Contraction and its types – संकुचन क्या है? संकुचन से किस तरह महसूस होता है और संकुचन के प्रकार कितने है?

संकुचन मतलब शरीर से जन्म लेने वाले बच्चे को नीचे से बाहर की दुनिया में धकेलना होता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जो शुरू होती है जब बच्चे का दिमाग माँ के शरीर को ये सन्देश देता है कि उसका दुनिया में आने का समय आ गया है।

पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के लिए गर्भावस्था का पूरा अनुभव, जिसमें संकुचन उठना तथा बच्चे को जन्म देना शामिल है, भावनात्मक रूप से काफी कठिन साबित हो सकता है। आपने शायद पहले ही सुना होगा कि संकुचन कैसी लगती हैं और आप निश्चित ही इस दौरान होने वाले दर्द के बारे में सोचकर विचलित भी हुई होंगी।

लेकिन हमेशा इस बात को ध्यान में रखें कि हर महिला के लिए संकुचन का अनुभव बिल्कुल निजी होता है और यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें गर्भ में बच्चे की मुद्रा से लेकर आपके लेबर (labor) की तीव्रता तथा आप इसे लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से कितनी तैयार हैं आदि चीज़ें शामिल होती हैं।

अतः दूसरों की कहानियां सुनकर चिंता ना करें और इस बात को ध्यान में रखें कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और माँ का शरीर संकुचन के बावजूद एक बच्चे को जन्म देने का काम काफी अच्छे से करता है.ऐसा माना जाता है कि संकुचन काफी दर्दनाक, शक्तिशाली और लम्बी होंगी। पर जैसे ही बच्चे का जन्म होता है तो आपका सारा दर्द और परेशानी दूर हो जाती है।

संकुचन का दर्द आमतौर पर सामान्य दर्द से अलग माना जाता है क्योंकि इसके होने का कारण कोई संक्रमण या आपके शरीर में होने वाली कोई परेशानी नहीं है। बल्कि यह एक जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया है जो धरती पर जीवन को सफल बनाता है। अतः जब आप लेबर में रहती हैं तो इस बात को लेकर सुनिश्चित रहें कि आपके शरीर के साथ जो भी हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है और इसे लेकर चिंता करने की कोई बात नहीं है।

गर्भाशय एक शक्तिशाली मांसल भाग होता है और बच्चे के जन्म के दौरान यह सिकुड़कर बीच बीच में ढीला पड़ता है, जिससे आपका बच्चा गर्भनाल से नीचे आ सके। जैसे जैसे गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, वैसे ही आपका पेट कड़ा होने लगता है और जैसे ही मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं, वैसे ही ये नर्म पड़ जाता है।

यह सिकुड़ना और ढीला पड़ना अनवरत चलता रहता है और यह माना जाता है कि आपके शरीर में एक लहर जैसा भाव उठेगा जो आपको उच्च दर्द की सीमा तक ले जाकर धीमा पड़ जाएगा।

संकुचन के प्रकार (Types of Contractions)

संकुचन के तीन प्रकार होते है :-

  • अभ्यास संकुचन (Practice contractions) :- गर्भावस्था में देखभाल, अभ्यास संकुचन गर्भावस्था की अवधि के बाद किसी भी समय हो सकता है या नही भी हो सकता।
  • गलत संकुचन (False contractions) :- गलत संकुचन अनियमित है और सामान्य रूप से ये स्थिति बदलने के बाद बंद होती है कुछ गलत संकुचन असली संकुचन को जन्म दे सकते है लेकिन वे ग्रीवा का कारण नही है
  • वास्तविक श्रम संकुचन (Real labor contractions) :- वास्तविक श्रम संकुचन किसी भी स्थिति में हो सकता है, चाहे आप खड़े हो, बैठे हो या लेटे हो। यह समय के साथ गंभीर , नियमित और लगातार हो जाते है। संकुचन के साथ साथ ऐठन, पेट की खराबी और दस्त भी हो सकता है। जब ये समस्या होती है तो पीठ में, पेट में और उपरी जांघो पर दर्द होता है और पानी टूटने के रूप में झिल्ली टूटने के साथ साथ खून भी निकल सकता है।

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  • समय संकुचन (Timing Contractions) :- समय संकुचन एक उपयोगी तरीका है, यह खोजने के लिए कि बच्चा पैदा होने में कितना समय है। गर्भवती महिलाओ को गर्भावस्था के अंत में और पुरे श्रम अवधि के दौरान संकुचन होते है ये तब तक होते है जब तक शिशु का जन्म नही हो जाता इस दौरान गर्भाशय की मांसपेशिया में खिचाव और ढीलापन समय समय पर होता है।

प्रसव से पहले – समय संकुचन करने के लिए विधि (Method to time contractions)

  • संकुचन को पहचानो (Recognize the contraction) – गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स, संकुचन हर महिला को एक अलग एहसास कराते है। कई महिलाओ द्वारा ये बयान किया जाता है, कि एक दर्द के रूप में ये वापस से शुरू होता है और पेट की ओर बढता है। दर्द शुरू में हल्का होता है और फिर यह ज्यादा हो जाता है और आखिर में कम होता है। संकुचन के दौरान पेट कठोर हो जाता है। प्रसव-वेदना की शुरुआत (prasav ke lakshan) में संकुचन पहले 60-90 सेकंड के लिए होता है और फिर आखिर में 15-20 मिनिट के लिए होता है। आवृत्ति के रूप में ये अवधि कम हो जाती है और प्रसव आने के करीब ये बढ़ जाती है।
  • समय संकुचन (Timing Contractions) – संकुचन के आकर को पहचानना है, तो संकुचन की आवृत्ति और अवधि पर ध्यान देना चाहिए। कभी कभी संकुचन एक मिनिट से पहले ही समाप्त हो जाता है तो इस स्थिति में सही समयमापक का होना बहुत जरुरी है। संकुचन शुरू होने और समाप्त होने का समय नोट कर लेना चाहिए दो संकुचन के बीच की अवधि पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। श्रम के ठीक पहले संकुचन एक निश्चित तरीके से होता है।

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  • यह जाने की प्रसव-वेदना कब शुरू होता है (Knowing when the labor begins) :- यह प्रसव-वेदना (delivery se pehle) के संकेत का पालन करने के लिए आवश्यक है। ये संकेत किसी भी स्थिति में संकुचन को तेज़ रखने में शामिल है और वे सेट के तरीके का पालन करते है। वे आवृत्ति में वृद्धि करते है और अधिक दर्दनाक बन जाते है। प्रसव-वेदना के अन्य शारीरिक लक्षणों में पानी का टूटना और बच्चा गर्भाशय ग्रीवा के लिए नीचे कि ओर आगे बढना, शामिल है। इस दौरान गर्भाशय ग्रीवा में खून निकलने का फैलाव भी है।
  • यह जाने की जन्म की तैयारी कब करे (Knowing when to prepare for birth) :- प्रसव के समय होने वाली मजबूत संकुचन की अवधि 45 सेकंड और 3-4 मिनिट के बीच होती है।

संकुचन को ठीक कैसे करे (How exactly are contractions like?)

संकुचन गर्भाशय और ग्रीवा के आसपास के दवाब के कारण महसूस होता है। इस स्थिति में पेट नरम और कड़ा हो जाता है। कुछ महिलाओ को यह महसूस होता है कि पेट में एक कड़ी मुट्ठी बन रही है ,कुछ मामलो में पेट के आसपास ये कस थोड़े दर्द के साथ असहज महसूस होती है। यह बच्चे को गर्भ में खींचने और गर्भाशय पर दवाब डालने की तरह महसूस  होता है। हर महिला के संकुचन का अलग अनुभव होता है।

प्रसव से पहले – अलग अलग महिलाओ में संकुचन के अलग अलग अनुभव (Different experiences of contraction in different women)

गर्भपात के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं?

  • आमतौर पर संकुचन पीठ में कुछ परेशानी के साथ अवधि में दर्द का एक प्रकार है और जिससे पेट पहले से और मजबूत हो जाता है, ये दर्द एक निश्चित तरीके से होता है।
  • कुछ महिलाओ के लिए संकुचन अवधि में बुरे दर्द की तरह है। ये पेट के निचले हिस्से और पीठ में ऐठन की तरह है।
  • कुछ महिलाए इस दर्द को पेट के कसने  के साथ महसूस करती है, यह कुछ सेकंड या एक मिनिट के लिए ही रहता है।
  • कई महिलाये संकुचन को पेट में हवा या गैस के रूप में महसूस करती है।
  • कुछ महिलाये संकुचन को मासिक धर्म में ऐठन जैसे धीरे धीरे महसूस करती है।

लेबर के विभिन्न चरणों में मरोड़ों का अहसास (Feeling of contraction at different stages of labor)

आपके लेबर में मौजूदा स्थिति के अनुसार संकुचन आने का अहसास बदलने की उम्मीद की जा सकती है। शुरुआत में संकुचन का दर्द मासिक धर्म के कठिन दर्द की भांति लगता है जिसके साथ शरीर में मरोड़ें उठना और पीठ में दर्द की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कुछ महिलाओं के लिए शुरुआत से ही दर्द काफी तीव्र रहता है। इसी के साथ ऐसी महिलाएं भी होती हैं जिनके लिए शुरुआत में संकुचन की प्रक्रिया पेट के निचले हिस्से में भारीपन के सिवा और कुछ भी नहीं होती। कईयों के लिए संकुचन सबसे पहले पीठ पर महसूस होता है और फिर पेट की तरफ जाता है एवं धीरे धीरे गर्भाशय में फ़ैल जाता है।

लेबर का समय गुजरने के साथ ही संकुचन और भी तीव्र तथा दर्दनाक होता जाता है और दो संकुचनों के मध्य का समय भी कम होता जाता है। जब माँ पूरी तरह डाईलेटेड (dilated) रहती है तो दोहरा संकुचन भी कई बार महसूस किया जाता है। दोहरे संकुचन के दौरान आप पाएंगे कि दर्द अपने चरम पर पहुंचकर धीमा हो जाता है, और फिर से अपने चरम पर पहुंचकर धीमा हो जाता है। इस स्थिति में लेबर का पहला चरण समाप्त होता है तथा दूसरा चरण शुरू होता है, जब आप बच्चे को नीचे धकेलने लगती हैं। इस चरण का संकुचन पहले चरण के संकुचन के मुकाबले अलग और कम दर्दनाक प्रतीत होता है। तीसरे चरण में प्लेसेंटा (placenta) गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है और यह संकुचन पिछले चरणों के संकुचन के मुकाबले काफी कम तीव्र और दर्दनाक माना जाता है।

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