Hindi tips for cervical spondylosis – सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के कारण, संकेत, लक्षण एवं उपचार

बढ़ती उम्र के साथ हम शरीर में कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं का अनुभव करने लगते हैं। सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस भी ऐसी ही एक समस्या है, जब हमारा शरीर अपक्षयी (degenerative) बदलावों से गुज़रता है। यह समस्या उनके लिए काफी सामान्य है जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक है। इसके अलावा, यह समस्या आपकी सर्वाइकल रीढ़ या गले के लिगामेंट्स (ligaments), रीढ़ के जोड़ एवं डिस्क पर बुरा प्रभाव छोड़ सकती है। उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के कारण आपके डिस्क क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। आमतौर पर दर्द सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस का एक प्रमुख लक्षण होता है। परंतु सभी स्थितियों में आपको दर्द के अलावा अन्य लक्षणों का भी अनुभव हो सकता है।

सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस के प्रमुख कारण (What are the major causes behind cervical spondylosis?)

विषाक्त पदार्थो को निकालने और स्वस्थ बनाने के लिए

जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपके रीढ़ या गले के कार्टिलेज (cartilage) एवं हड्डियाँ क्षतिग्रस्त होना शुरू हो जाते हैं। इसके फलस्वरूप निम्नलिखित समस्याएं सामने आती हैं।

हर्नियेटेड एवं शुष्क डिस्क (Herniated and dehydrated discs)

हमारी डिस्क रीढ़ की हड्डियों के जोड़ की तरह कार्य करती हैं। एक बार 40 की आयु पार कर लेने के बाद ये डिस्क सूखकर सिकुड़ने लगती हैं। इसके फलस्वरूप डिस्क पर दरारें भी आ जाती हैं और ये पहले की अपेक्षा बड़ी भी हो जाती हैं।

अनमनीय लिगामेंट्स (Inflexible ligaments)

सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस के कारकों में यह काफी आम है। इसमें रीढ़ की हड्डी के लिगामेंट्स काफी सख्त हो जाते हैं एवं गला भी अपनी लोच खो देता है।

हड्डियों की संख्या में वृद्धि (Bone spurs)

डिस्क क्षतिग्रस्त होने के कारण हमारी रीढ़ को मज़बूत बनाने हेतु हमारे शरीर की हड्डियों की संख्या में वृद्धि हो जाती है। हालांकि इससे हमारी नसों की जड़ें काफी प्रभावित होती हैं।

सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस की समस्या पैदा करने वाले कारक (Factors, causing the risk of cervical spondylosis)

पेशा (Occupation)

कुछ लोग ऐसे काम करते हैं जिनमें उनका गला हमेशा कार्यशील रहता है या उनके गले में काफी तनाव पैदा होता है। ऐसी स्थिति में उनके सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस की समस्या से ग्रस्त होने की काफी संभावना होती है। जो लोग नृत्य या मार्शल आर्ट्स (martial arts) की विधा में अपना समय लगाते हैं, उनके लिए भी इस समस्या से ग्रसित होना आश्चर्यजनक नहीं है। यह सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस का महत्वपूर्ण कारक है।

नुवांशिक कारण (Genetic reasons)

शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि ऐसे आनुवांशिक कारक भी होते हैं जो इस तरह का स्पोंडीलोसिस पैदा करते हैं। अतः स्पोंडीलोसिस से बचाव के तरीके ढूँढने के लिए आपको आपके परिवारजनों के स्वास्थ्य इतिहास के बारे में जानकारी रखनी होगी।

धूम्रपान (Smoking)

नियमित धूम्रपान करने से भी गले का दर्द या स्पोंडीलोसिस होने की काफी संभावना रहती है।

उम्र बढ़ना (Aging)

अस्वस्थ हृदय के लक्षण

सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस के कारणों में यह एक महत्वपूर्ण कारक है।

पुरुष एवं महिलाओं में से कोई भी इस प्रकार के स्पोंडीलोसिस का शिकार हो सकता है। लेकिन हमने देखा है कि पुरुषों में इस समस्या के लक्षण काफी कम उम्र से दिखने लगते हैं।

नसों की जड़ों की गंभीर सिकुड़न से स्थायी नुकसान हो सकता है, एवं इसके फलस्वरूप आपको सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपके लिए अपने डॉक्टर से सलाह करना आवश्यक है।

सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस के लक्षण (Symptoms indicating cervical spondylosis)

कंधे एवं गले में अकड़न फलस्वरूप बीच बीच में दर्द होना

सिरदर्द – यह आपकी गर्दन के पिछले हिस्से में शुरू होता है

शारीरिक परीक्षण (Physical test)

डॉक्टर आपके गले एवं सिर को एक से दूसरे सिरे की ओर घुमाकर इसकी जांच करेगा। वह हाथ एवं पाँव की क्रियाओं की भी जांच करेगा। वह आपकी मुद्रा देखने के लिए आपको चलकर दिखाने के लिए कहेगा। वह पूरी तरह निचले और ऊपरी भागों की संवेदनशीलता एवं शक्ति का आंकलन करेगा।

तस्वीरों के लिए स्कैनिंग प्रक्रिया (Scanning process for images)

आपको रीढ़ की हड्डी के संभावित नुकसान एवं हड्डियों की बढ़त के बारे में जानने के लिए एक एक्सरे करवाना पड़ेगा। यदि आपको हाथों में काफी गंभीर दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर आपको एमआरआई करवाने पर जोर दे सकता है। यह परीक्षण आपकी नसों की जड़ों की स्थिति का आंकलन करने के लिए किया जाता है। इस स्कैन से आपके डॉक्टर को यह भी पता चलेगा कि शल्य क्रिया की आवश्यकता है अथवा नहीं तथा इससे समस्या की मूल जड़ का भी पता चलेगा।

सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस के लिए एक और उपयुक्त परीक्षण माइलोग्राम (myelogram) है , जहां पेशेवर चिकित्सक आपकी रीढ़ में एक डाई (dye) लगाते हैं। यह डाई स्कैन में दिखाई देती है। इसके अतिरिक्त, सीटी स्कैन भी आपकी हड्डी की संरचना का परीक्षण करने में काफी प्रभाव़ी साबित होती है।

इलेक्ट्रोमायोग्राफी एवं एनसीएस (Electromyography and NCS) आपकी नसों एवं मांसपेशियों के आंकलन के लिए काफी उपयोगी साबित होते हैं।

चिकित्सा (Treatment)

विटामिन्स के फायदे और स्वास्थ्य लाभ

  • आधुनिक चिकित्सा लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं।
  • अधिकतर डॉक्टर उन मरीज़ों के लिए मांसपेशियों को आराम देने की औषधि प्रस्तावित करते हैं जिन्हें गले में अकड़न तथा अकड़ी मांसपेशियों की शिकायत रहती है। ऐसी ही एक औषधि है साइक्लोबेंज़ाप्रिन (cyclobenzaprine)
  • एक और औषधि, जिसका प्रयोग तनाव दूर करने के लिए किया जाता है, एमिट्रिपटिलाइन (Amitriptyline) है। हालांकि यह दर्द की तीव्रता कम करने में काफी सहायक साबित होती है।
  • डॉक्टर दर्द में कमी लाने के लिए आपके गले में स्टेरॉयड (steroid) का भी संचार करते हैं।

शल्य क्रिया की प्रक्रिया (Surgical process)

ओस्टेओफाइट्स (osteophytes) एवं बाहर निकली हड्डियों को निकालकर शल्य चिकित्सक आपकी नसों की जड़ पर पड़ रहे दबाव को कम करते हैं।

सर्वाइकल फ्यूज़न (Cervical fusion) एक और शल्य क्रिया है जिसका प्रयोग रीढ़ की हड्डी पर पड़ रहे दबाव को

कम करने के लिए किया जाता है।

व्यायाम (Workouts)

  • अपने गले को आगे पीछे करके अपनी ठुड्डी को सामने लाएं
  • अपने गले की मांसपेशियों में कसावट लाने के लिए सिर को तिरछा करें
  • आरामदायक मुद्रा बनाये रखने के लिए गले को मोड़ें

इस प्रकार ये व्यायाम करें और अपने डॉक्टर से सलाह करके सफलतापूर्वक अपने सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस का उपचार करें।

सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस ठीक करने के घरेलू नुस्खे (Home remedies for cervical spondylosis)

लहसुन (Garlic)

जब बात सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस का उपचार करने की हो, तो लहसुन का सेवन आपको काफी अच्छे परिणाम प्रदान कर सकता है। इसके पीड़ानाशक एवं जलनरोधी गुण गले एवं इसके आसपास के भागों की सूजन, जलन एवं दर्द को दूर करते हैं।

नियमित रूप से कच्चे लहसुन के कुछ फाहों का सेवन करें। हर सुबह खाली पेट ऐसा करें। लहसुन के फाहों को चबाएं एवं थोड़े से पानी के साथ इसे निगल लें। आप लहसुन के तेल का प्रयोग गले के प्रभावित भाग की मालिश करने के लिए कर सकते हैं। इसके लिए केवल कढ़ाही को गर्म करें एवं इसमें तीन से चार लहसुन के फाहे डालें। इन्हें कढ़ाही में डालने से पहले मसल लें। अब इसमें एक चम्मच नारियल तेल मिश्रित कर दें। इसे आंच से हटा दें एवं इसके ठंडा होने की प्रतीक्षा करें। इस तेल से रोज़ाना कुछ मिनट मालिश करने से आपको काफी लाभ मिलेगा। इस प्रक्रिया के बाद गर्म पानी से स्नान कर लें।

हल्दी (Turmeric)

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हल्दी के गुण सर्वाइकल स्पोंडीलोसिस की समस्या को दूर करने में काफी मददगार साबित होते हैं। यह रक्त के संचार में वृद्धि करता है तथा इसमें जलनरोधी गुण होते हैं। यह मांसपेशियों में होने वाले दर्द एवं अकड़न को कम करता है। एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिश्रित करें। इसे अच्छे से हिलाएं एवं धीमी आंच पर गर्म करें। ऐसा पांच मिनट तक करें। इसके बाद इसे आंच से हटाकर ठंडा होने दें। अब इसमें एक चम्मच शहद डालें और दिन में दो बार इसका सेवन करें।

आप आजकल बाज़ार से हल्दी की गोलियां भी खरीद सकते हैं, परन्तु डॉक्टर से परामर्श किये बिना इनका सेवन ना करें।

तिल (Sesame seeds)

यदि आपको आयुर्वेद की असाधारण शक्ति पर विश्वास है तो यह उपचार आपके लिए है। तिल विटामिन, जिंक, फॉस्फोरस, तांबे, मैंगनीज, कैल्शियम और मैग्नीशियम (vitamins, zinc, phosphorus, copper, manganese, calcium and magnesium) से भरपूर होता है। यह आपके संपूर्ण स्वास्थ्य एवं हड्डियों की देखभाल करता है। प्रभावित भागों पर रोज़ाना तिल के तेल से कई बार मालिश करना आपके लिए काफी लाभदायक साबित होता है।