Best ways to protect your skin from pollution – त्वचा को प्रदूषण से बचाने के सबसे अच्छे उपाय

सिगरेट के धुएँ, कार से निकलने वाले धुएँ और धुंध से वातावरण प्रदूषित होता है और यह हमारे शरीर में बनने वाले सूक्ष्म कणों का स्तर भी बढ़ा देता है।

त्वचा एवं वायु प्रदूषण (Skin and air pollution)

हमारी त्वचा उम्र के साथ निश्चित रूप से अपना कसाव और नमी खो देती है, मगर वायु में मौजूद प्रदूषण की वजह से खास तौर पर हमारी त्वचा को नुकसान होता है इसका कारण है वायु में मौजूद टॉक्सिन (toxin) जो हमारे चेहरे, गले, और हाथ की त्वचा को समय से पहले ही बूढ़ा बना देता है। हवा में उपस्थित धूल और गंदगी हमारे स्किन की पोरों को बंद कर त्वचा को रूखा और बेजान बना देती है। लंबे समय तक नियमित रूप से इस तरह प्रदूषण का सामना करने के दुष्परिणाम स्किन एलर्जी, अस्थमा और एक्ज़िमा जैसे रोग हैं। ये प्रदूषित वायु आपकी त्वचा में प्रवेश कर नमी के स्तर को नुकसान पहुंचा कर नष्ट कर देती है और इसका नतीजा यह होता है की आपकी त्वचा अपनी नमी खोकर रूखी हो जाती है साथ ही विभिन्न प्रकार के दाग धब्बों की वजह से विकृत हो जाती है।

त्वचा और जल प्रदूषण (Skin and water pollution)

रात में सोने से पहले स्किन केयर के टिप्स

वायु द्वारा होने वाले प्रदूषण को देखना और पहचानना आसान होता है, पर पानी के प्रदूषण को पहचानना इतना आसान नहीं होता। नल और स्वीमिंग पूल के पनि में मौजूद क्लोरीन आपकी त्वचा को बेहद नुकसान पहुंचाता है। ऐसे कई उत्पाद हैं जो जल प्रदूषण की वजह से आपकी त्वचा को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। जल प्रदूषण से बचने के लिए खास तौर पर आपको पीने के पानी को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह फिल्टर कर लेना चाहिए। इसके साथ ही स्वीमिंग पूल में बिताए जाने वाले समय की सीमा को कम कर देना चाहिए।

त्वचा को प्रदूषण से बचाने के उपाय (Ways to protect your skin from pollution)

बाज़ार में आपकी स्किन के लिए कई तरह के उत्पाद मौजूद हैं जो आपकी त्वचा में धीरे धीरे हो रही क्षति को ठीक करने का दावा करते हैं। त्वचा की सबसे बाहरी परत को एपिडर्मिस (epidermis) कहते हैं, पर्यावरण में प्रदूषण की वजह से इस परत को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचता है। त्वचा को प्रदूषण से बचा कर स्वस्थ और सुरक्षित रखना कोई बहुत ज़्यादा मुश्किल काम नहीं है। ऐसे एक या दो उपाय हैं , जो थोड़े महंगे ज़रूर हैं पर ये आपकी त्वचा को स्वस्थ और उज्जवल रखते हैं।

त्वचा को साफ रखें (Keep the skin clean)

त्वचा को रोजाना जिस चीज़ की ज़रूरत होती है वह है, त्वचा की नियमित सफाईआप अपनी त्वचा को किसी ऐसे अच्छे क्लिंजिंग उत्पाद से साफ कर सकते हैं जो आपकी त्वचा को सूट करे और कोई नुकसान ना पहुंचाए। त्वचा की सुरक्षा की सम्पूर्ण प्रक्रिया में त्वचा की क्लिंजिंग सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत हिस्सा है। यह त्वचा में जमी धूल और गंदगी को निकाल कर बाहर करता है और प्रदूषण की वजह से जो अतिरिक्त तेल व मेल जो हमरी पोरों में जमा होकर उन्हें बंद कर देता है, उनको एपिडर्मिस से बाहर निकाल कर साफ करता है। यह स्किन को धूल और धुएँ से मुक्त कर देता है। त्वचा के लिए प्रभावी क्लिंजर साबुन युक्त नही होते। अलग अलग तरह की त्वचा को अलग अलग प्रकार के क्लिंजर की ज़रूरत होती है। बहुत ज़्यादा रूखी (dry) त्वचा को क्रीम युक्त क्लिंजर की ज़रूरत होती है। और किसी भी तरह की संवेदनशील त्वचा के लिए अल्कोहल रहित क्लिंजर बेहतर होता है उसी तरह ऑइली (oily) या तैलीय त्वचा को किसी एसिडिक क्लिंजर की ज़रूरत होती है।

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स्वस्थ त्वचा चाहिए तो पिएँ ज़्यादा पानी (Drink plenty of water for healthy skin)

पानी शरीर में मौजूद हानिकारक पदार्थों और टॉक्सिन (toxin) को साफ कर बाहर निकालता है और पोषक तत्वों के सही अवशोषण के लिए कोशिकाओं (cells) की मदद करता है। हमारा पाचन तंत्र सुचारु रूप के कार्य कर सके इसके लिए पानी बहुत सहायक होता है, आप देखेंगे कि, पानी कम पीने से पेट संबंधी कई समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है अतः पाचन में पानी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह हमारी त्वचा को भी हाइड्रेट (hydrate) कर नमी प्रदान करता है। पानी शरीर के उन महत्वपूर्ण तत्वों को सुरक्षित करता है जो पसीने और किसी अन्य तरह के उत्सर्जन से शरीर से बाहर निकाल जाते हैं ताकि इन मत्वपूर्ण तत्वों कि शरीर में कमी ना हो और त्वचा कि नमी व चमक बरकरार रहे।

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ओमेगा 3 बढ़ाता है त्वचा कि सुरक्षा (Omega3 boosts the protection of skin)

ओमेगा 3 शरीर के लिए एक ज़रूरी फैटी एसिड (fatty acid) के नाम से जाना जाता है। ये उन लिपिड युक्त कोशिका झिल्ली (cell membranes) को विकसित करने में मदद करता है जो पानी और ज़रूरी पोषक तत्व शरीर में पहुंचाते हैं। यह शरीर कि त्वचा पर तेल कि परत के रूप में मौजूद होता है जो त्वचा को हानिकारक अल्ट्रा वाइलेट किरणों (ultra violate rays) और प्रदूषण (pollution) से बचाता है। ओमेगा 3 और ओमेगा 6 (omega 6) दोनों ही त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। ओमेगा 6 कई प्रकार के भोज्य पदार्थों जैसे अंडे, मांस, चिकन, अनाज, बीजों और पकाने वाले तेल में पाया जाता है पर ओमेगा 3 मुश्किल से उपलब्ध होता है। यह ठंड पानी कि मछलियों जिनमें मुख्य रूप से ट्राउट, सॉलमन और सीपों (oyster) में पाया जाता है। इसके अलावा अखरोट (walnut) में भी ओमेगा 3 कि भरपूर मात्रा उपस्थित होती है। और अगर आप शाकाहारी हैं तो राजमा तथा पालक आपके लिए ओमेगा 3 का बेहतरीन स्रोत हो सकते हैं, क्योंकि राजमा और पालक में भी ओमेगा 3 मौजूद होता है। सलाह दी जाती है कि आप स्किन को बेहतर करने के लिए ओमेगा 3 को सप्लीमेंट्स (supplements) के रूप में भी ले सकते हैं। यह त्वचा कि भीतर से सुरक्षा करता है। बाज़ार में ओमेगा 3 के सप्लीमेंट्स के तौर पर कई उत्पाद मौजूद हैं।

त्वचा की देखभाल के तरीके – बेहतर त्वचा के लिए सुझाव

धूप से बचने के लिए करें सन्स्क्रीन का इस्तेमाल (Use sunskeen for safety from sun)

सूर्य कि तेज़ किरणें त्वचा के लिए कई प्रकार से हानिकारक होती है। सन्स्क्रीन एक सुरक्षा कवच कि तरह हमारी त्वचा को कई गंभीर रोगों जैसे कैंसर आदि से बचाता है। यह त्वचा पर दिखने वाली पतली रेखाओं के होने कि आशंका को भी कम करता है जो सूर्य कि तेज़ किरणों के कारण भी होती है और इसकी वजह से आपकी त्वचा ज़्यादा उम्र कि नज़र आती है। बिना किसी सुरक्षा या बचाव के अधिक समय धूप में रहने पर त्वचा का रंग गहरा होता है और साथ ही महीन रेखाओं और झुर्रियों को आपके चेहरे में जगह मिल जाती है।

त्वचा के लिए अच्छे एंटीऑक्सीडेंट हैं विटामिन सी और ई (Vitamin C and vitamin E are good antioxidants for skin)

विटामिन सी (vitamin C) और विटामिन ई (vitamin E) ऐसे एंटीऑक्सीडेंट हैं जो कई प्रकार के भोजन में आसानी से मिल जाते हैं। इन्हें बड़ी ही आसानी से फल, सब्ज़ियों, सी फूड (sea Food) और विभिन्न तरह के तेलों के प्रयोग द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। विटामिन सी त्वचा कि चमक को बरकरार रखने में मदद करता है। त्वचा कि सुरक्षा के लिए और भी कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट हैं पर विटामिन सी एक आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट (antioxidant)  है जो शरीर के लिए ज़रूरी है। यह सबूत अनाजों, सेब संतरा और सिट्रिक एसिड (citric acid) युक्त फलों में पाया जाता है। विटामिन ई कोशिका झिल्ली को नष्ट होने से बचाता है, विटामिन ई गेंहूँ के बीज के तेल, सरसो, पालक, ब्रोकली और पिनट बटर में मौजूद होता है।

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