Why babies cry and how to soothe them – शिशुओं के रोने के कारण और उन्हें चुप कराने के उपाय

बच्चे भूख लगने या नींद आने की स्थिति दर्शाने के लिए या डर और दर्द का अनुभव करवाने के लिए रोते हैं। शुरुआत में बच्चे की मनोदशा को समझना बहुत कठिनाई का कार्य होता है परन्तु समय के साथ माता पिता बच्चे के रोने के अंदाज़ से उसके मन का भाव जान लेते हैं। कुछ बच्चे रौशनी, आवाज़ और कई अन्य चीज़ों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होते हैं। अगर बच्चा 6 हफ़्तों तक दिन में 3 घंटे रोता है तो ठीक है। 3 महीने का होते होते वह दिन में 1 ही घंटा रोता है।

कब कब रोते हैं बच्चे – बच्चों के रोने के प्रमुख कारण (Some common reasons why babies cry – babies ke rone ka karan)

1. भूख लगने से बच्चे रोते हैं। वे आमतौर पर रोने के साथ परेशान करते हैं, होंठ चटकाते हैं, हाथ मुंह में देते हैं और माँ की उंगलियां चूसने का प्रयास करते हैं।

2. बच्चे अपना गन्दा डायपर सहन नहीं कर सकते, अतः अगर उसे भूख नहीं लगी है तो गन्दा डायपर भी रोने का कारण हो सकता है।

3. बच्चों का रोना, अगर बच्चा थका हो और उसे नींद आ रही हो तो वह कभी भी और कहीं भी आँखें मलते हुए रोता है।

4. कभी कभी बच्चे दुलार की आशा में रोते हैं। उन्हें खुद का गोद में उठाया जाना, आवाज़ें सुनना तथा खुद की धड़कन महसूस करने का शौक होता है।

5. बच्चों के रोने के कारण, बच्चा पेट की गड़बड़ी जैसे गैस की वजह से भी रो सकता है। यह दर्द पेट के फ्लू, दूध से एलर्जी, कब्ज़ और आँतों में कुछ अटकने से होता है।

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6. जब बच्चे खाना खाने के बाद रोते हैं तो उन्हें सिर्फ एक डकार की आवश्यकता होती है। आमतौर पर बच्चे स्तनपान या बोतल से दूध पीते हुए हवा निगल लेते हैं जिससे उन्हें परेशानी होती है।

7. बच्चों के रोने के कारण, नैप्पी या कपडे बदलने के दौरान ठण्ड लगने पर भी बच्चे रोते हैं।

8. बच्चे छोटी चीज़ों जैसे बालों में पड़ी गाँठ, तंग कपडे या माँ की उँगलियों या कपड़ों से हो रहे दर्द के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं।

9. बच्चों के रोने के कारण, नए दांत मुंह में आने से दर्द होता है अतः ऐसी स्थिति में भी बच्चे रोते हैं।

10. बच्चे के रोने, कभी कभी बच्चे अतिरिक्त रौशनी, शोर या एक गोद से दूसरे में जाना पसंद नहीं करते। ऐसा होने पर वे रोते हैं।

11. कभी कभी बाहर घूमने की इच्छा होने पर भी ये बच्चे रो (bacche kyu rote hai) देते हैं।

बच्चे को चुप कराने के उपाय (Ways to soothe a crying baby)

1. बच्चे को उठाकर अपने पास लाने से वह कुछ देर के लिए रोना बंद कर देता है।

2. बच्चे को चादर में लपेटकर उसे घुमाने से भी उसे काफी ख़ुशी मिलती है।

3. किसी बच्चे को हाथ से गर्भ बनाकर या चादर में लपेटकर दुलार करने से भी वह चुप हो जाता है।

4. बच्चों का रोना, अगर बच्चे को कई बार पीठ की जगह पेट के बल से पकड़ने पर उन्हें संतुष्टि मिलती है और वे नहीं रोते।

5. बच्चों का रोना, खिलौनों या फर्नीचर की मदद से या फिर सीधे मुंह से ही आवाज़ें निकालने पर बच्चे का ध्यान आकर्षित होता है।

6. बच्चे के गाल, हाथ, पीठ, पेट, पैर और चेहरे को हाथ से सहलाने पर भी बच्चे खुश होते हैं और रोना बंद कर देते हैं।

7. माँ की आवाज़ सुनकर बच्चे प्रसन्न हो जाते हैं अतः हमेशा अपने बच्चे से बात करते रहें।

8. बच्चे को प्यारी और धीमी लोरी सुनाने से वह कुछ ही देर में शांत हो जाता है।

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9. गाडी चलाते समय एक तरह की मुद्रा और शोर होता है जिससे बच्चे शांत हो जाते हैं। अगर ड्राइविंग संभव नहीं है तो हलकी आवाज़ के साथ उसे हिलाना या उछालना उसके लिए शांति का सबब बन सकता है।

10. बच्चे के साथ गीले होने पर भी बच्चे खुश रहते हैं क्योंकि उन्हें बहते पानी की आवाज़ पसंद होती है।

11. बच्चे को किसी नए खिलौने से या आईने के सामने खड़े होकर शांत करने का प्रयास करें।

12. बच्चे को शांत कराने से पहले खुद शांत रहे। अगर माँ भी चिड़चिड़ी और खीजी हुई हो तो इसका सीधा असर बच्चे पर पड़ता है और वह और ज़्यादा रोना प्रारम्भ कर देता है।

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