोत होते हैं, जो कि आपके बच्चे के विकास के लिए काफी आवश्यक है। गर्भावस्था के समय के दौरान एक गर्भवती महिला के व्यवहार में काफी परिवर्तन आ जाता है और उसे काफी मात्रा में मूड स्विंग्स (mood swings) होते हैं। इस समस्या को सालमन को अपने खानपान में शामिल करके दूर किया जा सकता है। अन्य समुद्री मछलियों की तुलना में सालमन में काफी कम मिथाइल मर्क्युरी (methyl mercury) होती है, जो कि बच्चे के तंत्रिका तंत्र (nervous system) के विकास में बाधा पहुंचाती है।

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गर्भावस्था के दौरान आहार में मीठे आलू (Sweet potatoes)

इस प्रकार के आलू कैरोटीनॉइड्स (carotinoids) से अपना रंग प्राप्त करते हैं, और ये इन कैरोटीनॉइड्स को एक गर्भवती महिला के शरीर में विटामिन ए (vitamin A) में परिवर्तित करने में भी सक्षम हैं। वैसे तो विटामिन ए का ज़्यादा मात्रा में सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, पर जब आप गर्भवती हों, तो मीठे आलू का सेवन अवश्य किया जा सकता है। विटामिन ए के अलावा मीठे आलू विटामिन सी (vitamin C) का भी काफी अच्छा स्त्रोत होते हैं, क्योंकि ये एक गर्भवती महिला की त्वचा का काफी अच्छे से ख्याल रखते हैं।

गर्भावस्था में भोजन में अखरोट (Walnuts hai pregnancy mai khana)

अखरोट उन खाद्य पदार्थों में से एक हैं, जिनमें ओमेगा 3 (omega 3) की काफी ज़्यादा मात्रा होती है। एक गर्भवती महिला को हर रोज़ नाश्ते में या शाम को एक मुट्ठी अखरोट अवश्य खाना चाहिए। इसमें DHA भी होता है, जो कि आपके शरीर के अंदर बढ़ रहे बच्चे के लिए काफी फायदेमंद होता है। अखरोट के सेवन से बच्चे के मस्तिष्क की बढ़त और विकास भी तेज़ गति से होता है। अखरोट से आपको काफी मात्रा में प्रोटीन (protein) तथा फाइबर (fiber) भी मिलता है। अगर आप खुद के और बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित हैं, तो अखरोट का सेवन काफी आवश्यक है।

गर्भावस्था के दौरान आहार में लीन मीट्स (Lean meats se pregnancy me dekhbhal)

मीट से उच्च गुणवत्ता वाली प्रोटीन (protein) प्राप्त की जा सकती है। लेकिन आपको हर तरह की मीट का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। लाल मांस से परहेज करना काफी आवश्यक है क्योंकि यह आपके शरीर में अतिरिक्त वसा की मात्रा को बढ़ा देता है। यह आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए ही काफी हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इसी वजह से डायटीशियन्स (dietitians) गर्भवती महिलाओं को लीन मीट का सेवन करने तथा इसे अपने खानपान में शामिल करने की सलाह देते हैं।

गर्भवती महिलाओं को हॉट डॉग्स तथा डेली मीट्स (hot dogs and deli meats) के सेवन से भी परहेज करना चाहिए। अगर इन्हें ठीक से उबाला नहीं गया है तो इस बात की काफी संभावना है कि बैक्टीरिया और परजीवी (bacteria or parasites) आपके शरीर पर हमला कर देंगे।

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गर्भावस्था में भोजन में ग्रीक दही (Greek yogurt)

दही आपको गर्भावस्था के समय में हमेशा स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। इस स्थिति में ग्रीक दही एक ज़्यादा कारगर विकल्प साबित होगी। दही का सेवन करने से आप अपने खानपान में काफी मात्रा में कैल्शियम (calcium) शामिल कर सकती हैं। आपके पूरे गर्भावस्था के समय में कैल्शियम आपकी हड्डियों तथा दांतों को मज़बूत बनाए रखता है। पर यह भी काफी ज़रूरी है कि आप इसका एक हद तक ही सेवन करें, क्योंकि शरीर में कैल्शियम की अतिरिक्त मात्रा हो जाने से कैल्सिफिकेशन (calcification) का ख़तरा बढ़ जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की हड्डियों का हर एक जोड़ दुखने लगता है। अतः कैल्शियम के सेवन के मामले में आपके लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह करना ही बेहतर विकल्प साबित होगा।

गर्भावस्था के दौरान खान-पान में मछली का सेवन (Eat fish)

मछली आपको काफी मात्रा में DHA प्रदान करती है, जो सबसे ज़्यादा सीफूड तथा अलसी (seafood and flaxseed) में पाया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे के स्वास्थ्य को अच्छा करने के लिए यह काफी ज़रूरी तत्व होता है। DHA एक ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega-3 fatty acid) होता है, जो आपके बच्चे के मस्तिष्क के विकास में मदद करता है तथा ऐसे बच्चे के जन्म में मददगार होता है, जिसकी बचपन से ही नज़रें, मस्तिष्क, शरीर के अन्य अंगों की चलायमान स्थिति तथा भाषाओं को समझने का ज्ञान काफी उच्च दर्जे का होता है। कम मर्क्युरी (mercury) वाली मछली का हर हफ्ते कम से कम 12 औंस सेवन करें या DHA का पूरक लें।

स्वस्थ गर्भावस्था के लिए आहार में फाइबर युक्त भोजन (Fiber rich food)

ऐसे फल, सब्ज़ियों तथा साबुत अनाजों को अपने खानपान में शामिल करें जो कब्ज़ तथा हेमोरोइड्स (hemorrhoids) की रोकथाम में अहम भूमिका निभाएं। इससे आपका पेट भरा प्रतीत होता है और आप ज़्यादा खाने की इच्छा पर काबू पा सकती हैं। आप फाइबर युक्त भोजनों में उच्च मात्रा में विटामिन्स, मिनरल्स और फोटोकेमिकल (vitamins, minerals, and photochemical) प्राप्त कर सकती हैं। ये बच्चे के विकास के लिए काफी आवश्यक होते हैं। आपको एक दिन में करीब 25 से 35 मिलीग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए।

कैल्शियम – 1000 मिलीग्राम जो आपको दुग्ध उत्पादों, हरी पत्तेदार सब्ज़ियों आदि से मिलेगा।

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फाइबर – 25 से 35 मिलीग्राम जो आपको फलों, सब्ज़ियों, साबुत अनाजों, बीन्स (beans) और मटर से प्राप्त होते हैं।

फोलेट (Folate) – 600 मिलीग्राम जो आपको बीन्स, मटर, ब्रॉकली (broccoli), ऐस्पैरागस (asparagus) और संतरे से उपलब्ध होते हैं।

आयरन (Iron) – 27 मिलीग्राम जो आपको सूखे बीन्स, मांस, जई के आटे, टोफू (tofu) आदि से प्राप्त होते हैं।

गर्भावस्था में खानपान में फल और सब्ज़ियाँ (Fruits and vegetables)

एक गर्भवती महिला को खासकर दूसरी एवं तीसरी तिमाही में फलों एवं सब्ज़ियों के सेवन पर काफी ज़्यादा ज़ोर देना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों में कैलोरी (calorie) की मात्रा कम होती है तथा ये फाइबर, खनिज तथा विटामिन्स से भरपूर होते हैं। विटामिन सी (vitamin C) जो कि कई फल और सब्ज़ियों में पाया जाता है, शरीर को आयरन सोखने में मदद करता है। हरी सब्ज़ियों में विटामिन ए (vitamin A) एवं गर्भावस्था के लिए ज़रूरी अन्य पोषक पदार्थ होते हैं।

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