Tips in Hindi to take care during pregnancy for first trimester / first 3 months – पहली तिमाही के दौरान देखभाल के नुस्खे

गर्भावस्था की पहली तिमाही एक महिला के शरीर में कई अनदेखे और अद्भुत परिवर्तन ले आती है। इस समय शरीर के हॉर्मोन्स किसी भी प्रकार के परीक्षणों से गर्भावस्था की पुष्टि होने के पहले ही बच्चे को पोषण देने का काम करते हैं। पहली तिमाही के भावनात्मक और शारीरिक परिवर्तन आपको गर्भावस्था के अगले चरणों का सामना करने का आत्मविश्वास देते हैं।

पहली तिमाही के समय सामान्य शारीरिक समस्याएं (Common Physical Problems during first trimester of pregnancy and their cure)

गर्भवती होने के बाद मॉर्निंग सिकनेस (Morning sickness)

यह गर्भावस्था की स्थिति के शुरू होने के 3 हफ़्तों के अंदर दिन या रात कभी भी शुरू हो सकता है। इस समय मतली (nausea) शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ने की वजह से होती है और इसी की वजह से पेट धीरे धीरे खाली होता है। गर्भवती महिलाओं की कुछ स्थितियों जैसे खाना पकाने, परफ्यूम या धूम्रपान में सूंघने की क्षमता बढ़ जाती है। यह गर्भावस्था के शुरूआती भागों में मतली होने का एक अहम कारण हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए आहार

आप मतली को कम परिमाण में भोजन करके ठीक कर सकती हैं। जिन भोजनों में फैट कम होता है तथा पचने में आसानी होती है, वे मतली का निवारण करने में सक्षम होते हैं। तेज़ गंध वाले भोजनों से परहेज करें। काफी मात्रा में पानी तथा अन्य द्रव्य ग्रहण करें। अदरक का रस भी मतली को दूर करने का अच्छा उपाय है। अगर मतली काफी गंभीर स्थिति में है, पेशाब गहरे रंग का है, आपको खड़े होने पर चक्कर आते हैं या आपकी उलटी में खून आता है तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।

नरम और सूजे हुए स्तन (Tender, swollen breasts)

हॉर्मोन्स में हुए परिवर्तन की वजह से गर्भावस्था के कुछ ही दिनों में स्तनों के आकार में परिवर्तन आ जाता है। आपके स्तन इस समय नरम, सूजे हुए और जलन युक्त होते हैं तथा साथ ही काफी भारी और सुडौल भी हो जाते हैं। इस स्थिति से निपटने में एक सही साइज की ब्रा आपकी काफी मदद कर सकती है।

पेशाब करने की मात्रा में वृद्धि (Increased urination)

यह समस्या गर्भावस्था की पहली तिमाही में काफी आम है। इसका मुख्य कारण बढ़ते हुए गर्भाशय का ब्लैडर पर दबाव डालना होता है। इस समस्या के फलस्वरूप हँसते हुए, छींकते या खांसते हुए भी कई बार मूत्र निकल जाता है। रात में मूत्र को निकलने से रोकने के लिए रात को कैफीन का सेवन न करें। सबके सामने लीकेज की शर्मनाक समस्या से खुद को बचाने के लिए आप पैंटी लाइनर्स का प्रयोग कर सकती हैं।

गर्भवती होने के बाद थकान (Fatigue)

गर्भावस्था की पहली तिमाही में यही समस्या सबसे ज़्यादा परेशान करती है। थकान की समस्या को दूर करने के लिए जितना हो सके आराम करें। अपने भोजन में आयरन और प्रोटीन का पोषण शामिल करें। अपने रोज़ाना के रूटीन में शारीरिक गतिविधियों जैसे तेज़ चलने के लिए वक़्त निकालें।

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भोजन से रूचि या अरुचि (Food aversions or cravings)

ये भी गर्भावस्था की शुरुआत में काफी आम हैं। भोजन में रूचि या अरूचि की भावना शुरूआती तीन महीनों में काफी ज़्यादा रहती है क्योंकि इस दौरान हॉर्मोन्स में परिवर्तन भी काफी तेज़ी से होते हैं। ऐसे भोजन से दूर रहें जिनसे समस्या उत्पन्न हो।

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण है चक्कर आना (Dizziness)

ऐसा गर्भावस्था के समय इसलिए होता है क्योंकि रक्त की वाहिनियां डाइलेट हो जाती हैं और ब्लड प्रेशर गिर जाता है। हलके और गंभीर रूप से चक्कर आने की समस्या को दूर करने का एक बेहतरीन तरीका आराम करना है। अगर चक्कर गंभीर रूप से आया हो और साथ में पेट के दर्द तथा गुप्तांग से रक्त आने की समस्या भी हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह करें। ऐसा कई बार इसलिए होता है क्योंकि फर्टिलाइज़्ड अंडा गर्भाशय के बाहर रोपित हो जाता है जिसकी वजह से टिश्यू को निकालना भी पड़ सकता है।

सीने में जलन और कब्ज़ (Heartburn and constipation)

इसका अनुभव भी पहली तिमाही में ज़्यादातर महिलाएं करती हैं। इसका मुख्य कारण पाचन अंग में भोजन का धीरे धीरे आगे बढ़ना है। इससे भोजन को रक्त में घुलने तथा बच्चे तक पहुंचने में ज़्यादा समय लगता है। इस प्रक्रिया की वजह से ही कब्ज़ की समस्या होती है। सीने में जलन तब होती है जब पेट के एसिड्स ईसोफैगस में चले जाते हैं।

थोड़े थोड़े अंतराल पर भोजन करने से सीने में जलन की समस्या को कम किया जा सकता है। तला भोजन, कार्बोनेटेड पेय पदार्थ, साइट्रस फल और उनके रस तथा मसालेदार भोजन से परहेज करें कब्ज़ को दूर करने के लिए फाइबर युक्त भोजन करें और काफी मात्रा में द्रव्य ग्रहण करें। रोज़ाना कुछ शारीरिक कार्य करने से भी कब्ज़ की समस्या से निजात प्राप्त होगी।

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गर्भावस्था की पहली तिमाही में होने वाले भावनात्मक परिवर्तन (Common Emotional changes in the first trimester of pregnancy)

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण है भावनाएं (Emotions)

गर्भावस्था की स्थिति में पहुंचकर एक महिला काफी प्रसन्न, काफी बेचैन और काफी थकी हुई होती है। इस समय उसके जीवन में एक भावनात्मक तनाव सदा बना रहता है। उसके मन में कई चिंताएं लगी रहती हैं, जैसे अपने बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य को लेकर चिंता, माँ बनने को लेकर उत्साह और तनाव का मिश्रण तथा बच्चे के लालन पालन में होने वाली पैसे की दिक्कतें। अगर होने वाली माँ कामकाजी महिला हो तो उसके मन में एक अतिरिक्त चिंता यह लगी रहती है कि वह अपना काम कैसे जारी रखेगी तथा अपने बच्चे के पालन पोषण, घर की देखभाल करने तथा अपने काम को अच्छी तरह से करने की तिहरी ज़िम्मेदारी के साथ सामंजस्य कैसे बिठाएगी।

साथी के साथ सम्बन्ध (Relationship with partner se pregnancy me dekhbhal)

इस वक़्त अपने साथी के साथ निजी और कामुक वक्त बिताना महिला के लिए संभव नहीं हो पाता और वह कई अन्य परेशानियों में फंसी रहती है। लेकिन अच्छे से बातचीत तथा अपने मन की बातें साझा करके आप अपने रिश्ते में प्यार और कामुकता को जिंदा रखने में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आप दोनों के बीच की समस्या हद से आगे बढ़ जाए, इससे पहले इन सारी परेशानियों को लेकर अपने साथी के साथ एक सच्ची और ठोस बातचीत करें। अपने मन के संदेह तथा चिंताओं को अपने साथी के साथ बांटना तथा बच्चे के जन्म ले लेने के बाद जीवनशैली में परिवर्तन की बातें करना मन को काफी हल्का करता है एवं स्वास्थ्यकर साबित होता है।

तनाव के स्तर को नियंत्रित करने का प्रयास (Manage your stress levels)

गर्भावस्था के समय सुन्दर लगने के नुस्खे

जब एक महिला गर्भवती होती है तो उसे अपने खानपान तथा अपने बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य की काफी चिंता होने लगती है। गर्भधारण करने के बाद एक महिला की ज़िन्दगी बदल जाती है एवं उसके इर्द गिर्द भी कई प्रकार के परिवर्तन होते हैं। अगर इस समय उसे लगे कि तनाव और बेचैनी की वजह से उसके जीवन में बहुत सारी समस्याएं आ रही हैं तो उसे इन समस्याओं से लड़ने के लिए कमर कसकर तैयार होने की आवश्यकता है। गर्भावस्था के दौरान ज़्यादा मात्रा में तनाव लेने से प्री टर्म लेबर (preterm labor) या जन्म के समय बच्चे का वज़न सामान्य से कम होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

घर तथा दफ्तर में अपने तनाव के स्तर को नियंत्रित करने का प्रयास करें। हर काम को धीरे एवं सोच समझकर करने की आदत डालें तथा इस विषय में अपने परिवारजनों, अपने साथी तथा दोस्तों को आपकी मदद करने के लिए कहें। हर काम को खुद से करने की आदत छोड़ने की कोशिश करें। मन को सुकून देने वाली कुछ तकनीकों का अभ्यास करें एवं लम्बी सांसें लेने, योग करने तथा स्ट्रेचिंग (stretching) की प्रक्रिया भी नियमित रूप से करें।

गर्भवती महिला की देखभाल में पहली तिमाही की गर्भावस्था के लिए कुछ नुस्खे (Tips during first trimester of pregnancy se garbhavastha ki dekhbhal)

  • खुद के द्वारा सेवन किये गए हर खाद्य पदार्थ से पर्याप्त मात्रा में कैलोरीज (calories) लें, लेकिन वसा से परहेज़ करें। अपने भोजन में कई खाने की वस्तुएं जैसे साबुत अनाज, दालें, फलीदार सब्जियां और नट्स (nuts)। इसके अलावा मांस, अंडे, मछली तथा पोल्ट्री (poultry) उत्पादों का सेवन करें, क्योंकि ये प्रोटीन (protein) से भरपूर होते हैं।
  • अपने खानपान में कैल्शियम (calcium) अवश्य शामिल करें। दूध और अन्य उत्पाद कैल्शियम से भरपूर होते हैं। हर दिन की अपनी कैल्शियम की ज़रुरत पूरी करने के लिए आपके लिए 600 मिलीलीटर दूध या अन्य दुग्ध उत्पादों का सेवन करना काफी आवश्यक है।

गर्भपात के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं?

  • विटामिन डी (vitamin D) भीएक प्रमुख तत्व है जो आपके भोजन में मौजूद रहना चाहिए। अंडे का पीला भाग, हेरिंग, सारडाइन्स, सालमन, फिश लिवर ऑइल, टूना (herring, sardines, salmon, fish liver oil, tuna) आदि विटामिन डी का काफी अच्छा स्त्रोत होते हैं।
  • ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega – 3 fatty acid) आपके बच्चे के मस्तिष्क के विकास में काफी सहायक होता है, अतः अपने खानपान में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा को बढ़ाएं। यह आपकी नसों एवं आँखों की कार्यशीलता को बढ़ाने में भी काफी मददगार सिद्ध होता है।
  • तरल पदार्थ का ज़्यादा सेवन करने की आदत डालें। गर्भावस्था के दौरान रक्त का घनत्व बढ़ना चाहिए, जिससे कि माँ और बच्चे दोनों की ऑक्सीजन (oxygen) एवं अन्य पोषक पदार्थों की ज़रूरतें पूरी की जा सकें।
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