Which day is perfect in a month to conceive – गर्भधारण के लिए महीने का सबसे सही दिन कौन सा?

गर्भावस्था की शुरुआत गर्भधारण करने से होती है जो पुरुष के वीर्य की कोशिका के स्त्री के कोशिका में मिलने और उसे उर्वर बनाने से होता है। यह प्रक्रिया महिला के गर्भनाल में शुरू होती है और फिर भ्रूण की स्थापना गर्भाशय में होती है।यह वहा 9 महीने तक रहकर नए जीवन की रचना करता है।

कुछ लोगों की यह धारणा होती है कि गर्भवती होना सिर्फ एक संयोग की बात है जो एक पुरुष का शुक्राणु एक महिला के अण्डों के साथ मिश्रित होने भर से ही फलीभूत हो जाती है। पर वैज्ञानिक रूप से यह ना ही एक संयोग है और ना ही कोई दुर्घटना। गर्भवती होने की प्रक्रिया को पूरा करने या एक सही और पुख्ता तरीके से इसे रोकने, दोनों का ही एक वैज्ञानिक तरीका होता है।

अगर आप असल में गर्भवती बनना चाहती हैं तो आपको महीने के उन दिनों के बारे में पता होना चाहिए जब गर्भवती होने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है। जी हाँ, इसे अण्डोत्सर्ग की स्थिति के रूप में जाना जाता है। आइये इसके बारे में थोड़े और विस्तार से जानें।

जिन दम्पत्तियों को बच्चों की कामना हो उन्हें महिला के उर्वर काल में सम्भोग करना चाहिए। गर्भधारण के लिए एक दिन निश्चित करना काफी कठिन काम है। हर महीने अण्डोत्सर्ग के बाद यह उर्वर दशा 6 दिनों तक रहती है जिसके बाद महिलाओं का अण्डोत्सर्ग होता है। यह एक 6 दिन का कालखण्ड होता है क्योंकि एक शुक्राणु 6 दिन तक ज़िंदा रह सकता है जबकि अंडा जिस दिन छोड़ा जाता हैं उसके एक दिन तक ही ज़िंदा बचता है।

महिलाएं गर्भधारण को लेकर हमेशा चिंता में रहती हैं। यह अण्डोत्सर्ग के समय पर निर्भर करता है। जब एक महिला अण्डोत्सर्ग कर रही होती है तो उसे वही समय गर्भधारण के लिए श्रेष्ठ समय मान लेना चाहिए। पर कई कम अनुभवी महिलाएं अण्डोत्सर्ग का समय नहीं समझ पाती हैं।

अण्डोत्सर्ग के होने का समय (When does ovulation take place?)

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अण्डोत्सर्ग का समय, अण्डोत्सर्ग मासिक धर्म चक्र एवं मासिक धर्म की लम्बाई पर निर्भर करता है। एक आम महिला को अण्डोत्सर्ग के 12 से 14 दिन बाद मासिक धर्म होता है। यह मासिक धर्म छोटा होकर 22 दिन का भी हो सकता है या फिर ये बढ़कर 36 दिन का भी हो सकता है। आम 28 दिनों के मासिक धर्म की अवस्था में अण्डोत्सर्ग मासिक धर्म समाप्त होने के 14 दिन बाद होता है। लम्बे मासिक धर्म चक्र की स्थिति में अण्डोत्सर्ग ज़्यादा समय लेता है। हर महिला में मासिक धर्म 7 दिनों तक अलग होता है और इसी बीच एक महिला उर्वर होती है। गर्भधारण के लिए हर मासिक धर्म में 2 से 3 बार सम्भोग करना चाहिए। हर 2 से 3 दिन में सम्भोग करने से वीर्य अच्छा होगा।

अण्डोत्सर्ग के लक्षण (Garbhvati hone ke liye signs of ovulation)

यह वह समय होता है जब महिला के अंडाशय से निकला परिपक्व अंडा गर्भनाल में पहुँचता है और उर्वर होने के लिए तैयार रहता है। अण्डोत्सर्ग के लक्षण अगले मासिक धर्म से 3 हफ्ते पहले दिखने लगते हैं। एक लक्षण यह होता है कि इस समय योनि से सफ़ेद द्रव्य का रिसाव ज़्यादा होता है जिसे फर्टाइल म्यूकस कहते हैं। इस स्थिति में महिलाओं को पेट के एक हिस्से में हल्का सा दर्द होता है। उर्वर दिनों को जानने का सबसे अच्छा तरीका सर्वाइकल म्यूकस में आए बदलावों को परखना है।

अण्डोत्सर्ग की गणना (The ovulation calculator se garbhdharan ke upay)

गर्भधारण की प्रक्रिया तब आसान हो जाती है जब उर्वर अवस्था के बारे में समझ बढ़ती है। गर्भावस्थ का समय अण्डोत्सर्ग से पांच दिन पहले या उसी दिन होता है। अण्डोत्सर्ग करना, अगर किसी महिला ने अण्डोत्सर्ग के एक हफ्ते पहले सम्भोग किया है तो उसके गर्भधारण करने की संभावना नहीं होती है, पर ये संभावना अण्डोत्सर्ग में दो दिन बचे होने या अण्डोत्सर्ग के दिन की स्थिति में ज़्यादा होती है।

अण्डोत्सर्ग की तिथि का पता कैसे लगाएं? (How to know when ovulation will take place?)

अण्डोत्सर्ग के समय का पता मासिक धर्म की अवधि से चलाया जा सकता है। पहला दिन मेंसेस (menses) का पहला दिन होता है और अगले मेंसेस का पहला दिन इस मासिक धर्म का आखिरी दिन होता है। अण्डोत्सर्ग की प्रक्रिया अगले मासिक धर्म के 14 दिन पहले शुरू हो जाती है। सामान्य मासिक धर्म की अवधि 28 दिनों की होती है। अण्डोत्सर्ग 14वें दिन होता है और गर्भवती होने का समय 12वें दिन से शुरू हो जाता है। अगर मासिक धर्म 35 दिनों का हो तो अण्डोत्सर्ग की प्रक्रिया 21वें दिन शुरू हो जाती है और गर्भवती होने का सही समय 19वें दिन से शुरू होता है। 21 दिन के छोटे मासिक धर्म के समय में अण्डोत्सर्ग 7वें दिन होता है और गर्भवती होने का समय 5वें दिन से शुरू हो जाता है।

अण्डोत्सर्ग और प्रजनन शक्ति के समय को जानने के नुस्खे (Tips on finding out ovulation period and fertility)

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कैलेंडर की मदद लें (Take help of your calendar)

अगर कोई महिला गर्भवती होना चाहती है तो उसे अपने मासिक धर्म के समय का हिसाब रखना होगा। आमतौर पर मासिक धर्म हर 28 दिन के बाद होता है। पर आजकल महिलाओं का मासिक धर्म सही प्रकार से नहीं होता। यह 30 दिन, 28 दिन या 33 दिन के बाद होता है। महिलाओं में अण्डोत्सर्ग मासिक धर्म के 14 दिन बाद होता है।

अण्डोत्सर्ग का पता लगाने के लक्षण (Symptoms to notice ovulation se garbh dharan ke tarike)

हर महिला को ऐसे लक्षणों से दो चार होना पड़ता है जिससे यह पता चलता है कि उनके अण्डोत्सर्ग का समय नज़दीक है। गर्भवती होने का समय भी एक महिला को दिखने वाले लक्षणों से साफ हो जाता है। आपको अण्डोत्सर्ग से कुछ ही समय पहले योनि से एक साफ़ द्रव्य निकलता हुआ दिखेगा। इस साफ़ द्रव्य से आप इस बात का पता लगा सकती हैं कि आप उर्वर हैं और इस अवधि में आसानी से गर्भवती हो सकती हैं। ऐसी भी एक विधि है जिसकी मदद से यह एक महिला के अण्डोत्सर्ग के bad भी उर्वर ना होने का पता लगाया जा सकता है। यह वह समय होता है जब आपके शरीर से थोड़े मिश्रित रंग का द्रव्य निकलने लगता है। कई बार ऐसी स्थिति में महिलाओं के शरीर से किसी भी प्रकार का कोई भी द्रव्य नहीं निकलता है। कई महिलाओं को अण्डोत्सर्ग की प्रक्रिया के दौरान हलके मरोड़ों का भी सामना करना पड़ता है।

महिला के शरीर का तापमान (Temperature of a woman’s body)

जो महिलाएं गर्भवती होने की इच्छा रखती हैं, उन्हें समय समय पर अपने शरीर के तापमान की जांच भी करते रहनी चाहिए। इसके लिए एक यंत्र भी अवश्य खरीद लें। हर दिन सुबह उठते ही सबसे पहले अपने शरीर के तापमान की जांच करें। जब आप गर्भवती होने और उर्वर बनने की तैयारी कर रही हों तो आपको हर सुबह अपने शरीर के तापमान कहीं लिखकर रखना चाहिए। एक महिला अपने शरीर के तापमान के उच्च अवस्था में पहुँचने के 2 से 3 हफ्ते पहले सबसे ज़्यादा उर्वर रहती है।

गर्भवती होने के तरीके, सेक्स का अंतराल (The frequency of having sex)

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अगर आप असल में गर्भवती होना चाहती हैं तो सेक्स की प्रक्रिया को नियमित रूप से अंजाम देना काफी आवश्यक है। अण्डोत्सर्ग की अवधि के 14 दिनों के दौरान गर्भवती होने के लिए सेक्स की प्रक्रिया का सही प्रकार पालन करना काफी आवश्यक है।

महिलाओं या जोड़ों को गर्भवती होने के लिए उर्वर समय की जानकारी होनी चाहिए। यह अवधि हर महीने 6 दिनों की होती है। इन्हीं 6 दिनों के अन्दर एक महिला का शरीर अण्डों का सृजन करता है। एक बार ओवम (ovum) से निकलने के बाद एक अंडे की जीवन अवधि मात्र एक दिन की ही होती है। पर पुरुष के शुक्राणु की जीवन अवधि एक हफ़्तों तक की भी हो सकती है। अतः 6 दिनों के अन्दर जोड़ों के बीच गर्भावास्था की प्रक्रिया की आसानी से शुरुआत हो सकती है। अगर आपने अण्डोत्सर्ग शुरू होने के केवल 2 दिन पहले सेक्स किया है तो आपकी साथी के गर्भवती होने की संभावना काफी ज़्यादा होती है।

अण्डोत्सर्ग और गर्भवती होने का सही समय पता करने के तरीके (Some accurate methods to know the time of evolution are pregnant hone ke liye tips Hindi me)

  • इस समय योनि का रिसाव काफी गाढ़ा और चिकना होता है।
  • अण्डोत्सर्ग की गणना करने वाली किट आपकी मदद कर सकती है। यह गणना आम मासिक धर्म से 17 दिन घटाकर की जाती है। सकारात्मक परिणाम से पता चलता है कि अण्डोत्सर्ग 24 से 36 घंटों में होगा।
  • बसल बॉडी तापमान अण्डोत्सर्ग के बाद बढ़ जाता है। यह एक ख़ास थर्मामीटर की सहायता से नापा जाता है।
  • अण्डोत्सर्ग के दौरान गर्भाशय की नाल खुली रहती है जो कि आमतौर पर बंद रहती है।
  • मूत्र और लार से अण्डोत्सर्ग की गणना करने वाली किट से भी महिलाओं के उर्वर समय का पता चलता है।

कुछ साइड इफेक्ट के साथ शीर्ष गर्भनिरोधक गोलियां क्या हैं?

  • अण्डोत्सर्ग के समय कई महिलाओं की योनि में धब्बे दिखते हैं जो कि उर्वर समय की पहचान है।
  • ऐसा पाया गया है कि जवान महिलाओं के मुकाबले थोड़ी ज़्यादा उम्र की महिलाओं के उर्वर होने की सम्भावना कम होती है। पर शरीर का वज़न सही रखने, पौष्टिक भोजन करने तथा महिलाओं के उर्वरता के समय के दौरान सेक्स करने से गर्भावस्था की संभावनाओं में काफी इजाफा होता है।
  • अण्डोत्सर्ग का समय हर महिला के लिए काफी महत्वपूर्ण वक्त होता है, जिसका सही प्रकार से उपयोग करने पर आसानी से गर्भवती हुआ जा सकता है।

गर्भवती होने के तरीके, अण्डोत्सर्ग का सबसे सही दिन (The perfect day for ovulation)

जी हाँ, अगर आप गर्भवती बनना चाहती हैं तो उर्वरता का समय सम्भोग के लिए सबसे सही रहता है। हर महीने, यह ख़ास समय सीमा करीब 6 दिनों तक रहती है। आप इन 6 दिनों में से किसी भी एक दिन को सम्भोग करने के लिए चुन सकती हैं। यह वह समय होता है जब एक महिला का शरीर अण्डों का उत्पादन करता है।

मासिक धर्म चक्र और गर्भावस्था (Menstruation cycle and pregnnacy)

आमतौर पर मासिक धर्म चक्र तारीख के हिसाब से हर 28 दिन में एक बार आता है। पर जहां कुछ महिलाएं 2 से 3 दिन पहले ही इस मासिक धर्म चक्र का अनुभव करती हैं, वहीँ ऐसी महिलाओं का भी एक समूह है जो मासिक धर्म चक्र के सामान्य समय से 4 या 5 दिन बाद इसका अनुभव करता है। गर्भावस्था का समय सीधे तौर से महिलाओं के मासिक धर्म के चक्र के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसा सिर्फ इस वजह से है कि जिन अधिक उम्र की महिलाओं में रजोनिवृत्ति की प्रक्रिया होती है, उनके गर्भवती होने की कोई भी संभावना नहीं होती। अतः महीने के 5 दिनों का यह ख़ास समय आपको गर्भवती होने का एक मौक़ा प्रदान करता है।

मासिक धर्म चक्र का पता लगाना (Charting menstruation cycle)

उस ख़ास समय का पता लगाना अत्यंत कठिन है जब आप अण्डोत्सर्ग के फलस्वरूप गर्भवती हो जाती हैं। क्योंकि हर महिला में मासिक धर्म चक्र और इसका समय अलग अलग हो सकता है, अतः आपको ऐसा सही समय निकालना चाहिए जब आपके पास शुरुआत की और अंत की एक तारीख हो। आपको इस बात पर ध्यान देने की काफी आवश्यकता है कि मासिक धर्म चक्र की प्रक्रिया पिछले 2 से 3 महीनों से निरंतर हो रही है या नहीं। एक बार जब आपको लगे कि यह निरंतर रूप से हो रही है, तब आप सम्भोग का आनंद ले सकती हैं। हाँ, मासिक धर्म के चक्र को चिन्हित करना और तारीखें लिखकर रखना इस स्थिति में काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा।