What is a cataract? Symptoms and treatments for cataracts – मोतियाबिंद क्या है? मोतीयाबिंद के लक्षण एवं उपचार

मोतियाबिंद क्या है? (What is a cataract?)

सरल शब्दों में, मोतियाबिंद वह स्थिति है जब आँखों की क्रिस्टलाइन लेंस (crystalline lens) पुरानी हो जाती है अथवा आँखों की अन्य समस्याओं से ग्रस्त हो जाती है।  यह उम्र के साथ होता है एवं हममें से अधिकांश लोग 65 की उम्र से पहले मोतियाबिंद का शिकार होते हैं। हालांकि मोतियाबिंद के प्रमुख कारण आयु का बढ़ना, विभिन्न स्टेरॉयड (steroid) औषधियों का अत्याधिक सेवन, मधुमेह एवं अन्य गंभीर बीमारियां हैं।

रोग की पहचान (Diagnosis)

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यदि आपको लगता है की आपकी जान पहचान में कोई मोतियाबिंद से ग्रस्त है तो किसी नेत्र विशेषज्ञ के पास जाने से आपको इस समस्या की गंभीरता का अंदाज़ा होगा। नेत्र विशेषज्ञ ऐसा डॉक्टर होता है जो शल्य चिकित्सा कर सकता है एवं जिसने आँखों की शल्य चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान में महारत हासिल की है।  आप नेत्रों की जांच करने वाले विशेषज्ञ के पास जा सकते हैं जो आपको मोतियाबिंद की गंभीरता के बारे में बताएगा एवं आपका इलाज शुरू करने में सहायता करेगा। ये ऐसे व्यक्ति होते हैं जो आपको नेत्र चिकित्सक के पास शल्य चिकित्सा की स्थिति में भेजते हैं।

मोतियाबिंद के लक्षण (Symptoms to look for)

ऐसे कई लक्षण हैं जिनसे आपको सावधान रहना चाहिए, पर इन्हें पहचानना थोड़ा सा मुश्किल होता है। हालांकि यदि आपकी दृष्टि में कोई भारी बदलाव होता है तो किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से अपनी आँखों की जांच करवा लें।  सबसे सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • एक आँख में दोहरी चीज़ें दिखना
  • रोशनी कम होना या रंग देखने सम्बन्धी अन्य परिवर्तन
  • रात को आँखों की दृष्टि का कमज़ोर होना
  • कॉन्टेक्ट्स (contacts) या चश्मे के प्रिस्क्रिप्शन (prescription) में बार बार बदलाव
  • उग्र प्रकाश एवं रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
  • धुंधली नज़र

यदि आप उपरोक्त में से किसी भी लक्षण का अनुभव कर रहे हैं तो सुनिश्चित करें कि अपनी आँखों की जांच करवाएं, जिससे की इलाज जल्दी से जल्दी हो सके। जितनी जल्दी रोग का पता चलेगा एवं इलाज शुरू होगा, उतनी ही जल्दी आपके लिए इस बात को तय करना आसान होगा की कौन सा इलाज आपके लिए श्रेष्ठ होगा।

मोतियाबिंद के उपचार (Cataract treatment)

आँखों एवं धूप के चश्मे (Eyeglasses and sunglasses)

मोतियाबिंद का जल्दी उपचार करने के सबसे सामान्य तरीकों में आँखों के चश्मे बदलने या धूप के चश्मे पहनने का तरीका शामिल है। आपको उच्च पावर (power) का चश्मा दिया जाएगा जिसमें एंटी-ग्लेयर (anti-glare), या प्रिस्क्रिप्शन वाले धूप के चश्मे दिए जाएंगे जिनमें एंटी-ग्लेयर कोटिंग (coating) हो। इसके अलावा मोतियाबिंद से प्रभावित लोगों के लिए एक और तरीका मैग्नीफाइंग ग्लास (magnifying glass) का प्रयोग करना है, जिससे उन्हें छोटा लिखा हुआ पढ़ने एवं साफ देखने में आसानी होती है। यह उन तरीकों में से एक है जहां वे पहले यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं की शल्य क्रिया की आवश्यकता ना हो, पर ये सबके लिए काम नहीं करता।  ऐसा खासकर तब होता है जब मोतियाबिंद गंभीर अवस्था में हो।

शल्य क्रिया (Surgery)

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बाकी इलाज असफल होने पर यह एकमात्र तरीका है जिसका प्रयोग करके आप मोतियाबिंद का इलाज कर सकते हैं। यह शल्य क्रिया एक आँखों के एक प्रामाणिक शल्य चिकित्सक द्वारा की जाती है एवं ऐसी प्रक्रिया है जहां पुरानी धुंधली लेंस आँखों से निकालकर उसके बदले प्लास्टिक (plastic) की एक साफ़ कृत्रिम लेंस लगाई जाती है। आमतौर पर ये शल्य क्रियाएं लोकल अनेस्थेटिक (local anesthetic) के साथ आउटपेशेंट (outpatient) प्रक्रिया के रूप में की जाती है, जिसका अर्थ यह है कि मरीज़ को सारी रात अस्पताल में नहीं रहना पड़ता। शल्य चिकित्सक आँखों की पुतलियों को इस प्रक्रिया की शुरुआत में आई ड्रॉप्स (eye drops) से डाइलेट (dilate) कर देते हैं, जिसमें अनेस्थेटिक भी होता है।  इस शल्य क्रिया के दौरान मरीज़ को किसी प्रकार का दर्द नहीं होता। उसे केवल चमकीली रोशनी दिखेगी।

मोतियाबिंद समय के साथ गंभीर हो सकता है, जिसका अर्थ है कि जितनी जल्दी इसका इलाज हो उतना ही अच्छा है।  एक बार इस बीमारी का पता चलने पर इलाज शुरू हो सकता है।  आप अपने चश्मे को बदलकर या धूप के चश्मे पहनकर शल्य क्रिया को टालने का भी प्रयास कर सकते हैं।  यदि ऐसा ना हुआ तो मरीज़ को ठीक से देखने के लिए शल्य क्रिया की आवश्यकता पड़ेगी।