Hindi tips for Amoebiasis – अमीबारुग्णता का घर में कैसे इलाज करें? अमीबारुग्णता के लक्षण और कारण

आतों में अधिकतम परजीवी संक्रमण पाया जाता है जो एंटामोएबा ह्यस्टोलीटिका के कारण होता है। इसे आम भाषा में  अमीबारुग्णता कहा जाता है। यह उन जगहों पर ज्यादा होती है जहाँ ठीक से साफ़ सफाई न हो या भरपूर भोजन पानी न मिलता हो। संक्रमण की जगहों पर  अमीबारुग्णता होने का अधिक खतरा होता है। यह बीमारी पर्जीविओं के वजह से होती है। इसीलिए साफ़ और स्वच्छ रहने का सुझाव दिया जाता है जिससे आपको अमीबारुग्णता का खतरा न हो।

अमीबारुग्णता के कारण (Amoebiasis ke karan)

एक बार अगर आप कीटाणुओं के संपर्क में आगये तो आपको अमीबारुग्णता होना संभव हो जाता है। यह एक तरीके का संक्रमण है जो खाने और पानी की गंदगी से फैलता है। यह अविकसित जगहों पर ज़्यादा फैलता है।

अमीबारुग्णता आसपास के दूषित पर्यावरण के कारण भी हो सकती है। जो ख़राब पानी या भोजन का सेवन आप कर रहे हैं वह इसका कारण बन सकता है। कई फैक्ट्रियों में जहाँ मज़दूर अस्वच्छ जगहों में काम करते हैं, वहाँ इसके होने का खतरा बढ़ जाता है।

अगर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर है तो आपको इसके होने का खतरा अधिक हो जाता है। प्रतिरक्षा प्रणाली उन लोगों की कमज़ोर होती है जो किसी बीमारी का शिकार हैं। गर्भवती महिला को भी इसका अधिक खतरा होता है। इसके कुछ अन्य कारण इस प्रकार हैं:

वेरीकोज नसों का कारण क्या हैं?

  • अस्वच्छ पर्यावरण
  • आसपास फैली गंदगी
  • भोजन में संदूषण
  • भोजन में कीटाणुओं का होना
  • आतों पर पर्जीविओं का आक्रमण

अमीबारुग्णता के लक्षण (Symptoms of Amoebiasis)

अमीबारुग्णता का शिकार होने के लिए किसी उम्र का होना ज़रूरी नहीं है। किन्तु शोध के अनुसार, कई बचे जो किशोर अवस्था में हैं या छोटे हैं इस बीमारी से ग्रसित हैं। विकसित प्रदेशों से ज़्यादा कम विकसित देशों में यह बिमारी पायी जाती है। चूँकि अविकसित देशों में स्वछता कम होती है तो यह बीमारी ज्यादा फैलती है।

इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं (The symptoms of Amoebiasis are as follows)

रक्त मल (Blood stools)

अगर आपको मल में रक्त निकलता हो तो आपको समझ जाना चाहिए की यह बीमारी आपको हो चुकी है। दिन में 10 बार से अधिक रक्त मल होने का मतलब यह है कि आपको अमीबारुग्णता हो चुकी है।

उल्टियाँ (Vomiting)

अगर आंत और पेट में आपको संक्रमण है तो यह समझ जाना चाहिए कि आपको यह समस्या है।

डायरिया (Diarrhea)

अमीबारुग्णता होने का एक लक्षण डायरिया भी हो सकता है।

माइग्रेन का इलाज या आधा सिर दर्द हेतु प्राकृतिक घरेलु नुस्खे

अमीबारुग्णता के लक्षण – अमीबारुग्णता के अन्य लक्षण भी हैं, जैसे: (Other symptoms of Amoebiasis include)

  • पेट दर्द
  • जी मचलना
  • पेट फूलना
  • दस्त
  • बुखार
  • वजन का एकदम घटना
  • मरोड़ें आना
  • भूख न लगना
  • थकान

घरेलू नुस्खे (Home treatments for Amoebiasis)

डॉक्टर अमीबारुग्णता कि जांच के लिए खून या मल का टेस्ट कराने कि सलाह देते हैं। अगर सफ़ेद कोशिकाओं में बढ़ोतरी होती है ई एस आर कि मात्रा भी बढ़ जाती है। इससे शरीर गरम होने लगता है। अमीबारुग्णता के होने के आसार ऐसे में बढ़ जाते हैं।

घरेलू नुस्खे कुछ इस प्रकार हैं:

सुरजना फली (Drumsticks)

450 ग्रा. सुरजन कि फली लें और इसका रस निकाल लें। इसमें कुछ बूँद सेसम के तेल की डालें और गरम होने रख दें। इसे दो से तीन हफ्ते तक पिए।

मूत्र मार्ग के संक्रमण हेतु घरेलू नुस्खे

बेल (Bael)

बेल में कई एंटी बैक्टीरियल तत्व होतें है। चूँकि इसमें प्राकृतिक एसिड होता है यह शरीर के कीटाणुओं को खत्म करने में उपयोगी है। अमीबारुग्णता के उपचार के लिए यह एकदम सही घरेलु नुस्खा है।

जाम (Guava)

जाम में कई तरीके के स्वस्थ के लिए लाभ मौजूद होते हैं। अमीबारुग्णता को ठीक करने हेतु भी इसे उपयोग में लिया जा सकता है। इसके कुछ बीज लें और उन्हें पीस लें। यह दिन में दो बार लेने से लाभ प्राप्त होगा।

ब्लैक टी (Black tea)

बिना शक्कर की ब्लैक टी में कई एंटी टॉक्सिक और एंटी पेरसिटिक तत्व होते हैं। यह पेट सम्बन्धी समस्याओं का इलाज करता है अगर रोज़ इसका सेवन किया जाए तो।

मार्गोसा की पत्तियां (Margosa leaves)

आपको हल्दी और सूखी मार्गोसा की पत्तियां लेना है और इसमें सरसों का तेल मिलाना है। इसे अपने शरीर पर मल लें और एक घंटे तक रहने दे। इसके बाद हलके गरम पानी से नाह लें। इसके एंटी बायोटिक गुण आपको बिमारी से बचाएगे।

अखरोट (Apricot)

अखरोट की पत्तियों में एंटी टॉक्सिक तत्व होते हैं। इसकी पत्तियों को धोने के बाद इनका रस निचोड़ लें। इसे संक्रमित जगह पर लगाएं। ऐसा करना लाभदायक होगा। सोने के पहले इसे दिन में एक बार ज़रूर अपनाये।

loading...