How thyroid does effects pregnancy women? – थाइरोइड का महिलाओं की गर्भावस्था पर प्रभाव

थाइरोइड ग्रंथि गले के सामने की एक छोटी ग्रंथि होती है जो शरीर की चयापचय प्रक्रिया (metabolism)को नियंत्रित करती है। थाइरोइड ग्रंथि उन हार्मोन्स का उत्पादन करती है जो इस बात का ध्यान रखते हैं कि सेल्स ऊर्जा को किस प्रकार खर्च करेंगे।

थ्रोइड की बीमारी तब होती है जब आपका इम्यून सिस्टम थाइरोइड ग्रंथियों के सेल्स पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देता है। इसके फलस्वरूप शरीर में या तो हॉर्मोन्स की संख्या काफी ज़्यादा हो जाती है, जिसे हाइपर थाइरॉइडिस्म कहते हैं, या फिर काफी कम हो जाती है, जिसे हाइपो थाइरॉइडिस्म कहा जाता है। कुछ महिलाओं को उनके गर्भवती होने से पहले थाइरोइड की समस्या होती है, वहीँ कई अन्य महिलाएं इसका अनुभव पहली बार गर्भावस्था के दौरान करती हैं।

गर्भावस्था की समस्याएं – हाइपो थाइरॉइडिस्म और गर्भावस्था (Hypothyroidism and Pregnancy)

माँ के गर्भ में रहने वाला भ्रूण गर्भावस्था के पहले कुछ महीनों में माँ के थाइरोइड हॉर्मोन्स पर काफी हद तक निर्भर रहता है। थाइरोइड हॉर्मोन्स मस्तिष्क के सही विकास में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हाइपो थाइरॉइडिस्म (Hypothyroidism)

गर्भावस्था के दौरान सेल्युलाईट से छुटकारा

इस स्थिति के होने पर गर्भ में पलने वाला बच्चा सही पोषण से वंचित रह जाता है। शोध में यह पाया गया है कि इस समस्या से ग्रस्त माओं से जन्म लेने वाले बच्चों का IQ काफी कमज़ोर होता है और उनका मानसिक या शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता है। इस बीमारी (garbhavastha ki samasya) की शिकार औरतों के हॉर्मोन्स बढ़ाने के सही इलाज के बाद पैदा होने वाले बच्चे स्वस्थ और सामान्य होते हैं। शरीर के रक्त में थाइरोइड हॉर्मोन का स्तर बढ़ाने के लिए हॉर्मोन रिप्लेसमेंट पिल्स दिए जाते हैं।

गर्भावस्था की समस्याएं – क्रोनिक लिम्फोसाइटिक थाइरोआइडिटिस (Chronic lymphocytic thyroiditis (CLT))

इस स्थिति के अंतर्गत इम्यून सिस्टम थाइरोइड ग्रंथियों पर हमला करता है और थाइरोइड की काम करने की क्षमता में बाधा डालता है। इस बीमारी से ग्रस्त महिलाओं में जन्म के समय मृत बच्चे की दुर्घटना और मिसकैरेज काफी ज़्यादा मात्रा में देखी जाती है।

पिछले कुछ सालों में गर्भावस्था के शुरूआती समय में महिलाओं की थाइरोइड क्रियाशीलता जानने के लिए कई टेस्ट किये गए हैं। सही समय पर हाइपो थाइरॉइडिस्म की जांच और उपचार कर लेने से इसके भ्रूण पर पड़ने वाले खराब असर को समाप्त किया जा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान हाइपो थाइरॉइडिस्म के लक्षण (Symptoms of hypothyroidism during pregnancy)

हाइपो थाइरॉइडिस्म के लक्षणों में मुख्य है थकान और वज़न का बढ़ना। ये दोनों लक्षण ही आम गर्भावस्था के लक्षण भी होते हैं, अतः कई लोग इन दोनों को लेकर भ्रमित रहते हैं। इसके अन्य लक्षण हैं कब्ज़, मांसपेशियों में दर्द, ध्यान लगाने में कठिनाई तथा ठन्डे तापमान के प्रति संवेदनशील होना।

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य – हाइपर थाइरॉइडिस्म और गर्भावस्था (Hyperthyroidism and pregnancy)

गर्भावस्था से जुड़े हुए बेहतरीन एप्स

स्वस्थ थाइरोइड ग्रन्थियां गर्भावस्था के दौरान सामान्य रूप से कार्य करती हैं। अगर हाइपर थाइरॉइडिस्म का सही समय पर इलाज नहीं करवाया गया तो इसके गर्भावस्था के समय काफी नुकसान हो सकते हैं। इसके होने के फलस्वरूप समय से पहले बच्चे का जन्म या फिर बच्चे का वज़न सामान्य से कम होने की समस्या भी आ सकती है। हाइपर थाइरॉइडिस्म के फलस्वरूप गर्भावस्था के समय आपका ब्लड प्रेशर भी काफी बढ़ जाता है। गंभीर हाइपर थाइरॉइडिस्म से गर्भधारण में मुश्किलें भी पैदा हो सकती हैं। इस बीमारी से ग्रस्त महिला को हमेशा डॉक्टर की जाँच के दायरे में रहना चाहिए।

प्रेगनेंसी में थायराइड की समस्या – गर्भावस्था के वक़्त हाइपर थाइरॉइडिस्म का उपचार (How to manage hyperthyroidism during pregnancy)

हाइपर थाइरॉइडिस्म का इलाज हर व्यक्ति का अलग रूप से होता है। सारे उपचारों का मुख्य लक्ष्य थाइरोइड हॉर्मोन के स्तर को सामान्य बनाए रखना है। गर्भावस्था के समय के दौरान हमेशा ही आपके थाइरोइड के स्तर की जांच होनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर उन एंटी थाइरोइड ड्रग्स का सेवन करें जिनका भ्रूण पर कोई बुरा प्रभाव न पड़ता हो। सर्जरी की सहायता से थाइरोइड के अति क्रियाशील नोड्युल को निकाला जा सकता है।

उन एंटी थाइरोइड दवाइयों को, जिनके सेवन से बच्चे के जन्म के समय कोई समस्या (pregnancy me hone wali proble) आ सकती है, पहली तिमाही में ही बंद कर दें तथा PTU की विधि से इलाज शुरू करें। इसके बाद दूसरी तिमाही की शुरुआत में मुख्य दवाई की दोबारा शुरुआत करें।

जिन महिलाओं को हाइपर थाइरॉइडिस्म की समस्या है, वे अच्छी देखभाल एवं इस रोग का सही इलाज करवाकर स्वस्थ गर्भावस्था का आनंद ले सकती हैं। थाइरोइड की जिन बीमारियों को बिना इलाज के छोड़ दिया जाता है, उनसे काफी समस्या हो सकती है,  पर सही देखभाल और उपचार से स्वस्थ बच्चे और स्वस्थ प्रक्रिया की इच्छा पूरी हो सकती है।

ज़्यादातर दवाइयाँ जिनका प्रयोग थाइरोइड की समस्या को दूर करने में किया जाता है, गर्भावस्था में लेने के लिए बिलकुल सुरक्षित होती हैं। पर इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि कौन सी दवा सुरक्षित है और कौन सी नहीं। इसके लिए आप अपने डॉक्टर से सलाह कर लें। ऐसे कई लोग हैं जो थाइरोइड की पूरी जांच करवाने के लिए काफी उत्सुक रहते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी इस प्रकार की जांच काफी आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं का इलाज करने में किसी भी प्रकार की चूक खतरे से खाली नहीं है। रोज़ाना की जांच काफी ज़रूरी है।

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य – हाइपर थाइरॉइडिस्म के लक्षण (Symptoms of Hyperthyroidism – garbhavastha me thyroid)

महिलाओं के लिए गर्भावस्था के उपयोगी नुस्खे

इसके लक्षण भी गर्भावस्था के आम लक्षणों जैसे ही हैं, जैसे दिल की धड़कनों का बढ़ना, थकान और गर्म तापमान के प्रति संवेदनशील होना। हाइपर थाइरॉइडिस्म के अन्य लक्षण हैं नर्वस रहना, दिल की धड़कनों में असमानता, मतली और उलटी, सोने में तकलीफ और वज़न का कम होना।

निष्कर्ष (Conclusion -Thyroid disease in pregnancy)

थाइरोइड की बीमारी माँ और बच्चे के लिए डिलीवरी से पहले और बाद में भी काफी खतरनाक होती है। थाइरोइड की बीमारी का इलाज न करवाने से भ्रूण पर तथा माँ के स्वास्थ्य पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। इसका असर गर्भावस्था के बाद भी रह सकता है और बच्चे के मस्तिष्क को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। गर्भावस्था के समय थाइरोइड हॉर्मोन्स की संख्या हमेशा ज़्यादा होनी चाहिए।

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