How to treat depression after stroke – मस्तिष्क के दौरे के बाद डिप्रेशन का इलाज कैसे करें

मस्तिष्क के दौरे (stroke) के बाद मरीज में अलग प्रकार के डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देते है। चिडचिडाहट, घुसा, डर, दुःख, निराशा और लाचारी, यह सब सामान्य लक्षण है जो स्ट्रोक (stroke) से बचे व्यक्ति अनुभव करते है। रिसर्च के अनुसार, एक तिहाई से ज्यादा लोग जो स्ट्रोक से बच गए हो वे डिप्रेशन का शिकार हो जाते है, और ज्यादा से 70% लोग इनका इलाज नहीं करवाते।

स्ट्रोक के बाद डिप्रेशन एक सामान्य सा दौरा है जो सही दवा, थेरेपी और लाइफ स्टाइल के बदलाव से सुधर सकता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है की शुरू से ही स्ट्रोक से बचे व्यक्ति का ख़ास ध्यान रखा जाए और उनके जीवन के साथ कोई जोखिम ना लिया जाए।

पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन (Post stroke depression)

पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन में व्यक्ति अपने आप को लाचार और व्यर्थ समझने लगता है, जिस से स्ट्रोक से बचे व्यक्ति का मूड और जीवन दोनों बेकार होने लगते है। पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन का सही से इलाज करने से स्ट्रोक से बचे मरीज के जीवन को सुधार भी सकते है और साथ ही उनके इस सुधरने में सहायक भी हो सकता है। अगर आप स्ट्रोक के मरीज रह चुके है, तो आपको पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन के लक्षण के बारे में जान लेना सही है ताकि समय रहते आप इनका इलाज करा सकें और अपने जीवन को सुधार सकें। स्ट्रोक के बाद पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन हफ्ते, महीने या साल के बाद भी हो सकता है।

पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन का कारण (The reason of post stroke depression)

स्ट्रोक से व्यक्ति अपने जीवन में असंतुलित होने लगता है। स्ट्रोक के कारण आपका जीवन अचानक से बदल जाएगा जिस कारण आप डिप्रेशन का शिकार बन सकते है। स्ट्रोक के स्य्कोलोजिकल रिएक्शन (psychological reaction) के कारण पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन हो सकता है।  इसके अलावा और भी कारण से पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन हो सकता है। सैकियाट्रिस्ट (psychiatrist) के अनुसार स्ट्रोक के बाद एक व्यक्ति के ब्रेन में बायोकैमिकल (biochemical) के बदलाव से डिप्रेशन हो सकता है। ब्रेन को पहुंचे नुक्सान के कारण व्यक्ति सही भावनाओं को महसूस नहीं कर पाता है और यही कारण उन्हें डिप्रेशन से गुज़रना पड़ता है। जेनेटिक्स (genetics) और समाज भी उनके इस स्तिथि का कारण बन सकते है। अच्छी बात यह है की इसका इलाज हो सकता है और सहायता सही से प्राप्त हो सकती है।

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पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन के लक्षण (Symptoms of post stroke depression)

यह सारे या कुछ लक्षण पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन के मरीज के साथ हो सकते है। अगर आपमें इनमे से कुछ लक्षण है तो आपको इनका इलाज डॉक्टर से तुरुन्त करवाना चाहिए ना की यह सोचना चाहिए की यह समय के साथ अपने आप ठीक हो जाएगा।

  • अकेलापन और दुःख का बार बार महसूस करना
  • ज्यादा सोना या सही से ना सो पाना
  • कम या ज्यादा भूख लगना
  • समाज से और सामान्य गतिविधियों से दूर होना
  • मजबूरी, लाचारी और व्यर्थ महसूस करना
  • लगातार चिंतित रहना
  • चिडचिडाहट और घुसा
  • गतिविधियों में कोई दिलचस्पी नहीं जिस से पहले आप खुश हुआ करते थे
  • काम या दूसरी चीज़ों पर ध्यान देने में दिक्कत
  • आत्महत्या के बारे में विचार करना
  • शाररिक दर्द जो इलाज के बाद भी नहीं दूर हो रहा हो

अगर आप इन सब लक्षणों को महसूस कर रहे है तो ज़रूरी है की आप इनके इलाज के लिए सही कदम उठाये। अच्छे परिणाम के लिए आप अपने लाइफ स्टाइल में बदलाव ला सकते है। अगर आप तब भी सुधार नहीं देख पा रहे है तो बेहतर होगा की मेडिकल सहायता से इसका इलाज जल्द से जल्द किया जाए क्यूंकि लगातार डिप्रेशन में रहने से सुधार लाना मुश्किल हो जाता है।

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स्ट्रोक के बाद डिप्रेशन का इलाज (Treating depression after stroke)

स्ट्रोक के बाद डिप्रेशन के इलाज के लिए नीचे दिए गए लाइफ स्टाइल बदलाव को अपनाए और अपनी हालत को सुधारे।

बेहतर पोषण पर ध्यान दे (Focus on better nutrition)

सांसो की दुर्गंध से बचने के घरेलू उपाय

आहार जो सही और संतुलित हो साथ ही उसमे सही पोषण तत्व हो तो पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन का इलाज होने में सहायता प्राप्त हो सकती है। अपने आहार में ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन B और फोलिक एसिड से भरपूर खाने को मिलाये, जो ब्रेन सेल्स को स्वस्थ बनाते है और साथ ही अच्छा महसूस करवाने वाले हॉर्मोन को ज्यादा बनाते है। फैटी फिश, बीज और सूखे मेवे से आप ओमेगा 3 फैटी एसिड प्राप्त कर सकते है, इसलिए यह सब अपने आहार में मिलाये और बेहतर परिणाम पाए। अनाज से भी आप अपने मूड को सुधार सकते है इसलिए इन्हें भी अपने आहार में मिलाना ना भूले। वाइट ब्रेड और चावल के बजाय ओटमील, गेहूँ और ब्राउन चावल पर निर्भर रहे।

आहार जिसमे प्रोटीन की कमी हो उस से डिप्रेशन बढ़ सकता है। अगर आप पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन से गुज़र रहे है तो अपने आहार में नियमित रूप से लो फैट प्रोटीन (low fat protein) मिलाये। और साथ ही रोजाना अपने आहार में बीन्स, ब्रोक्कोली और स्प्राउट्स ज़रूर मिलाये। इनमे फोलिक एसिड भरपूर है जिस से यह आपको डिप्रेशन से दूर रख सकेंगे।

अपने आप को शाररिक सम्बंधित गतिविधियों में तृप्त करें (Indulge in physical activities)

आप स्ट्रोक के बाद भारी व्यायाम को नहीं कर सकते लेकिन इसका यह मतलब नहीं की आप हलकी व्यायाम को करना बंद कर दें। शाररिक सम्बंधित गतिविधियों को ना करने से आप पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन को बढ़ावा देते है। इसलिए बहार वाक (walk) पर जाए और हलकी शाररिक सम्बंधित गतिविधियों में शामिल होए। इन गतिविधियों से आप केवल तंदरूस्त नहीं बनते बल्कि इनसे ब्रेन में सेरोटोनिन उत्पादन को बढ़ाते है। डॉक्टर की सलाह से आप स्विमिंग को भी अपने शाररिक सम्बंधित गतिविधियों में शामिल कर सकते है। इन सब से आप डिप्रेशन का ही इलाज नहीं करते बल्कि अपने दौर को सुधारते भी है।

अपने निद्रा पर ध्यान दे (Watch your sleep quota)

स्ट्रोक के बाद अपने साधारण जीवन में वापस आने के लिए आप आराम ज़रूर करें लेकिन अधीक ना करें। आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए की आप कितनी देर तक सो सकते है और कब आप अपने ब्रेन को गतिविधियों से फ्री कर सकते है और कब आप अपने ब्रेन के लिए छोटा हल्का काम कर सकते है। अच्छे से निद्रा प्राप्त करें लेकिन अधीक निद्रा ना ले। अपने आप को किताब पढ़ने में, गाने सुनने में, दस्तकारी (handcraft) में, पेंटिंग में, पौधों का ख़याल रखने में, घर को सजाने में या दुसरे रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें। इन सब से आपका मूड बेहतर बन सकता है।

सब्र करें (Be patient)

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स्ट्रोक के बाद जीवन में बहुत कुछ बदल जाता है पर इसके लिए चिंतित ना होए क्यूंकि जैसे ही आपका स्वास्थ्य सुधर जाता है आप अपने साधारण जीवन में दोबारा जा सकते है। जीवन में हमेशा कठिनाई आती रहती है इसलिए इनका सामना करें और अपना श्रेष्ठ परिणाम दें। इसलिए अपने साथ और अपने संबंध के साथ सब्र बनाए रखें। अगर आप गतिविधियाँ जो स्ट्रोक से पहले आसानी से कर पाते थे वो अब नहीं कर पा रहे है तो घबराए मत, आपकी हालत पूरी सुधरने के बाद आप इन गतिविधियों को दोबारा कर सकेंगे। यह ध्यान रखें की लोग जो आपके साथ है और पास है उनके साथ गुस्से या बद्तमीजी से पेश ना आये क्यूंकि उन्हें भी आपकी फिक्र है इसलिए उनके साथ अच्छे से पेश आये।

छोटे और वास्त्वादी लक्ष्य को निर्धारित करें (Set small and realistic goals)

आपको यह समझना होगा की आप मृत्य से बच कर लौटे है और इसलिए आपका साधारण जीवन की गतिविधियों में वापस लौटने में समय लगेगा। अगर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में कठिनाई महसूस कर रहे है तो चिंतित ना होए, आप इन लक्ष्य या काम को छोटे हिस्सों में बाँट सकते है और इन हिस्सों में से एक समय पर एक हिस्से पर ध्यान दे। छोटे लक्ष्य के कारण आप इन पर काम कर सकते है और साथ ही आप चिंतित या निराश नहीं हो पायेंगे।

संवाद और बांटे (Communicate and share)

स्ट्रोक से बचना कोई छोटी बात नहीं है और अगर आप डिप्रेशन महसूस कर रहे है तो अपनी समस्या को अपने ख़ास दोस्त या परिवार जन से बाँट सकते है, बांटने से आप हल्का और अच्छा महसूस करेंगे। आप स्ट्रोक से बचे लोगो के साथ मिल सकते है और बात कर सकते है, वे भी उसी दौर से गुज़र रहे है जिन से आप गुज़र रहे है। अपनी समस्या को बांटने से आप अपने डिप्रेशन को कम कर सकेंगे और साथ ही ज़रुरत पड़ने पर सहायता भी प्राप्त कर पायेंगे।

योग का उपयोग करें (Practice yoga)

योग (yoga) के कारण आप अपने पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन का इलाज कर सकते है। योग में वो सब काबिलियत है जिस से यह आपको स्ट्रेस से और डिप्रेशन से ही आराम नहीं देगा बल्कि आपके मस्तिष्क की स्तिथि को सुधारने में आपकी सहायता भी करेगा। योग करने से आप केवल अपने शाररिक सम्बंधित बीमारियों का इलाज नहीं करेंगे बल्कि अपने मान्सिक स्तिथि को भी सुधारेंगे। योग और ध्यान से आप अपने नसों को आराम दे सकेंगे और साथ ही निराशा को दूर कर पायेंगे। इस से आप अपने जीवन की समस्या को सही रूप से सामना कर पायेंगे जिस कारण डिप्रेशन दूर होता जाएगा।

पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन के लिए मेडिकल इलाज (Medical treatments for post stroke depression)

आंखों और पलकों की झुर्रियां कैसे दूर करें?

अगर हफ्ते भर में आपका डिप्रेशन दूर नहीं हो पा रहा है तो बेहतर होगा की आप मेडिकल सहायता का उपयोग करें। बहुत सी दवाइयां और थेरेपी, पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन का इलाज करने में सहायक है इसलिए ज़रुरत पड़ने पर इनका उपयोग ज़रूर करें।

औषधि – प्रयोग (Medications)

अनेक प्रकार के एंटी डिप्रेसंट निर्धारित किए जाता है ताकि स्ट्रोक से बचे व्यक्ति डिप्रेशन का इलाज कर सकें। लेकिन हर प्रकार के एंटी डिप्रेसंट, स्ट्रोक से बचे मरीज के लिए सही नहीं है इसलिए इनका उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से इस बारे में परामर्श कर लें और फिर उस अनुसार इलाज ले। आपके डॉक्टर आपकी हालत को बेहतर समझ सकते है इसलिए उनसे कुछ ना छुपाये और अपनी समस्या को पूरी तरह से उनके सामने पेश करें।

स्य्कोथेरेपी (Psychotherapy)

अलग प्रकार के थेरेपी से आप कोई भी प्रकार के डिप्रेशन का इलाज कर सकते है चाहे वो पोस्ट स्ट्रोक डिप्रेशन ही क्यूँ ना हो। स्य्कोथेरपी (psychotherapy) को सैकियाट्रिस्ट (psychiatrist) करते है और सही थेरेपी के बारे में अपने डॉक्टर से विस्तार रूप में जानकारी प्राप्त करें। इस सब से आपका इलाज हो सकता है।

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