How to pacify the baby – बच्चे को चुप कैसे कराएं

आपने बच्चों को दिन रात रोते हुए देखा होगा। ज़्यादातर माएं अपने बच्चे के रोने का कारण समझ जाती हैं। पर कभी कभी बच्चे काफी ज़्यादा रोते हैं और माँ बाप उसके रोने का कारण समझ नहीं पाते हैं। ज़्यादातर स्थितियों में बच्चे भूख लगने की वजह से रोते हैं। बच्चों को लगातार स्तनपान करवाना चाहिए क्योंकि यह काफी हल्का होता है तथा पचाने में आसान होता है। बच्चे के पैदा होने के एक हफ्ते बाद बच्चा प्राकृतिक तौर पर ज़्यादा रोता है। पर तब भी माँ बाप डरने लगते हैं क्योंकि वे समझ नहीं पाते कि बच्चा रो क्यों रहा है।

बच्चे के रोने से निपटने के तरीके (Tips to deal with baby tear)

बच्चा जब रोये तब पशोपेश में न पड़ें क्योंकि रोना एक स्वस्थ बच्चे की निशानी होती है। 6 हफ्ते के बाद ही बच्चे के तंत्रिका तंत्र में काफी विकास होता है तथा वह रोने की व्यर्थता पहले से अधिक समझता है। इस समय बच्चों का अपने रोने पर अधिक नियंत्रण होता है। एक स्थिति ऐसी भी आती है जब बच्चा अपनी माँ को डायपर बदलने या अपने भूख लगने के बारे में बता पाता है।

जब बच्चा 3 महीने का होता है तो उसका अपनी माँ से अपने रोने के सन्दर्भ में काफी अच्छा संपर्क स्थापित हो जाता है। कभी तो उसे गोद में लेना पड़ता है, कभी भोजन करवाना पड़ता है और कभी उसके साथ खेलना पड़ता है।

बच्चों का रोना – बच्चे को कसकर पकड़ना (Swaddling, shush, sway – bacche kyu rote hai)

जब बच्चा गर्भ में होता है तो उसे बाहर की दुनिया तो नहीं दिखती पर आवाज़ें सुनाई देती हैं। पर जैसे ही वो गर्भ से निकलता है, वैसे ही उसका एक नयी दुनिया से सामना होता है। जिस चीज़ को उसने कभी महसूस नहीं किया होता है उसे देखकर वह रोने लगता है। नए जन्मे बच्चे का अपनी मांसपेशियों पर ज़्यादा नियंत्रण नहीं होता है, पर उसे कसकर पकडे रहने से आप उसके हाथ और पैर को नियंत्रण में रख सकते हैं।

कब कब रोते हैं बच्चे – बच्चे की अच्छी जांच करना (A system check to the baby)

कई ऐसी चीज़ें होती हैं जो आपके बच्चे को असंतुष्ट करती हैं। ये हैं डायपर बदलना,खानपान और आराम ना मिलना। आपको बच्चे के रोने का असली कारण जानना होगा। यह अनुभव से आता है।

बच्चों के रोने के कारण – शांति रखें और ज़्यादा प्रयास न करें (Relax and do not try too hard)

आमतौर पर बच्चे के माता पिता बच्चे को चुप कराने के लिए बहुत सी चीज़ें करते हैं पर फिर भी वो रोता है। अगर बच्चा आपकी कोशिशों के बाद भी चुप नहीं हो रहा है तो प्रयास करना बंद कर दें। यह वह समय है जब आप उसपर नज़र रखें। बच्चे को रोने से चुप कराने के लिए प्रयास करना समय की बर्बादी है।

कब कब रोते हैं बच्चे – असल ज़िन्दगी से परिचित करवाना (Exposure to practical life)

अपने बच्चे को असली दुनिया से परिचित करवाएं। अपने बच्चे को इतना मज़बूत बनाएं कि वो हर बीमारी तथा पृथ्वी की हर समस्या से लड़ सके। कुछ माएं हमेशा अपने बच्चों को अपने आँचल से बांधकर रखना चाहती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे वे अपने बच्चे को बाहर की बुराइयों से बचा सकती हैं।

कई बच्चे बाहर की दुनिया देखने को आतुर रहते हैं, अतः उनकी इच्छा अवश्य पूरी करें। अपने बच्चे के पास बैठकर कभी भी अपनी आवाज़ को नीचा ना करें। उसी आवाज़ में बात करें जो उसे सारी उम्र सुननी है। वो आपकी आम आवाज़ सुनके नहीं रोएगा।

बच्चों का रोना – ध्यान आकर्षित करने के लिए रोना (Crying to get reaction)

एक बार जब आपका बच्चा ६ से १२ महीने की अवस्था में पहुँच जाता है तो वो कई बार खुद पर आपका ध्यान आकर्षित करवाने के लिए रोता है। वह अजीब सी हरकतें करता है और आपको परेशान देखकर खुश होता है। इस समय चुप रहे और उसके रोने की ओर ध्यान ना दें।

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