General nail problems and remedies in Hindi – नाखूनों की सामान्य समस्याएं और उपाय

मानव शरीर में कई तरह के जीवाणु पनपते हैं। जहाँ कुछ अच्छे होते हैं, वहीं अन्य काफी हानिकारक भी हो सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से हम फंगस और बैक्टीरिया का नाम ले सकते हैं। हमारी त्वचा पर पनपने वाले कई जीवाणु हमारे शरीर में फंगल इन्फेक्शन भी पैदा कर सकते हैं।

यहाँ तक कि बालों और नाखूनों (नेल्स) की मृत कोशिकाओं (tissues) में भी इन हानिकारक जीवाणुओं का वास हो सकता है। नाखूनों (नेल्स) से सम्बंधित कई समस्याएं होती हैं और इनके होने के कारण अलग अलग होते हैं। कई लोग नाखूनों (nakhun ke rog) की इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं। पर इन परेशानियों को ज़्यादा दिन तक नज़रअंदाज़ करने से काफी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

नाखूनों (नेल / Nails) की समस्याएं और इन्फेक्शन – Nail problems and infections

नाखून में दर्द – पैरोनिकिया इन्फेक्शन (Paronychia infections)

यह नाखूनों (नेल्स) में होने वाला ऐसा इन्फेक्शन है जिसकी वजह आमतौर पर फंगस और बैक्टीरिया होते हैं। कई बार किसी किस्म का वायरस भी इस प्रकार के इन्फेक्शन का कारण होता है। नाखूनों (nails) के पीछे तथा सामने का हिस्सा मिलकर एक तरह की दीवार बना देते हैं जो कि नाखूनों (नेल्स / Nails) की प्लेट तथा इसके आसपास की कोशिकाओं को अलग करता है। ऐसे कई मौके आते हैं जब यह दीवार या सील टूट जाती है। यह उँगलियों तथा नाखून का ऐसा भाग होता है जहां बैक्टीरिया आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। इस इन्फेक्शन से उँगलियों में सूजन, दर्द और लालपन उभरकर सामने आता है।

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नाखून में दर्द – सूडोमोनस बैक्टीरियल इन्फेक्शन (Pseudomonas bacterial infection)

यह एक ऐसा इन्फेक्शन है जो कि नाखून की प्राकृतिक प्लेट तथा इसके अंदर के हिस्से या नेल बेड के बीचोंबीच होता है। आमतौर पर इसे प्राकृतिक नेल प्लेट तथा नाखूनों (नेल्स) की नकली कोटिंग के बीच का इन्फेक्शन कहा जाता है। इस तरह के संक्रमण या इन्फेक्शन के शिकार लोगों के नाखून हलके हरे रंग के हो जाते हैं। नाखूनों में इन्फेक्शन होने के कारण इनका बेरंग या डिस्कलर हो जाना काफी सामान्य प्रक्रिया है। इस इन्फेक्शन का मुख्य कारण लौह कंपाउंड्स होते हैं।

नाखूनों की परेशानी – ओनिकोमाइकोसिस (Onychomycosis)

यह नाखूनों (नेल्स) में होने वाली एक और तरह की सामान्य परेशानी है जो कि यीस्ट या फंगस के संक्रमण से होती है। यह नाखूनों के अंदरूनी भाग में किसी प्रकार से कट या छिल जाने की वजह से साफ़ दिखाई देती है। इस इन्फेक्शन से संक्रमित होने के बाद आपके नाखूनों (नेल्स) का रंग सफ़ेद या पीला हो जाता है। आप नाखूनों (नेल्स) की बनावट तथा इनके आकार में परिवर्तन भी महसूस कर सकते हैं। इस अवस्था में केराटिन नामक प्रोटीन फंगस द्वारा पूरी तरह से ले लिया जाता है।

नाखून की देखभाल – मोटी नाखूनों (नेल / Nails) की प्लेट (Thickened nail plate)

किसी प्रकार की चोट की वजह से कई लोगों में यह स्थिति देखी जाती है। इस स्थिति में नाखूनों की प्लेट अंदर की ओर मुड़ जाती है, जिसकी वजह से नाखूनों (नेल्स) के अंदरूनी हिस्से में चोट लगती है। कभी कभी इस समस्या को सर्जरी द्वारा ठीक कर दिया जाता है।

नाखूनों की देखभाल – सफ़ेद धारियां या स्पॉट्स (White lines or spots)

कभी कभी लोगों के नाखूनों (नाइल्स) के ऊपर सफ़ेद रंग की धारियां और धब्बे दिखाई देते हैं। इस बीमारी को डॉक्टरी भाषा में लियूकोनिचिया (leuconychia) कहते हैं। इसके होने का कारण हवा के वे छोटे बुलबुले होते हैं जो कि नाखूनों के अंदरूनी भाग में कैद हो जाते हैं। यह ज़्यादा गंभीर समस्या नहीं है। यह समस्या किसी भी मनुष्य को उसके जीन्स या आनुवांशिकता की वजह से होती है। इसे ठीक करने के लिए किसी भी प्रकार की औषधि की आवश्यकता नहीं होती है।

नाखून टूटने – बियूस लाइन्स (Beau’s lines)

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नाखूनों की एक और सामान्य समस्या को बियूस लाइन्स के नाम से जाना जाता है। इसका पता आसानी से नाखूनों (नेल्स) की प्लेट के ऊपर की सीधी रेखा को देखकर लगाया जा सकता है। नाखूनों (नाइल्स / nails) के ऊपर की यह रेखा पूरी तरह से काली पड़ जाती है। नाखूनों की यह दशा कीमोथेरपी या किसी प्रकार की बीमारी की वजह से हो सकती है।