Yoga poses for thyroid – थायराइड के लिए योग

थायराइड एक गंभीर रोग है जिसमें कई तरह अन्य समस्याएँ भी साथ होती हैं पर योग के माध्यम से इसका उपचार किया जा सकता है। कई दवाओं और उपचार के बावजूद यह ठीक नहीं होता और इसके कार्न कई तरह की समस्याएँ परेशानी खड़ी कर देती हैं।  ऐसे कई तरह के योगासन है तो थायराइड ग्लैण्ड को आराम देने में मदद करते हैं।

योग शरीर के मेटाबोलिस्म को बढ़ाने का एक सरल उपाय है इससे न केवल थायराइड में राहत मिलती है बल्कि इसकी मदद से शरीर फिर से नए जैसा अनुभव करने लगता है। कुछ आसन तो ऐसे हैं जो थायराइड की समस्या को हमेशा के लिए दूर कर देते हैं, आइये जानें ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में जो थायराइड का उपचार करने में सहायक होते हैं।

थायराइड एक ऐसी समस्या है जो बाहरी तौर पर तो कोई नुकसान नहीं पहुंचाते लेकिन इसके शरीर को कई दुष्प्रभावों से जूझना पड़ता है, अगर आपके परिवार में किसी को थायराइड हो तो यह वंशानुगत समस्या भी बन सकती है इसके अलावा महिलाओं में थायराइड की समस्या होने पर गर्भधारण में परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। इन सभी समस्याओं से प्राकृतिक रूप से बचने के लिए थायराइड का प्राकृतिक उपचार (Thyroid ka prakritik upchar Hindi me) बहुत ज़रूरी है, जो योग के माध्यम से संभव है।

थायराइड के लिए योग हिन्दी में (Effective Yoga poses for Thyroid) 

विपरीत करणी आसन (Vipritkarni asan/Inverted pose)

विपरीत का अर्थ होता है उल्टा और करणी का मतलब है थायराइड की कार्यप्रणाली, अतः थायराइड की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करने के लिए योगासन। यह हाइपोएक्टिव थायराइड से ग्रस्त लोगों के लिए बहुत प्रभावकारी है। इसे घर पर ही आसानी से किया जा सकता है जो थायराइड को संतुलित रखने में मदद करता है।

मत्स्य आसन (Matsyasan/Fish pose)

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मत्स्य आसन भी उन खास आसनों में से एक है जो थायराइड की समस्या को दूर रखने में सहायक होता है। इसका सीधा प्रभाव थायराइड ग्लैण्ड पर पड़ता है। किसी योग विशेषज्ञ की निगरानी में आप इस योग का प्रयोग नियमित रूप से करें।

सूर्य नमस्कार (Surya Namskar/Sun Salute)

यह एक सबसे सामान्य आसन है जिसका प्रयोग लगभग हर तरह के रोगों के उपचार में किया जाता है और योगासन की शुरुआत करने वालों को इसका अभ्यास ज़रूर कराया जाता है। हिन्दू धर्म में सूर्य को देवता की पदवी दी गई है जिसकी पूजा वंदना की जाती है। सुबह के समय सूर्य नमस्कार को सूर्य देवता को प्रणाम करने के रूप में भी देखा जाता है है और यह माना जाता है कि इनकी सुनहरी किरणों में रोगों को दूर करने की क्षमता होती है।

सर्वांग आसन (Sarvang asan/Shoulder stand pose)

थायराइड को प्राकृतिक रूप से ठीक करने के लिए सर्वांग आसन एक बहुत ही प्रभावी आसन है। यह थायरोक्सिन को नियंत्रित करता है और थायराइड ग्लैण्ड को भी आराम देता है।

हलासन (Halasan/Plough pose)

आपने खेतों में हल खींचते हुये बैल को देखा ही होगा। यह आसन ठीक उसी तरह नज़र आता है जो थायराइड से होने वाली समस्याओं को दूर करता है। इस आसन की वजह से गले में संकुचन होता है और यह भी सीधे तौर पर थायराइड ग्लैण्ड को प्रभावित करता है।

भुजंगासन (Bhujngasan/The Cobra pose)

इन आसन के नाम की ही तरह भुजंग या कोबरा की स्थिति होती है। यह एक ऐसा आसन है जो गर्दन में संकुचन और खिंचाव उत्पन्न करता है। थायराइड के प्राकृतिक इलाज में इस आसन का बहुत अधिक महत्व है।

शीर्षासन (Shirshasan/Headstand pose)

अगर आप सभी तरह के योगासनों की तुलना करें तो पाएंगे कि शीर्षासन बहुगुण प्रदान करने वाले आसनों में से एक है। यह थायराइड ग्लैण्ड पर प्रभाव डालता है और मेटाबोल्स्म को भी बेहतर रखता है।

उष्ट्रासन (Ushtrasan/ Camel pose)

उष्ट्रासन में शरीर की स्थिति ऊंट की तरह हो जाती है इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। यह खास आसन है जिसमें गर्दन पर खिंचाव पड़ता है और यह हाइपोथायराइड में राहत देता है।

धनुरासन (Dhanurasan/The bow pose)

वैसे तो धनुरासन के कई फायदे हैं जो शरीर के लिए अलग अलग तरह से असरकारक होता है लेकिन थायराइड के इलाज में धनुरासन एक महत्वपूर्ण आसन है। शरीर में हार्मोन के रिसाव में कमी की वजह से थायराइड की समस्या हो सकती है, शरीर के हार्मोन्स को संतुलित तरीके से स्त्राव के लिए इस आसन का प्रयोग किया जाना चाहिए।

सेतुबंध सर्वांग आसन (Setubandh sarvang asan/Formation of bridge)

प्रत्येक योगासन किसी खास तरह की समस्या का इलाज होता है जिनके नियमित अभ्यास से आप उन समस्याओं को दूर कर सकते हैं। सेतुबंध आसन भी ऐसे ही आसनों में से एक है जो थायराइड डिसऑर्डर पर प्रभाव डालकर सुधार की ओर प्रेरित करती है।

मार्जरी आसन (Marjari Asan/Cat stretch)

मार्जरी आसन भी एक खास किस्म का आसन है जिसमें कई तरह के स्वास्थ्य लाभ होते हैं, थायराइड भी उनमें से एक है। इन सब के अलावा कमर दर्द में भी यह बहुत लाभदायक होता है।

जानुशीर्षासन (Janu shirshasan/One legged forward bend)

इस आसन को जमीन पर बैठ कर करने की आवश्यकता होती है। इसमें रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रख कर पैरों को सामने की ओर रखा जाता है। इसमें एक पैर को मोड़ते हुये दूसरे पैर की तरफ ले जाएँ। बाएँ पैर का तलवा दाहिने पैर की तरफ होना चाहिए। आपने दोनों हाथों को जोड़कर ऊपर की तरफ सीधा खींचे। इसी प्रक्रिया को दूसरे पैर से भी करें।

रामदेव के योग आसन (Yoga asana of ramdev)

कपालभाति (Kapalbhati)

कपालभाति एक बहुत ही चमत्कारिक आसन है जो कई तरह के रोगों को जड़ से दूर कर देता है। इसके लिए पैरों को आपस में मोड कर जमीन में बैठने की ज़रूरत पड़ती है। आप गहरी साँसे लेते हुये साँसों को तेजी से छोटे छोटे टुकड़ों में छोड़ें। इसमें सांस बाहर छोडते समय एक आवाज आती है।

उज्जई प्राणायाम (Ujjayi Pranayam)

यह भी एक बहुत प्रभावी आसान है जो थायराइड के साथ ब्रोंकाइटिस और अस्थमा की समस्या को भी दूर करता है।

 

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