Hindi tips for pregnant women get some sleep – गर्भवती महिलाओं को नींद लाने में सहायता करने के लिए कुछ तरीके

जब आप गर्भवती होती हैं तो आपको अपनी दैनिक जीवनशैली में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा देखभाल की आवशयकता होती है। इन दिनों में देर रात तक जगना जीवन का अंग बन जाता है। काम का दबाव और पार्टियां आपको जगा सकते है अगर आपको अनिद्रा नही है। लेकिन अगर आप गर्भवती हैं तो आपके शरीर और भ्रूण के लिये आराम बहुत ही आवश्यक है। गर्भावस्था (garbhavastha ki dekhbhal) के कारण कई असुविधायें भी होती हैं। ये असुविधायें आपको देर रात तक जगाये रख सकती हैं। ये आपके आराम में नहीं होना चाहिये। इसलिये, आपको कुछ ऐसे तरीके चाहिये जिससे कि असुविधा होने के बावजूद भी आपको नींद आये।

बिस्तर पर रहने का समय निश्चित करें (Maintain fixed bed times)

अनियमित नींद की दिनचर्या के कारण हमारे शरीर की जैविक घड़ी हमें रात में भी सोने नहीं देती है। लेकिन जब आप गर्भवती होती है तो आपको नींद चाहिये। इसलिये आपको अपनी जैविक घड़ी सही करना चाहिये। इसका सबसे सही तरीका बिस्तर पर जाने के समय को नियत करना है। यह अटपटा लग सकता है लेकिन बिस्तर पर जाने का समय नियत करना सुनिश्चित करता है कि आपका शरीर आराम चाहता है जो आप रात में देते हैं। अगर अपने बिस्तर पर जाने के समय द्वारा नींद को प्रबंधित करते है तो गर्भावस्था के दौरान आपको अनिद्रा के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

गर्भवती महिला की देखभाल में व्हाइट न्वायज़ मशीन लें (Get a white noise machine)

गर्भावस्था के दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याए

शांति एक अच्छा तरीका नहीं हो सकता है जब आप असहज हों और सोना चाहते हों। शांति काफी निराशाजनक हो सकती है। सुखदायक आवाज़ें आपके दिमाग को आराम पहुंचाने के लिये अच्छी हो सकती हैं और आपको सुला सकती है। बाज़ार में कई तरह की व्हाइट न्वायज़ मशीने उपलब्ध हैं। इन मशीनों का उपयोग गर्भावस्था पर कोई प्रभाव नहीं डालता है। इसलिये गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद अपनी नींद के  लिये व्हाइट न्वायज़ मशीन को लें।

गर्भवती होने के बाद सहज रहें (Get comfy hai pregnancy me dekhbhal)

जब आप अपनी गर्भावस्था के दौरान सोने के लिए प्रयास करते हैं तो उस समय आप बहुत सहज महसूस नहीं हो सकती है। इसलिये आप वो सब करने की कोशिश करती हैं जिससे आप को महसूस होता है कि आप सहज हो पायेंगी। पहली चीज़ जो आप कर सकती है वो है ढ़ीला पायज़ामा पहनना। ढ़ीला सूती पायज़ामा आपको बहुत आराम की अनुभूति देगा जब आप सोने के लिये संघर्ष कर रही हैं। साफ चादरें बहुत महत्व रखती है जब आप गर्भवती और असहज हैं। साफ सफेद चादर सबसे अच्छी मानी जाती है जब आप सोने का निर्णय करती है। अपने चारों ओर नर्म और कोमल तकियों को रखें। तकियों की मुलायमियत आपको बादलों में रहने का एहसास देगी। जिस बिस्तर पर लेटती है उसे बहुत अधिक मुलायम या कड़ा नहीं होना चाहिये। सही और आरामदायक बिस्तर भी महत्वपूर्ण है। इसलिये अपने बिस्तर को अच्छा बनायें और आरामदायक कपड़े पहनें जब आप सोने जा रहे हैं।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में तापमान मायने रखता है (Temperature counts)

जब आप पहले से ही असहज महसूस कर रहे हैं तब आपको बहुत गर्म या बहुत ठंडे कमरे की इच्छा नहीं हो सकती है। बिस्तर समय के दौरान थर्मोस्टैट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप आसानी से अपनी पसंद के हिसाब से तापमान को समायोजित कर सकती हैं। अगर आप अपने चारों तरफ कई तकियों और चादर के साथ सोने की योजना बना रही हैं तो आपको आराम से सोने के लिए एक ठंडे कमरे की जरूरत हो सकती है। ठीक उसी वक्त अगर कमरा बहुत ठंडा है तो आप बीमार हो सकती हैं। इसलिये आपके बिस्तर वाला कमरा सही तापमान पर होना चाहिये अगर आप आराम से सोना चाहती हैं।

गर्भावस्था के दौरान आने वाले विभिन्न सपने

वेदना और दर्द (Aches and pains)

कई बार गर्भावस्था में महिलाओं को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि वे सोने के लिए सही मुद्रा तय नहीं कर पाती। इस स्थिति में पीठ के बल सोना उचित नहीं होता। जब आप पीठ के बल सोती हैं तो आपके बढ़ते गर्भाशय का भार आपके वेना केवा (vena cava) पर दबाव डालता है और रक्त के संचार में काफी बाधा उत्पन्न करता है। आपके बच्चे का बढ़ता वज़न और हॉर्मोन (hormones) में परिवर्तन होने से आपकी मांसपेशियां और लिगामेंट्स (ligaments) भी कमज़ोर होने लगते हैं। बायीं तरफ करवट लेकर सोने से आपका रक्त संचार सुचारू रूप से चलता है और यह आपके बच्चे के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। तकियों का प्रयोग, खासकर घुटनों तथा पेट के नीचे और पीठ के पीछे ना करें, क्योंकि इससे रक्त के संचार में काफी बाधा पहुँचती है।

पैरों में मरोड़ (Leg cramps)

दिन के समय या कम से कम रात के दौरान पैरों में मरोड़ें उठना गर्भवती महिलाओं के लिए काफी सामान्य बात होती है। एक गणना के अनुसार पैरों में ये मरोड़ें शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम (calcium and magnesium) की मात्रा कम होने की वजह से होती हैं। अतः अगर आप अपने खानपान में परिवर्तन लाकर खनिज पदार्थों का सेवन करें तो इससे आपको काफी फायदा होगा। काफी मात्रा में पानी पियें, पैरों में सहारे के लिए होज़ (hose) पहनें और पैरों को लंबा करें। जब भी आपके पैरों में मरोड़ें उठें तो इन्हें लंबा करने की कोशिश करें। इसके बाद पैरों को लचीला करके इधर उधर घुमाएं। ठंडी सतह पर कोई काम करने के लिए खड़े रहने से भी पैरों की मरोड़ों पर प्रभाव पड़ता है। अपने डॉक्टर से भी इन मरोड़ों की जांच करवाएं।

बार बार मूत्र आना (Frequent urination)

आपके गर्भाशय के बढ़ते आकार की वजह से आपका मूत्राशय छोटा हो जाता है। सोने से 1 या 2 घंटे से पहले के समय में जितना हो सके कम पानी पियें। ऐसा ना करने पर रात को आपकी नींद खराब होगी। आपको बार बार बाथरूम (bathroom) के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ेगा। इससे आपकी नींद कम हो जाएगी और पर्याप्त मात्रा में नींद ना लेने के फलस्वरूप कई प्रकार की समस्याएं पेश आ सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान परहेज करने वाले भोजन और पेय पदार्थ

बदहज़मी या छाती का जलना (Indigestion or heartburn)

ऐसे ठोस भोजनों से परहेज करें जो वसा से युक्त हों, क्योंकि आपको इन्हें हज़म करने में काफी परेशानी आएगी। अपने पेट को कष्ट देना बंद करें और तीन बार ज़्यादा खाने की अपेक्षा बार बार और थोड़ा थोड़ा खाएं। सोने से कम से कम 3 या 4 घंटे पहले भोजन कर लें और भोजन करने के बाद सीधे बैठें। साइट्रस (citrus), मसाले, तले हुए भोजन और चॉकलेट (chocolate) से परहेज करें, क्योंकि इससे आपके इसोफेगस (esophagus) को काफी नुकसान पहुँच सकता है। हाज़मा सही करने के लिए भोजन के बाद आप एक एंटासिड टेबलेट (antacid tablet) भी ग्रहण कर सकते हैं।

नींद ना आना (Insomnia)

हॉर्मोन्स (hormones) में परिवर्तन, तनाव, अतिरिक्त रूप से नींद ले लेने आदि से गर्भावस्था के दौरान नींद ना आने की समस्या हो जाती है। यह वैसे तो काफी सामान्य और परेशानी भरा है, पर अगर इसे बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो इससे प्रसवोत्तर तनाव (postpartum depression) भी हो सकता है। सोने से पहले गर्म पानी से स्नान करने की कोशिश करें और सुकून प्राप्त करने की कुछ विधियों को अपनाएं। दिन के समय व्यायाम करने से आपको रात के समय काफी अच्छी नींद आती है। ज़्यादा तनाव ना लें, घड़ी की ओर ना देखें और सिर्फ आँखें बंद करके  अपनी सांस लेने की गति पर ध्यान दें।

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