Phytoestrogen rich foods – फाइटोएस्ट्रोजन युक्त खाद्य पदार्थ

बचपन में एक समय ऐसा था जब हम जो भी खाते थे उसे हज़म कर लेते थे। हमारे पूर्वजों के समय अनाज बेहतर हुआ करता था। वर्तमान समय में वातावरण को काफी क्षति पहुंची है, अतः खाद्य पदार्थ भी पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान नहीं करते। स्वास्थ्य एवं पोषण के बीच सीधा सम्बन्ध है।  इस लिहाज से फाइटोएस्ट्रोजन्स पोषण युक्त बायो एक्टिव मॉलिक्यूल्स (bio-active molecules) के रूप में कई सामान्य सब्जियों में मौजूद होते हैं। ये नाशपाती एवं आलूबुखारा जैसे फलों एवं बंदगोभी तथा स्प्राउट्स (sprouts) जैसी सब्जियों में पाए जाते हैं। फाइटोएस्ट्रोजन्स कोशिकाओं में एंटी-एस्ट्रोजेनिक (anti-estrogenic) या एस्ट्रोजेनिक प्रतिक्रया उत्पन्न करने में सहायता करते हैं क्योंकि ये एस्ट्रोजन के रिसेप्टर्स (receptors) से जुड़ने की क्षमता रखते हैं।

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  • सोयाबीन, कई जड़ीबूटियों एवं नट्स (nuts) में भी फाइटोएस्ट्रोजन्स पाया जाता है। प्रसिद्ध शोध तथ्यों की मानें तो रजोनिवृत्ति के समय को पीछे करना इसके बड़े फायदों में से एक है। ऐसा पाया गया कि किण्वित सोया को अपने खानपान में शामिल करने से रजोनिवृत्ति के हॉट फ़्लैशेस (hot flashes) काफी कम होते हैं। यह प्रेमारिन (premarin) जैसी औषधियों के माध्यम से हॉर्मोन थेरेपी (hormone therapy) से बेहतर उपचार प्रदान करता है।
  • इसके अलावा ब्लैक कोहोश (Black Cohosh) मासिक धर्म के समय काफी राहत प्रदान करता है एवं मासिक चक्र आधारित समस्याओं के उपचार में प्रयोग किया जाता है। प्रमुख फाइटोनुट्रिएंट्स (phytonutrients), जिनके कई अच्छे गुणों का अध्ययन किया गया है, लिग्नन एवं आइसोफ्लावोनोइड्स (lignans and isoflavonoids) हैं। जेनीस्टीन एवं डेडजीन (Genistein and daidzien) आइसोफ्लावोनोइड्स के प्रकार हैं जो सोयाबीन में एवं लिग्नन पटसन के बीज तथा नट्स में पाया जाता है।
  • फाइटोकेमिकल्स या पोलीफेनोल्स (Phytochemicals or polyphenols) फाइटोएस्ट्रोजन के सामान्यतः पाए जाने वाले स्वरुप हैं। पौधों में पोलीफेनोल्स बैक्टीरिया, फंगस (bacteria, fungi) आदि से पौधों की रक्षा करने में मदद करते हैं, तथा पौधों या इसके फूलों के रंग तय करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले माने जाते हैं। फ्लावोनोइड्स भी एक तरह के फाइटोकेमिकल्स होते हैं एवं फ्लैवोनोंस, एंटोसाइनाइडिंस तथा फ्लैवोन्स (flavanones, antocyanidins and flavones) प्रदान करते हैं।
  • सोया आधारित खाद्य पदार्थ एवं फलियों में काफी मात्रा में आइसोफ्लावोनोइड्स होते हैं। बड़े शोधों के मुताबिक़ फ्लावोनोइड्स में एंटी एलर्जिक एवं एंटी कार्सिनोजेनिक (anti-allergic and anti-carcinogenic) गुण होते हैं। लिग्नन भी एक प्रकार के फाइटोएस्ट्रोजन होते हैं जो मुख्य रूप से पटसन के बीज, सब्जियों, फलियों एवं अनाज में पाए जाते हैं। शोधों से पता चला है कि मांसाहारी खानपान की बजाय शाकाहारी खानपान पर निर्भर रहने से लिग्नन अधिक मात्रा में उत्पादित होता है।  कुमेस्टांस (Coumestans) एक प्रकार के फाइटोएस्ट्रोजन्स होते हैं एवं मुख्य रूप से फलियों में पाए जाते हैं।
  • फाइटो नुट्रिएंट्स कई प्रकार की जड़ीबूटियों में बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ पौधे हैं अल्फाल्फा (alfalfa), मुलैठी, कोरियाई जिनसेंग (Korean ginseng) एवं काला कोहोश। फाइटोएस्ट्रोजन मेक्सिकन वाइल्ड याम (Mexican wild yam) में मौजूद नहीं होते हैं, हालांकि इसमें मौजूद फाइटोनुट्रिएंट महिलाओं की ग्रंथीय प्रणाली के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। यह मूल रूप से महिलाओं की प्रजनन प्रणाली सुचारू बनाते हैं। ये तंत्रिका एवं मूत्र प्रणालियों पर भी काफी गहरा प्रभाव छोड़ते हैं।
  • फाइटोएस्ट्रोजन्स जानलेवा बीमारियों जैसे कैंसर (cancer) की भविष्य में होने की संभावनाएं कम करते हैं। यह कोशिकाओं की बढ़त, प्रोटीन (protein) मिश्रण एवं इंट्रासेलुलर एंजाइम (intracellular enzymes) पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। शोध के अनुसार यह उन महिलाओं में कैंसर की संभावनाओं को 54% तक कम करता है, जो फाइटोनुट्रिएंट्स से भरपूर भोजन करती हैं एवं यह अन्तर्गर्भाशयकला (endometrial) कैंसर से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
  • फाइटोएस्ट्रोजन्स आपका वज़न कम करने में भी काफी सहायता करते हैं। प्रसिद्ध अध्ययनों एवं शोधों के अनुसार यह मोटापे को नियंत्रित करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  ऐसे भी कई शोध हैं जो दिखाते हैं कि फाइटोएस्ट्रोजन्स आपकी कामेच्छा में भी वृद्धि करते हैं। उदाहरणस्वरुप बियर एवं बूरबॉन (beer and bourbon) में मौजूद फाइटोएस्ट्रोजन्स आपकी काम वासना बढ़ाने में काफी मदद करते हैं।
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