Early signs of miscarriage – गर्भपात के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं?

आजकल गर्भधारण के 25% मामलों का अंत प्राकृतिक या कृत्रिम गर्भपात के रूप में होता है। प्राकृतिक गर्भापात गर्भधारण से 20 सप्ताह के अंदर गर्भ के अंत को कहते हैं। यह कई कारणों से होता है और ये कारण एक महिला से दूसरी महिला में अलग भी हो सकता है। महिलाओं के लिये कुछ कारण प्राकृतिक और अन्‌चाहे होते हैं जैसे ज्यादा मातृ उम्र, विकास या आरोपण में जैविक गड़बड़ियां या हार्मोनल असंतुलन। इसके अलावा अन्य कारण हो सकते है जैसे रोकना और पर्यावरणीय, लेकिन इनका अंत एक जैसा ही होता है: गर्भावस्था का अपरिपक्व अंत। कुछ गर्भावस्था जल्द ही गर्भपात में परिवर्तित हो जाता है जब तक कि महिला यह जाने की वह गर्भवती है। महिलाओं के लिये जो गर्भावस्था के दौरान है उन्हें गर्भपात के लक्षण और चिन्हों को अवश्य जानना चाहिये। कई प्रकार के गर्भपात हैं, जिनमें से कुछ संकेत देते हैं तो कुछ नहीं देते हैं। ऐसी महिलायें जिनको इन लक्षणों का अनुभव होता है स्वास्थ्य पेशेवरों से अवश्य मिलना चाहिये।

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देखभाल जब असामान्य योनिक स्राव पाया जाय (Care when unusual vaginal discharge found)

अलग अलग महिलाओं में गर्भपात के लक्षण अलग होते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि सभी को एक ही प्रकार के गर्भपात का अनुभव हो। इसके अतिरिक्त, यह योनिक स्राव कुछ महिलाओं के लिये गर्भापत का चिन्ह नहीं है और कुछ महिलाओं के लिये गर्भावस्था के प्रारम्भ में रक्त स्राव या असामान्य योनिक स्राव स्वस्थ और पूर्ण कालिक गर्भावस्था को देता है। जोखिम को कम करने के लिये चिकित्स्कीय परीक्षण गर्भपात या किसी अन्य स्राव के कारण का पता लगाने के लिये बेहतरीन समाधान है।

विभिन्न प्रकार के योनिक स्राव हैं-

  • बड़ी मात्रा में तरल या चिंताजनक मात्रा में हल्के गुलाबी रंग के म्युकस का स्राव, अचानक से निकलना गर्भपात का संकेत देता है।
  • भूरे या लाल रंग के दाग गर्भपात का संकेत देते हैं। कुछ मामलों में रक्त स्राव ज्यादा हो सकता है।
  • कोशिकाओं के गुल्म की उपस्थिति स्राव में जो मोटा, थक्केदार रक्त या हल्के गुलाबी या ग्रे पदार्थ गर्भपात का संकेत देता है।

    पीठ या पेड़ू में महत्वपूर्ण शारीरिक, केन्द्रित दर्द पर ध्यान देना (Give attention to significant physical, localized pain in the back or abdomen)

कभी कभी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं द्वारा गम्भीर दर्द अनुभव होता है। अगर आपको निचले पेड़ू में तेज़ दर्द होता है तो देखभाल आवश्यक है यह इस बात का संकेत है कि भ्रूण निकलने वाला है। कुछ मामलों में ये संकेत सांस लेने में तकलीफ देते हैं जो गर्भपात के सकारात्मक संकेत हैं।

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  1. संकुचन दर्द के बीच के समय पर ध्यान दें (Notice the time between painful contractions – pregnancy me hone wali problem)

संकुचन दर्द बच्चे के दर्द के पूर्व देखा जाता है और वह बहुत दर्द देता है और प्राय: लगभग 5 से 20 मिनट पर करता है। लेकिन जब यह दर्द गर्भावस्था के दौरान होता है तो यह गर्भपात का संकेत है। कुछ मामलों में अपरिपक्व दर्द अस्पताल पर रोका जा सकता है और गर्भावस्था को बनाये रखा जा सकता है।

सावधान रहें अगर गर्भावस्था के लक्षण में कमी हो (Be aware if there is a reduction in the symptoms of pregnancy)

गर्भावस्था के लक्षण में कमी या के गायब होने का संकेत जैसे वजन में कमी, संकेत दे सकता है कि गर्भावस्था गर्भपात में बदल रहा है और उचित रीति से सूचित किया जाना चाहिये।

मरोड़ें उठना (Cramping)

धब्बों के साथ मरोड़ें उठना गर्भपात होने के शुरूआती लक्षणों में से एक माना जाता है .पर कुछ महिलाओं को इस बात की अनुभूति नहीं होती कि वे गर्भवती हैं, क्योंकि उनकी गर्भावस्था के हॉर्मोन (hormones) कम होने लगते हैं .उदाहरण के तौर पर वे स्तनों की नरमाहट या मतली के लक्षणों को महसूस नहीं कर पाती हैं।

गर्भपात होने के सबसे मुख्य लक्षणों में मरोड़ें उठना, धब्बे और गर्भावस्था के लक्षणों को महसूस ना करना होता है। मरोड़ें और धब्बे पड़ने की समस्या पहली तिमाही में होती है और स्तनों के नर्म होने और मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness) जैसे सामान्य लक्षणों से पहले होती है। यह 13 हफ़्तों तक ठीक हो जाती है और तब तक गर्भपात नहीं होता। ऐसे समय अपने डॉक्टर से संपर्क कर लें।

दर्द (Pain)

खून निकलने के साथ दर्द होना भी गर्भपात का एक लक्षण होता है। यह दर्द, पेट, कूल्हों के भाग या पीठ के निचले हिस्से में हो सकता है। यह दर्द हलके से लेकर मासिक धर्म की मरोड़ों जितना तेज़ हो सकता है। यह बताना कठिन होता है कि यह दर्द सामान्य है या नहीं, क्योंकि इस तरह के दर्द गर्भावस्था के दौरान भी काफी सामान्य होते हैं। उस समय आपके गर्भाशय के बढ़े आकार को संभालने के लिए आपका शरीर बड़ा हो जाता है।

बच्चे की हरकतों का कम होना (Decreased activity of the baby)

गर्भपात आमतौर पर पहली तिमाही में ही हो जाते हैं, पर बच्चे को खो देने का अहसास हर महिला को अलग अलग समय पर होता है। आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य को जांचने का यह एक तरीका है कि आप उसकी हरकतों पर ध्यान देती रहें। अगर बच्चे की हरकतों में अचानक ही कमी आए या फिर यह पूरी तरह ही बंद हो जाए तो अपने डॉक्टर से बात करें और यह जानकारी लें कि कोई और जांच ज़रूरी है या नहीं।

गर्भपात के बाद क्या करे – गर्भवती महिलाओं के लिए सलाह (Tips for pregnant women)

  • गर्भपात से बचने के उपाय, उन महिलाओं के लिये गर्भपात की पुष्टि करना बहुत ही कठिन होता है जिनको सुनिश्चित गर्भ नहीं है।

गर्भपात से कैसे बचा जाए?

  • अगर गर्भवती परीक्षण सकारात्मक है तो एक अन्य घर पर सुनिश्चित होने के लिये गर्भवती परीक्षण गर्भपात (garbhavastha ki samasya) को जानने के लिये करें। अगर परीक्षण नकारात्मक या कठिनाई से जाना जाता है तो आगे के सहयोग को अवश्य लिया जाना चाहिये।
  • गर्भपात से बचने के उपाय, गर्भपात के पशचात दुखी होना या नुकसान का अनुभव होना स्वाभाविक है और स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराने वाले, परिवार, मित्रों और धार्मिक संस्थाओं को घाव भरने में सहायता करना चाहिये।
  • संतुलित आहार बनायें और जब गर्भवती होना चाहती हैं और सम्पूर्ण गर्भावस्था के समय स्वास्थ्य देखभाल करने वाले पेशेवरों से सलाह लें, जिससे कि गर्भपात न हो। अगर पहले गर्भावस्था का अंत गर्भपात में हो चुका हो तो चिकित्सकीय सलाह लें।

शुरूआती गर्भपात (मिसकैरेज) क्या होता है? (What is early miscarriage?)

शुरूआती गर्भपात गर्भ में पल रहे बच्चे का ऐसा गर्भपात है जो शुरूआती 12 हफ़्तों में ही हो जाता है। शुरूआती गर्भपात काफी सामान्य होते हैं और कई बार तो ये उस समय से भी पहले हो जाते हैं, जब एक महिला को अहसास भी नहीं होता कि वह गर्भवती है। गर्भावस्था के किसी भी चरण में गर्भपात होना काफी चौंकाने वाली घटना के रूप में सामने आता है।

जल्दी गर्भपात होने के कारण क्या होते हैं? (What are the cause’s early miscarriage? – garbhpat ke karan)

शुरूआती और जल्दी गर्भपात आमतौर पर तब होता है, जब भ्रूण पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता। गर्भावस्था की सामान्य ज़रुरत यह होती है कि एक बच्चे को अपने माता और पिटा दोनों से समान मात्रा में क्रोमोसोम (Chromosome) प्राप्त होने चाहिए। क्रोमोसोम की समस्या से एक बच्चे के विकसित होने और बढ़ने में काफी बाधा उत्पन्न होती है। ये बाधाएं आमतौर पर तब उत्पन्न होती हैं, जब क्रोमोसोम की मात्रा या तो बहुत ज़्यादा होती है और या तो ना के बराबर होती है। ऐसी स्थिति में गर्भावस्था की स्थिति का अंत भ्रूण के साथ ही हो जाता है।

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गर्भपात के शुरूआती लक्षण (What are the early signs and symptoms of miscarriage? – miscarriage ki wajah)

खून निकलना (Bleeding)

सबसे पहला और सबसे सामान्य गर्भपात का लक्षण योनि से ख़ून का आना है। ये रक्तस्त्राव हल्का भी हो सकता है या फिर थक्के के रूप में ज्यादा भी। यह रक्तस्त्राव कई दिनों तक चल सकता है और इसका रंग भूरे की जगह चमकीला लाल होता है। पर कई बार रक्तस्त्राव हो जाने के बाद भी गर्भावस्था सामान्य रूप से चलती रहती है। इसे चेतावनी वाला गर्भपात कहा जाता है। गर्भावस्था की पहली तिमाही में रक्त निकलना काफी सामान्य है। अगर आपको लगता है कि आप गर्भवती हैं तो रक्तस्त्राव होने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्भावस्था के लक्षणों का बदलना (Change in the symptoms of pregnancy – miscarriage ke lakshan)

गर्भावस्था के लक्षणों में आफी बदलाव जैसे बीमार होना या स्तनों का नर्म होना आदि आ सकते हैं। अगर दूसरी तिमाही के पहले ऐसे अजीब बदलाव एक महिला के शरीर में आते हैं तो इसका मुख्य कारण गर्भावस्था के हॉर्मोन में कमी आना या गर्भपात की चेतावनी हो सकता है। इस स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें।

एक्टोपिक गर्भावस्था (Ectopic pregnancy)

यह काफी कम देखा जाता है कि गर्भावस्था की स्थिति गर्भ से बाहर उत्पन्न होती है। यह एक गंभीर मामला होता है, क्योंकि इसके अंतर्गत अंदरूनी खून भी निकल सकता है। एक्टोपिक गर्भावस्था के लक्षणों के अंतर्गत पेट के एक तरफ काफी तेज़ दर्द, योनि से खून निकलना, कंधे के सिरे पर दर्द होना, बेहोशी छाना, दस्त और उल्टी आना मुख्य है। ये सारे लक्षण आमतौर पर गर्भावस्था के 5वें से 14वें हफ्ते के बीच देखे जाते हैं।

गर्भावस्था का अहसास ना होना (No feeling of pregnancy)

जब गर्भपात का होना तय रहता है तो महिला के शरीर में अचानक से परिवर्तन होते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर बच्चे की गर्भ में मृत्यु हो जाए तो प्लेसेंटा (placenta) हॉर्मोन का उत्पादन करना बंद कर देता है। इससे महिला को लक्षण समझ में आते हैं और यह अहसास होता है कि उसका गर्भपात हो चुका है।

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