Home remedies to treat the irritable bowel syndrome – इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम के बारे में जानकारी और प्राकृतिक उपाय

इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome) एक ऐसी स्थिति है जिसमें भोजन बड़ी आंत से बहुत धीरे या बहुत तेजी से होकर गुजरता है. बड़ी आंत को प्रभावित करने के साथ साथ यह पेट में मरोड़, गैस, कब्ज, दस्त और सूजन जैसी समस्याओं को भी दर्शाता है. वैसे इस समस्या से आँतों को कोई बड़ा या स्थाई नुकसान नहीं होता लेकिन फिर भी इसकी वजह से पेट से जुडी कुछ समस्याएँ पैदा हो जाती हैं और छोटे मोटे तरीके से दिक्कतें उत्पन्न करती हैं.

इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) की समस्या को कुछ घरेलू तरीकों से संभाला जा सकता है, इसके लिए निम्न प्राकृतिक उपाय घर पर किये जा सकते है, इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम एक पुरानी और लम्बे समय तक चलने वाली समस्या है जिसे इन घरेलू उपायों से ठीक किया जा सकता है.

इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम के घरेलू नुस्खे हिंदी में (Irritable bowel syndrome home remedies in Hindi)

अलसी (FlaxSeeds)                                                                                    

अलसी में फाइबर की बेहतर मात्रा होने से ये पाचन के लिए बहुत अच्छा होता है जो पेट में जमा अपशिष्ट पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करता है. इसके साथ अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड भी पाए जाते हैं जो पाचन के लिए बेहतरीन माने जाते हैं और पाचन क्रिया को मजबूती भी प्रदान करते हैं. अगर लम्बे समय से कब्ज या डायरिया की शिकायत बनी हुई है तो ऐसे में अलसी के बीज बहुत लाभकारी परिणाम देते हैं. अलसी का सेवन करने के लिए इसके बीजों को पीसकर पाउडर बना लें और पानी के साथ नियमित रूप से इसका सेवन करें.

अदरक (Ginger)

अदरक पेट की सूजन और गैस आदि को कम करने में मदद करता है. आँतों की मांसपेशियों को जलन और दर्द से राहत मिलती है. इसके लिए आधे चम्मच पिसे हुए अदरक को एक कप गर्म पानी में डालकर 10 मिनट ऐसे ही रहने दें, इसके बाद पानी को छान कर शहद मिलाकर चाय के बदले दिन में 2 से 3 बार पीएं.

पुदीना (Mint)

हमारे आस पास ऐसे कई औषधिय पौधे हैं जो शरीर को लाभ प्रदान करते हैं उनमें से एक है पुदीना. इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों के लिए पुदीना एक बेहतरीन इलाज है. यह पेट में गैस, बदहजमी को ठीक करने में मदद करता है और आँतों को भी राहत और मजबूती देता है.

दही (Yogurt)

दही का प्रयोग किसी भी तरह से पेट के लिए बहुत अच्छा होता है यह पाचन को सरल बनाता है और बदहजमी आदि से शरीर का मुकाबला करता है. इसमें लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो शरीर के टोक्सिन को बहार निकालने का काम करता है. आप दही का सद=सेवन कई तरह से भोजन के साथ कर सकती हैं जो स्वाद को भी बढाने का काम करता है. अगर आप कब्ज के लिए इसबगुल का प्रयोग करती हैं तो दही में इसबगुल मिलाकर पिया जा सकता है.

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एक्युपंचर (Acupuncture)

एक्युपंचर एक बहुत ही प्रभावी थेरेपी है जो इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम में बहुत लाभकारी परिणाम देती है. इसके प्रयोग से आँतों की मांसपेशियों को आराम दिया जाता है जिसकी वजह से दर्द और सूजन आदि में लाभ होता है.

सौंफ (Fennel seeds)

सौंफ का प्रयोग खाने के साथ पेट की कई बिमारियों को दूर रख सकता है. सौंफ का पाचन क्रिया में बहुत योगदान है तभी तो अक्सर भोजन के बाद सौंफ खाने का रिवाज हमारे देश में प्रचलित है. 1 चम्मच सौंफ को कूट कर चूरा कर लें, इसे एक कप गर्म पानी में आधे घंटे रखने के बाद पी लें, इस पानी को दिन में 2 से 3 बार पीने से इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) की समस्या ठीक हो सकती है.

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